लव मैरिज करने वालों को तगड़ा झटका! अब चुपके से नहीं कर पाएंगे शादी! पैरेंट्स के साइन होंगे अनिवार्य?

Gujarat New Marriage Law : गुजरात में अब घर से भागकर या चोरी-छिपे शादी करना मुमकिन नहीं होगा. राज्य सरकार ने मैरिज रजिस्ट्रेशन एक्ट में बड़े बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत शादी के पंजीकरण से पहले माता-पिता को सूचना देना अनिवार्य होगा. नए नियमों के मुताबिक, आवेदन के बाद 30 दिनों का वेटिंग पीरियड रहेगा और अभिभावकों को वॉट्सऐप या मैसेज के जरिए इसकी जानकारी भेजी जाएगी, ताकि सामाजिक पारदर्शिता बनी रहे.

Update: 2026-02-20 11:04 GMT

लव मैरिज करने वालों को तगड़ा झटका! अब चुपके से नहीं कर पाएंगे शादी! पैरेंट्स के साइन होंगे अनिवार्य?

Gujarat Marriage Registration Act : अहमदाबाद : गुजरात में अब प्रेम विवाह या बिना बताए शादी करने वाले जोड़ों के लिए राह आसान नहीं होने वाली है. राज्य सरकार ने गुजरात मैरिज रजिस्ट्रेशन एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है. इन नए नियमों के तहत अब किसी भी शादी के पंजीकरण से पहले दूल्हा-दुल्हन के माता-पिता को आधिकारिक रूप से सूचना देना अनिवार्य कर दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस कदम से सामाजिक ताने-बाने की रक्षा होगी और धोखाधड़ी या छिपकर की जाने वाली शादियों पर लगाम लगेगी.

माता-पिता को जाएगा वॉट्सऐप और मैसेज

गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने इस बड़े बदलाव का खाका पेश करते हुए बताया कि जल्द ही एक सेंट्रलाइज्ड ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा. जैसे ही कोई कपल शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करेगा, सिस्टम खुद-ब-खुद उनके माता-पिता को वॉट्सऐप और एसएमएस के जरिए सूचित कर देगा. नए नियमों के मुताबिक, आवेदन के समय जोड़े को एक औपचारिक सुचना देनी होगी कि उनके माता-पिता को इस विवाह की जानकारी है. साथ ही, मां और पिता दोनों के आधार कार्ड, स्थायी पता और मोबाइल नंबर जमा करना जरूरी होगा.

30 दिनों का वेटिंग पीरियड और सख्त जांच

प्रस्तावित बदलावों के अनुसार, आवेदन करने और सर्टिफिकेट जारी होने के बीच 30 दिनों का अनिवार्य वेटिंग पीरियड रखा जाएगा. इस एक महीने के दौरान, असिस्टेंट रजिस्ट्रार सभी दस्तावेजों की जांच करेंगे. जमा किए गए विवरणों के आधार पर 10 कार्य दिवसों के भीतर सरकार इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से माता-पिता को सूचना भेजेगी. इसके अलावा, शादी की तस्वीरें और गवाहों की पूरी जानकारी सरकारी पोर्टल पर अपलोड की जाएगी ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे.

क्यों पड़ी इस सख्त कानून की जरूरत

सरकार का कहना है कि कई सामाजिक संगठनों और समुदायों ने इस संबंध में फीडबैक दिया था कि माता-पिता की सहमति के बिना होने वाली शादियों से परिवार टूट रहे हैं और विवाद बढ़ रहे हैं. इस सलाह-मशविरे वाले तरीके का मकसद माता-पिता की भावनाओं और अधिकारों की रक्षा करना है. सरकार ने इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले आम जनता और विशेषज्ञों से राय व आपत्तियां मांगने के लिए 30 दिनों का समय दिया है. यदि यह नियम लागू होता है, तो गुजरात देश का ऐसा पहला राज्य बन सकता है जहाँ बालिग होने के बावजूद माता-पिता की सूचना के बिना शादी करना कानूनी रूप से कठिन हो जाएगा.

पहले क्या थे नियम 

गुजरात में मैरिज रजिस्ट्रेशन के पुराने नियमों में इतनी सख्ती नहीं थी और प्रक्रिया काफी सरल हुआ करती थी. पहले के नियमों के अनुसार, यदि लड़का और लड़की बालिग हैं, तो वो अपनी मर्जी से मंदिर या किसी भी स्थान पर शादी करके सीधे रजिस्ट्रार ऑफिस में पंजीकरण करा सकते थे. उस समय माता-पिता को सूचना देना या उनकी जानकारी साझा करना अनिवार्य नहीं था. केवल दो गवाहों और शादी के प्रमाण के आधार पर तुरंत या बहुत कम समय में मैरिज सर्टिफिकेट मिल जाता था, जिससे कपल के लिए अपनी शादी को कानूनी मान्यता दिलाना आसान था.

पुरानी व्यवस्था में गोपनीयता का पूरा अधिकार कपल के पास होता था. आवेदन करने के बाद किसी भी तरह के वेटिंग पीरियड या माता-पिता को मैसेज भेजने का कोई प्रावधान नहीं था. इसका फायदा उठाकर कई जोड़े घरवालों की मर्जी के खिलाफ जाकर चुपके से शादी कर लेते थे और परिवारों को इसकी भनक तब लगती थी जब सर्टिफिकेट बन चुका होता था. पहले की प्रक्रिया पूरी तरह ऑफलाइन कागजी कार्रवाई पर ज्यादा निर्भर थी, जिसमें सेंट्रलाइज्ड पोर्टल या डिजिटल अलर्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी, जो अब नए नियमों के जरिए लागू की जा रही है.

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