बड़ी खबर : ऑस्ट्रेलिया के बाद अब भारत में भी बच्चों के सोशल मीडिया पर पाबंदी? राष्ट्रपति मैक्रों ने PM मोदी के सामने रखी बड़ी शर्त!

Social media ban for kids : फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की अपील की है. मैक्रों ने इंडिया एआई समिट में कहा कि बच्चों को इंटरनेट के खतरों से बचाना अब केवल नियम नहीं बल्कि सभ्यता का सवाल है. भारत सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि वह बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया कंपनियों के साथ नए नियमों पर विचार कर रहे है.

Update: 2026-02-19 07:40 GMT

बड़ी खबर: ऑस्ट्रेलिया के बाद अब भारत में भी बच्चों के सोशल मीडिया पर पाबंदी? राष्ट्रपति मैक्रों ने PM मोदी के सामने रखी बड़ी शर्त!

Social media ban for kids India : नई दिल्ली : क्या भारत में भी बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स के दरवाजे बंद होने वाले हैं. यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बहुत बड़ी और अहम मांग कर दी है. दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान मैक्रों ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए भारत से इस मुहिम में साथ आने की अपील की.

मैक्रों की बड़ी मांग: जो असल दुनिया में गलत, वो इंटरनेट पर भी न हो

समिट को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल नियम बनाने का काम नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यता को बचाने का सवाल है. मैक्रों ने पीएम मोदी की तरफ इशारा करते हुए कहा, मुझे पूरा भरोसा है कि भारत भी इस नेक काम में हमारा साथ देगा. अगर भारत बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने के लिए कदम उठाता है, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर होगी.

मुंबई के स्ट्रीट वेंडर का उदाहरण देकर की भारत की तारीफ

मैक्रों ने नमस्ते कहकर अपने भाषण की शुरुआत की. उन्होंने भारत की डिजिटल तरक्की की जमकर तारीफ की. उन्होंने एक किस्सा सुनाया कि कैसे 10 साल पहले मुंबई का एक रेहड़ी-पटरी वाला बैंक खाता तक नहीं खुलवा पाता था, लेकिन आज वही शख्स मोबाइल के जरिए एक बटन दबाकर पैसे ले लेता है. मैक्रों ने कहा कि 140 करोड़ लोगों को डिजिटल पहचान देना और दुनिया का सबसे बड़ा पेमेंट सिस्टम चलाना भारत की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.

भारत सरकार की क्या है तैयारी

मैक्रों की इस अपील के बीच भारत सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि वह इस दिशा में सोच रहे है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में बताया कि सरकार बच्चों की उम्र के हिसाब से सोशल मीडिया पर पाबंदियां लगाने को लेकर अलग-अलग कंपनियों से बातचीत कर रही है.

सरकार की चिंता के पीछे 3 बड़े कारण हैं

साइबर बुलिंग : इंटरनेट पर बच्चों को डराना-धमकाना और परेशान करना.

गलत कंटेंट : छोटी उम्र में बच्चों तक ऐसी चीजें पहुंच जाना जो उनके मानसिक विकास के लिए ठीक नहीं हैं.

लत : पढ़ाई और खेलकूद छोड़कर घंटों मोबाइल में डूबे रहना.

क्या कहता है दुनिया का अनुभव

ऑस्ट्रेलिया पहले ही बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कड़ा कानून बना चुका है. वहीं, स्पेन और ग्रीस जैसे यूरोपीय देश भी फ्रांस के साथ मिलकर इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. भारत में भी अगर यह नियम लागू होता है, तो सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 15 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा बिना माता-पिता की अनुमति या सरकारी गाइडलाइन के ऐप न चला पाए.

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में बच्चों की सुरक्षा के अलावा और भी कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई 

 इस समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने AI for All का विजन साझा करते हुए कहा कि भारत दुनिया में एआई का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक बाजार बनेगा. भारत और फ्रांस ने मिलकर स्वास्थ्य, खेती और शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए एक विशेष साझा रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई. इसके तहत फ्रांस की तकनीक और भारत के विशाल डेटा का उपयोग करके ऐसी मशीनें और सॉफ्टवेयर बनाए जाएंगे, जो गाँवों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने और आम आदमी की भाषा में उसकी समस्याओं को सुलझाने में मदद करेंगे.

समिट का एक दूसरा बड़ा हिस्सा स्टार्टअप्स और सुरक्षा पर केंद्रित रहा. पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने एआई से होने वाले खतरों, जैसे कि डीपफेक और साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने पर जोर दिया. इसके साथ ही, भारत ने घोषणा की कि वह एआई के क्षेत्र में काम करने वाले नए उद्यमियों को 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का सहयोग देगा. इस समिट ने यह साफ कर दिया कि भारत अब केवल एआई का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को एआई के सही और सुरक्षित इस्तेमाल का रास्ता दिखाने वाला ग्लोबल लीडर बनने की राह पर है.

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