CG ब्रेकिंग न्यूज: राजभवन और राज्य सरकार के बीच जिन 10 सवालों को लेकर विवाद, पढ़ें क्या हैं सवाल और सरकार ने क्या जवाब दिया...

NPG News

Update: 2022-12-28 06:34 GMT

रायपुर। छत्तीसगढ़ के आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। विधानसभा में 2 दिसंबर को आरक्षण के संबंध में जो दो विधेयक पारित हुए थे, उन पर राज्यपाल अनुसुइया उइके ने दस्तखत नहीं किया है। इसे लेकर राजभवन और राज्य सरकार आमने सामने है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के एक धड़े के प्रदर्शन के बाद अब 3 जनवरी को कांग्रेस महारैली करने जा रही है। दरअसल, यह विवाद इसलिए लंबा खिंचता जा रहा है, क्योंकि राज्यपाल उइके ने 10 बिंदुओं पर जानकारी मांगी। सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि यह राज्यपाल के अधिकार में नहीं है। छत्तीसगढ़ के पौने तीन करोड़ लोगों के हितों को ध्यान में रखकर वे जवाब दे रहे हैं। अब सरकार द्वारा जवाब भेजने के बाद सीएम ने फिर आशंका जताई है कि राज्यपाल मीन मेख निकाल रही हैं। पढ़ें, कौन से वे 10 सवाल थे और राज्य सरकार ने क्या जवाब दिया...

1. क्या संशोधन विधेयक पारित करने से पहले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संबंध में मात्रात्मक डाटा कलेक्ट किया गया था?

शासन - अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सीधी भर्ती के पदों के लिये मात्रात्मक डाटा देने की बाध्यता नहीं है। ना ही कोर्ट का ऐसा कोई आदेश है। अन्य पिछड़े वर्ग और ईडब्लूएस के लिये क्वांटिफायबल डाटा आयोग के आंकड़े और रिपोर्ट को आधार बनाया गया है ।

2. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 50% से अधिक आरक्षण विशेष एवं बाध्यकारी परिस्थितियों में ही हो सकता है। उक्त विशेष एवं बाध्यकारी परिस्थितियां कौन सी है?

शासन - विधेयक में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण इसलिए किया गया है, क्योंकि राज्य में इन जातियों की स्थिति शैक्षणिक और सामाजिक स्तर पर बहुत कमजोर है। साथ ही, नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है। क्वांटिफायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में अंत्योदय राशन कार्डों की संख्या 14 लाख से अधिक है, जिसमें 5 लाख 88 हजार से अधिक सिर्फ ओबीसी वर्ग के अंत्योदय कार्ड हैं। इससे पता चलता है कि राज्य में ओबीसी की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है।

3. उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ऐसी क्या विशेष परिस्थितियां उत्पन्न हुईं कि आरक्षण का प्रतिशत 50 से अधिक किया गया। क्या इन विशेष परिस्थितियों के संबंध में क्या कोई डाटा कलेक्ट किया गया है?

शासन - शासन ने सितंबर 2019 में क्वांटिफायबल डाटा आयोग का गठन किया था। उसी की रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी और ईडब्लूएस के डाटा को आधार बनाया गया है ।

4. राज्य के एससी-एसटी वर्ग के लोग किस प्रकार से राज्य में सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए हैं? इस संबंध में डाटा प्रस्तुत करें।

शासन - आरक्षण देने के लिए एससी-एसटी वर्ग के लोगों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े होने के डाटा की कोई जरूरत नहीं है, जबकि ओबीसी और ईडब्सूएस के लिए क्वांटिफायबल डाटा आयोग कि रिपोर्ट को आधार बनाया गया है।

5. क्या सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का स्तर जानने के लिए किसी कमेटी का गठन किया गया था?

शासन - सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा क्वांटिफायबल डाटा आयोग का गठन किया गया है। उक्त रिपोर्ट 21 नवंबर 2022 को प्रस्तुत की गई है।

6. क्वांटिफायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट राज्यपाल के सचिवालय के समक्ष प्रस्तुत करें।

शासन - क्वांटिफायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट शासन को 21 नवंबर 2022 को प्रस्तुत की जा चुकी है।

7. प्रस्तावित संशोधित अधिनियम में विधि एवं विधायी कार्य विभाग का क्या अभिमत है?

शासन - शासन ने विधि और विधायी कार्य विभाग द्वारा मूल विधेयक में परिमार्जन कराकर सभी नियमों का पालन करते हुए विधानसभा सचिवालय को आगामी कार्रवाई हेतु भेजा है।

8. संशोधित विधेयक के शीर्षक में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का कोई उल्लेख नहीं है। क्या शासन को इस वर्ग के लिए अलग से अधिनियम लाना था?

शासन - राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद आरक्षण संशोधन विधेयक 2022, ' छत्तीसगढ़ लोक सेवा ( अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिये आरक्षण ) अधिनियम,1994 ' कहलाएगा। अलग से संशोधन विधेयक लाना कानूनी रूप से ठीक नहीं है।

9. शासन ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत सारणी में कहा था कि सेवाओं में एससी-एसटी वर्ग के लोग कम चयनित हो रहे हैं। उनके पद रिक्त रह जाते हैं। यह सूचित करें कि इस वर्ग के लोग राज्य में क्यों चयनित नहीं हो रहे?

शासन - उक्त सारणी में दिए गए आंकड़े 2012 के पहले के हैं। वर्तमान में निर्धारित आरक्षण प्रतिशत के आधार पर एससी, एसटी वर्ग के लोगों का शासकीय सेवा में चयन किया जा रहा था। आरक्षण न होने से इन वर्गों के चयन में कमी आएगी।

10. क्या उक्त संशोधन विधेयक में प्रशासन की दक्षता का ध्यान रखा गया है। क्या इस संबंध में कोई सर्वेक्षण किया गया है?

शासन - शासकीय सेवकों की सालाना गोपनीय प्रतिवेदन के आधार पर उनकी दक्षता का आंकलन किया जाता है। राज्य की सेवाओं में एसटी, एससी वर्ग के लोगों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। राज्य में पूर्व से संचालित आरक्षण नीति से किसी भी तरह की प्रशासनिक दक्षता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा है।

राज्यपाल अब आगे क्या कर सकती हैं...

1. राज्यपाल सभी बिंदुओं पर सहमत होकर दस्तखत कर देंगी।

2. राज्य सरकार द्वारा भेजी गई जानकारी से असहमति की स्थिति में राज्यपाल विधेयक को लौटा सकती हैं।

3. राज्यपाल विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेज सकती हैं।

4. राज्यपाल अनिश्चितकाल तक विधेयक को अपने पास रख सकती हैं।

आगे क्या...

राज्यपाल यदि दस्तखत कर देंगी तो अदालत में चुनौती दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने 58 प्रतिशत आरक्षण को असंवैधानिक माना है। ऐसे में 76 प्रतिशत आरक्षण को प्रथम दृष्टया असंवैधानिक मानकर हाईकोर्ट इन्हीं बिदुओं पर राज्य सरकार से जवाब तलब कर सकती हैं, जो राज्यपाल ने उठाए हैं।

राज्यपाल यदि विधेयक को फिर से विचार करने के लिए लौटाती हैं तो नए सिरे से विधेयक लाना होगा। इसमें उन बिंदुओं को शामिल करना होगा, जो राज्यपाल ने उठाए होंगे।

राज्यपाल यदि राष्ट्रपति को भेज देती हैं या अपने पास रख लेती हैं, तब भी असमंजस की स्थिति बनी रहेगी, क्योंकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने ही सूचना का अधिकार के तहत दी गई जानकारी में यह स्वीकार किया है कि फिलहाल आरक्षण का कोई रोस्टर लागू नहीं है। ऐसे में भर्तियों पर असर पड़ेगा।

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