मुआवजे का आधा पैसा मुझे चाहिए! सीधी में घूसखोर अधिकारी भूपेंद्र पांडे रंगे हाथ गिरफ्तार, लोकायुक्त ने दबोचा तो सोफे पर हाथ बांधकर 'साहब' दिखाने लगे हेकड़ी!
सीधी में बड़ा लोकायुक्त ट्रैप! भू-अर्जन अधिकारी भूपेन्द्र पांडेय 1 लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार। 27 लाख के मुआवजे में मांग रहा था 50% हिस्सा।
मध्यप्रदेश के सीधी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त रीवा की टीम ने गुरुवार को सहायक परियोजना भू-अर्जन अधिकारी भूपेन्द्र पांडेय को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। ट्रैप कार्रवाई भू-अर्जन शाखा कार्यालय में की गई, जिससे पूरे विभाग में हड़कंप मच गया।
मुआवजे की 50% राशि रिश्वत में मांगने का आरोप
जानकारी के अनुसार, सदला निवासी शिकायतकर्ता (सरोज/शिव बहोर तिवारी) ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में उनकी जमीन अधिग्रहित हुई है। भूमि अधिग्रहण के एवज में उन्हें करीब 27 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत हुआ था।
आरोप है कि मुआवजा राशि जारी करने के बदले आरोपी अधिकारी ने कुल राशि का 50 प्रतिशत, यानी लगभग 13 से 13.50 लाख रुपये रिश्वत के रूप में मांगे। शिकायत में यह भी बताया गया कि आरोपी पहले ही एक लाख रुपये एडवांस के तौर पर ले चुका था और दूसरी किश्त के रूप में एक लाख रुपये की मांग कर रहा था।
शिकायत सत्यापन के बाद बिछाया गया जाल
शिकायत की पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप की कार्रवाई की। जैसे ही आरोपी ने तयशुदा रकम स्वीकार की, टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। कार्रवाई के दौरान आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं।
लोकायुक्त थाना प्रभारी एस.आर. मरावी ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत प्रमाणित होने के बाद ही ट्रैप की योजना बनाई गई थी। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
सर्किट हाउस में पूछताछ, आरोपी हिरासत में
गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर सर्किट हाउस में आगे की पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुआवजा निर्धारण और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
पहले भी EOW की कार्रवाई का सामना कर चुका है आरोपी
गौरतलब है कि आरोपी भूपेन्द्र पांडेय के खिलाफ पूर्व में भी कार्रवाई हो चुकी है। पिछले वर्ष आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनके निवास पर छापा मारा था। उस दौरान संदिग्ध संपत्ति मिलने पर प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके बावजूद रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आती रहीं।
मूल पद शिक्षक, प्रतिनियुक्ति पर भू-अर्जन अधिकारी
भूपेन्द्र पांडेय मूल रूप से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अमरबांहा में शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं। प्रतिनियुक्ति पर उन्हें जिला पंचायत में परियोजना अधिकारी बनाया गया और साथ ही भू-अर्जन अधिकारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। आरोप है कि मुआवजा प्रकरणों में वे सीधे भारी-भरकम हिस्सेदारी की मांग करते थे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश
इस कार्रवाई को प्रशासनिक तंत्र में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। लोकायुक्त की इस ट्रैप कार्रवाई ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि शिकायत प्रमाणित होने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े अन्य खुलासे भी संभव हैं।