Budget 2026 : 9वीं बार बजट पेश कर रही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ! महिला सशक्तिकरण की बनीं मिसाल, बजट 2026-27 में भी महिलाओं के सशक्त होने की उम्मीद

union budget 2026 : बजट 2026-27 महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है. बजट 2026-27 में महिलाओं के लिए क्या खास यहाँ जानिए.

Update: 2026-02-01 06:00 GMT

union budget 2026  : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा केंद्रीय बजट 2026-27  Budget 2026  पेश किया जा रहा है. यह महज एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं रह गई, बल्कि ऐतिहासिक बन गई है। भारतीय राजनीति, जो दशकों तक पुरुष-प्रधान रही, वहां एक महिला का इतने लंबे समय तक सबसे ताकतवर आर्थिक कुर्सी पर बने रहना अपने आप में संदेश है। वह महिला सशक्तिकरण की जीवित मिसाल है। निर्मला सीतारमण महिला सशक्तिकरण की मिसाल इसलिए नहीं हैं क्योंकि वे महिला हैं, बल्कि इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने सबसे मुश्किल जिम्मेदारी को सबसे लंबे समय तक निभाया और निभा रही हैं। आज जब वे 9वीं बार बजट पेश कर रही हैं, यह सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, मानसिकता में बदलाव का सबूत है।


बजट  budget-2026 live updates  में उम्मीद है की महिलाओं को ध्यान में रखकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं हो सकती है. उम्मीद की जा रही है की सरकार का फोकस महिलाओं की आर्थिक सशक्तीकरण, बचत, क्रेडिट सुविधाओं और सुरक्षा पर होगा. पिछले सालों में ही ऐसा ही देखने को मिला है.


बजट में महिलाओं और बालिकाओं के लिए मौजूदा बचत योजनाओं को और मजबूत करने की उम्मीद है. सुकन्या समृद्धि योजना, जो बालिकाओं की शिक्षा और विवाह के लिए बचत को प्रोत्साहित करती है, में ब्याज दरों में वृद्धि या योगदान सीमा बढ़ाने की संभावना है. वर्तमान में इस योजना में सालाना 1.5 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं और यह टैक्स-फ्री रिटर्न प्रदान करती है.


इसके अलावा, union budget 2026  में महिला सम्मान बचत पत्र (Mahila Samman Savings Certificate) जैसी योजनाओं में विस्तार की उम्मीद है, जहां महिलाओं को 7.5% की आकर्षक ब्याज दर मिलती है. बजट में जन धन खातों के माध्यम से इन योजनाओं को और अधिक महिलाओं तक पहुंचाने के लिए नए लिंकेज की घोषणा हो सकती है, जैसे कि कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड और लोन प्रोडक्ट्स. इससे ग्रामीण महिलाओं को आसान बचत विकल्प मिलेंगे, जो उनकी जेब पर सकारात्मक असर डालेगा और लंबी अवधि में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगा.


टैक्स बेनिफिट्स के मामले में बजट महिलाओं को विशेष छूट प्रदान कर सकता है. मौजूदा टैक्स स्लैब में महिलाओं के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं है, लेकिन उम्मीद है कि बजट में महिलाओं के लिए स्पेशल टैक्स डिडक्शन या एग्जंप्शन की घोषणा हो, खासकर बचत योजनाओं और इंश्योरेंस से जुड़े निवेश पर. उदाहरण के लिए, जन धन से जुड़े महिलाओं के लिए इंश्योरेंस प्लान्स में टैक्स छूट बढ़ाई जा सकती है.


महिला उद्यमियों के लिए स्टार्टअप लोन में बड़ी राहत की उम्मीद है. सरकार स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीण उद्यमों के लिए क्रेडिट आवश्यकताओं को सपोर्ट करने पर विचार कर रही है. बजट में जन धन से जुड़े कस्टमाइज्ड लोन प्रोडक्ट्स की घोषणा हो सकती है, जो पहली बार उद्यमी महिलाओं को आसान क्रेडिट प्रदान करेंगे. 



कुल मिलाकर, बजट 2026-27 महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है. ये घोषणाएं न केवल उनकी जेब पर सकारात्मक असर डालेंगी बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि में महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ाएंगी. हालांकि, ये सभी उम्मीदें हैं और वास्तविक बजट में बदलाव संभव हैं. 




 

बजट 2026-27 में महिलाओं के लिए मुख्य आकर्षण (She-Mart व अन्य)


  • महिला-केंद्रित बाज़ार (SHE MART): महिला उद्यमियों और सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स (SHGs) को अपने उत्पादों को बड़े पैमाने पर बेचने के लिए सरकार समर्थित मार्केटप्लेस (She-Mart) पहल पर जोर दिया गया है, ताकि उन्हें सीधे खरीदारों से जोड़ा जा सके।
  • लखपति दीदी योजना का विस्तार: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 'लखपति दीदी' योजना का महत्व बरकरार रखा गया है।

निर्मला सीतारमण एक नजर  


  • निर्मला सीतारमण किसी राजनीतिक विरासत से नहीं आईं। न कोई गॉडफादर, न कोई पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि। उन्होंने मेहनत, वैचारिक स्पष्टता और विषय की गहरी समझ के दम पर अपनी जगह बनाई। 
  • वित्त मंत्रालय से पहले वे भारत की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री बनीं। 2017 में रक्षा मंत्री बनकर उन्होंने उस मंत्रालय की कमान संभाली, जिसे अब तक पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। सेना, रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कठोर माने जाने वाले विभाग में उन्होंने यह तोड़ा कि महिलाएं सिर्फ सॉफ्ट पोर्टफोलियो के लिए होती हैं। 
  • भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार किसी महिला वित्त मंत्री ने इतनी बार बजट पेश किया। यह निरंतरता, भरोसे और प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है।
  • उनके बजट भाषणों में महिला केवल सहायता पाने वाली नहीं दिखती, बल्कि आर्थिक तंत्र की सक्रिय इकाई के रूप में उभरती हैं, चाहे वह मुद्रा योजना हो, स्वयं सहायता समूह हों या महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाएं। यह सोच सशक्तिकरण की असली परिभाषा है।
  • आलोचना, वैश्विक मंदी, महामारी, चुनावी दबाव हर दौर में उन्होंने संयम और ठोस आंकड़ों के साथ फैसले लिए। महिला नेतृत्व को भावनात्मक कहने वालों के लिए उनका कार्यकाल एक करारा जवाब है। कोविड संकट में अर्थव्यवस्था को संभालने वाला बजट पैकेज
  • महामारी के दौरान आत्मनिर्भर भारत पैकेज और राहत योजनाओं के जरिए अर्थव्यवस्था को संभालना आसान नहीं था, उन्होंने यह कर दिखाया।
  • लाल कपड़े की जगह बही-खाते का डिजिटल टैबलेट, सादा पहनावा और बिना दिखावे की राजनीति के जरिए सीतारमण बताती हैं कि सशक्त महिला को साबित करने के लिए शोर की जरूरत नहीं होती। उनकी मौजूदगी ही काफी है।
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