सावधान! ऑनलाइन बांसुरी मंगाना पड़ा भारी, रिटायर्ड शिक्षक के खाते से उड़े 2.5 लाख, आप तो नहीं कर रहे ये गलती?
मध्यप्रदेश के नौरोजाबाद में एक रिटायर्ड शिक्षक ऑनलाइन पार्सल ट्रैक करने के चक्कर में साइबर ठगी का शिकार हो गए.
मध्यप्रदेश से ऑनलाइन पार्सल ट्रैक करने के चक्कर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है की आपके पैरों तले जमीं ही खिसक जाएगी. दरअसल मामला ऐसा है की मध्यप्रदेश के नौरोजाबाद में संगीत प्रेमी एक रिटायर्ड शिक्षक ऑनलाइन पार्सल ट्रैक करने के चक्कर में साइबर ठगी का शिकार हो गए। साइबर ठग ने अपने बातचीत में उलझाकर उनके खाते से ढाई लाख रुपये उड़ा लिए।
कैसे बिछाया ठगी का जाल?
मालूम हो की नौरोजाबाद में एक रिटायर्ड शिक्षक राजाराम चौहान ने चेन्नई की एक कंपनी से चार बांसुरियां मंगाई थीं। ऑर्डर के बाद व्हाट्सएप पर रसीद आई, साथ में कूरियर का ट्रैकिंग नंबर भी। कुछ दिन बाद जब उन्होंने पार्सल की स्थिति देखने के लिए लिंक खोला, तो वहां एक मोबाइल नंबर नजर आया। पार्सल की जानकारी लेने के लिए उन्होंने उस नंबर पर कॉल कर दिया। फोन उठाने वाले ने खुद को कूरियर से जुड़ा बताया और बड़ी सहजता से कहा कि पार्सल में दर्ज मोबाइल नंबर गलत है। नंबर ठीक कर देते हैं, बस एक छोटी सी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
ठग ने पहले नया मोबाइल नंबर लिया गया। फिर एक लिंक भेजा गया और कहा कि उस पर क्लिक कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी है। बात इतनी सामान्य अंदाज में कही गई कि शक की कोई गुंजाइश नहीं बची। इसके बाद आरोपी ने एटीएम कार्ड की 16 अंकों की संख्या मांगी। फिर कार्ड के पीछे लिखा सीवीवी नंबर भी पूछ लिया। भरोसे में आए शिक्षक ने सारी जानकारी दे दी। उधर से आश्वासन मिला अब सब ठीक है, पार्सल समय पर मिल जाएगा। पार्सल सचमुच पोस्ट ऑफिस पहुंचा भी। शिक्षक ने राहत की सांस ली कि प्रक्रिया पूरी हो गई। लेकिन असली खेल तो पीछे चल रहा था।
कुछ समय बाद बैंक से फोन आया। बताया गया कि उनके खाते से ढाई लाख रुपये निकल चुके हैं। यह सुनते ही पैरों तले जमीन खिसक गई। तुरंत एटीएम ब्लॉक कराया गया लेकिन तब तक रकम साफ हो चुकी थी। परिवार ने फौरन साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। मामला थाना नौरोजाबाद और जिला साइबर सेल तक पहुंचा। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
फर्जी लिंक के जरिए की गई ठगी
थाना प्रभारी बालेंद्र शर्मा के अनुसार यह फर्जी लिंक के जरिए की गई ठगी है। आरोपी ने भरोसा जीतकर बैंक और कार्ड की गोपनीय जानकारी हासिल की। उन्होंने लोगों से अपील की कि कोई भी अनजान लिंक न खोलें और एटीएम, सीवीवी या ओटीपी जैसी जानकारी किसी को न दें। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि हर उस नागरिक के लिए चेतावनी है, जो ऑनलाइन सुविधा का इस्तेमाल करता है।