Akhsay Kanti Bam Withdraw Nomination: MP में कांग्रेस को बड़ा झटका, इंदौर से उम्मीदवार अक्षय कांति भाजपा में शामिल हुए, नामांकन लिया वापस
Akhsay Kanti Bam Withdraw Nomination: मध्य प्रदेश की इंदौर सीट पर सूरत जैसा कांड हो सकता है। यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने अपना नामांकन वापस ले लिया है।
Akhsay Kanti Bam Withdraw Nomination: मध्य प्रदेश की इंदौर सीट पर सूरत जैसा कांड हो सकता है। यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। इसके बाद अब यहां भाजपा के सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं रह गई है। नामांकन वापस लेने के बाद अक्षय भाजपा में भी शामिल हो गए। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में मंत्री कैलाश विजवर्गीय ने उनके साथ तस्वीर ट्वीट कर उनका पार्टी में स्वागत किया है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, अक्षय कांति आज सुबह कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपना नामांकन वापस ले लिया। इस दौरान भाजपा विधायक रमेश मेंदोला उनके साथ देखे गए। अक्षय ने 24 अप्रैल को नामांकन दाखिल किया था और आज नामांकन वापस लेने का अंतिम दिन था। अक्षय के नामांकन वापस लेने के बाद विजयवर्गीय ने एक तस्वीर ट्वीट करते हुए उनका भाजपा में स्वागत किया। तस्वीर में अक्षय विजयवर्गीय के साथ एक गाड़ी में बैठे दिख रहे हैं।
इंदौर सीट पर भाजपा ने शंकर लालवानी को मैदान में उतारा है, जो यहां से मौजूदा सांसद हैं। सीट पर उनके और कांग्रेस के अक्षय कांति के बीच मुख्य मुकाबला था, जिनके नामांकन वापस लेने के बाद लालवानी की जीत लगभग तय हो गई है। हालांकि, कांग्रेस यहां से किसी अन्य उम्मीदवार को भी समर्थन दे सकती है। इंदौर सीट पर लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में 13 मई को मतदान होना है।
रिपोर्ट के अनुसार, अक्षय ने जिस दिन इंदौर सीट से नामांकन दाखिल किया था, उसी दिन मध्य प्रदेश पुलिस ने 17 साल पुराने एक केस में उनके खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी थी, जिसमें उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। अक्षय ने अपने शपथ पत्र में इसका जिक्र नहीं किया था, जिसे लेकर भाजपा ने उनका नामांकन रद्द करने की मांग की थी। जिला निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा की यह शिकायत खारिज कर दी थी।
सूरत में क्या हुआ था?
कांग्रेस के 2 प्रत्याशियों के नामांकन रद्द होने और 8 अन्य उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने के बाद गुजरात की सूरत सीट पर भाजपा के प्रत्याशी मुकेश दलाल बिना एक भी वोट पड़े निर्विरोध जीत गए थे। इसके बाद सीट से कांग्रेस के प्रमुख उम्मीदवार निलेश कुम्भानी भाजपा में शामिल हो गए थे, जिससे कयास लगाए गए कि उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर साजिश रची थी और जानबूझकर अपना नामांकन रद्द कराया था।