CG: राज्यसभा चुनावः बाहरी प्रत्याशी का कांग्रेस विधायकों ने किया विरोध, सामने आए ये नाम, दिग्गी के रायपुर पहुंचने से चुनाव हुआ रोचक...
छत्तीसगढ़ में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में सियासत की बिसात बिछ गई है। यह पहली बार है कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक में कुछ विधायकों ने राज्य सभा की सीट पर बाहरी प्रत्याशी का खुल कर विरोध कर दिया है। विधायकों ने वरिष्ठ नेताओं के सामने स्थानीय नेता को ही राज्यसभा भेजने पर जोर दिया। इस बीच अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पहुंचने से मामला रोचक हो गया है। राज्यसभा के दिग्गज दावेदारों ने अब तक पत्ता नहीं खोला है और इस बीच नए दावेदारों के नाम भी सामने आ गए हैं।
CG Rajya Sabha Chunav (Congress Vidhayak Ka Virodh) NPG News
रायपुर। छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। 26 फरवरी को अधिसूचना जारी हो गई है और पांच मार्च तक नामांकन दाखिला होना है। ऐसे में प्रत्याशी चयन के लिए ज्यादा समय नहीं है। प्रत्याशी के नाम पर अटकलों के बीच विधानसभा सत्र की तैयारियों के लिए बुलाई गई विधायक दल की बैठक में कांग्रेस विधायकों ने अपनी ही पार्टी की रीति का खुलकर विरोध कर दिया है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद दूसरे प्रदेश के कांग्रेसियों मोहसिना किदवई, राजीव शुक्ला, रंजीत रंजन और केटीएस तुलसी को छत्तीसगढ़ के कोटे से राज्यसभा भेज दिया गया।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि आदिवासी वर्ग और सामान्य वर्ग के विधायकों ने बैठक में अनौपचारिक चर्चा में इस बात पर बल दिया है कि केवल छत्तीसगढ़ के ही किसी कांग्रेस नेता को इस बार राज्यसभा भेजा जाए। कुछ विधायकों ने यह भी तर्क दिया कि बाहरी कांग्रेसियों को यहां से राज्यसभा भेजे जाने से पार्टी को कोई फायदा नहीं होता है। बताते हैं कि बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कई दिग्गज बैठे थे, लेकिन इस पर किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी बीच दिग्विजय सिंह के रायपुर आने से तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि वे एक कार्यक्रम में आए थे, पर राज्यसभा से जोड़ कर देखा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में राज्य सभा की दो में से एक सीट भाजपा के खाते में आई है और दूसरी पर कांग्रेस का राज्य सभा सदस्य बनना तय है। बीते कार्यकाल में दो सीटें कांग्रेस के पास थीं, इनमें से एक सीट विधानसभा की सीटों के आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस की कम हो रही है। एकमात्र सीट के लिए पार्टी के अंदरुनी खाने में तीन बड़े नामों की दावेदारी की चर्चा हो रही है। यदि ये बड़े नामों ने अपना नाम पीछे किया और स्पष्ट कर देते हैं कि वे राज्यसभा नहीं जाएंगे, तब ही बाकी नामों पर विचार की संभावना है। फिलहाल पार्टी में महिला, आदिवासी, ओबीसी में से किस वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जाए, इसकी भी चर्चा कांग्रेस के अलग- अलग धड़ों में हो रही है।
भूपेश-सिंहदेव के इशारे का इंतजार
पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत बीते राज्य सभा चुनाव के वक्त भी इच्छा जाहिर कर चुके थे, इस कारण सभी नेताओं की निगाहें महंत की ओर है। जब तक महंत अपना पत्ता नहीं खोलेंगे, तस्वीर साफ नहीं होगी। महंत ने स्पष्ट का कहा था कि वे एक बार राज्य सभा जाना चाहते हैं। अब उनकी इच्छा का आलाकमान कहां तक सम्मान करता है या क्या परिस्थिति बनती है, यह देखने के लिए प्रत्याशी के फैसले का इंतजार करना होगा। महंत के राज्य सभा जाने की हालत में विधानसभा सीट सक्ती खाली हो जाएगी और वहां पर उपचुनाव होगा। जांजगीर और सक्ती में अभी कांग्रेस विधायकों का बोलबाला है और भाजपा का पत्ता साफ हो गया था। महंत के बाद कौन वहां से उपचुनाव लड़ेगा और नतीजा क्या होगा, इस पर पार्टी नेता आपसी बातचीत में मौन हैं। उनका कहना है कि महंत को प्रत्याशी बनाने की स्थिति में कई बिंदुओं पर विचार करना होगा। दूसरी ओर विधानसभा चुनाव हार चुके पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव दिल्ली जाने के लिए राज्यसभा की आस लगा सकते हैं। हालांकि आलाकमान से मौका मिलने पर वे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी निभाने की बात कह चुके हैं। ऐसे में सिंहदेव के भी राज्यसभा के प्रति रुख का इंतजार किया जा रहा है। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अभी तक राज्यसभा में कोई रुचि नहीं दिखाई है।
कांग्रेस में अब ये हैं दावेदार
आलाकमान या छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस की ओर से अभी किसी नाम पर विचार नहीं किया गया है और न ही कोई संकेत दिया गया है। इसके विपरीत पार्टी में नए नाम तैरने लगे हैं। इनमें आदिवासी नेताओं की दावेदारी ज्यादा दिख रही है। सबसे बड़ा नाम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का बताया जा रहा है, मगर उन्हें राज्यसभा भेजने से नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव करना पड़ सकता है। दो और आदिवासी दावेदार अमर जीत भगत और मोहन मरकाम माने गए हैं, दोनों विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। ओबीसी और महिला के रूप में रायपुर के ताकतवर नाम किरणमयी नायक का नाम सामने आया है। छत्तीसगढ़ महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी इससे पहले रायपुर नगर निगम की मेयर रह चुकी हैं। इसके अलावा जांजगीर लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव हार चुके शिव डहरिया का नाम दावेदार के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है।