अपहृत के साथ अच्छा बर्ताव करता है किडनैपर तो नहीं दी जा सकती उम्रकैद: सुप्रीम कोर्ट
नईदिल्ली 1 जुलाई 2021. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि अपहृत व्यक्ति के साथ अपहरणकर्ता ने मारपीट नहीं की, उसे जान से मारने की धमकी नहीं दी और उसके साथ अच्छा बर्ताव किया तो अपहरण करने वाले व्यक्ति को आईपीसी 364ए के तहत आजीवन कारावास की सजा नहीं दी जा सकती है। जस्टिस अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा अपहरण के एक मामले में आरोपी एक ऑटो चालक को दोषी ठहराने का फैसला रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। ऑटो चालक ने एक नाबालिग का अपहरण किया था और उसके पिता से दो लाख रुपए की फिरौती मांगी थी।
ऑटो ड्राइवर पर एक नाबालिग को किडनैप कर उसके पिता से 2 लाख रुपये की फिरौती मांगने का आरोप था। अदालत ने कहा कि अपहरण के किसी केस में आरोपी को दोषी करार देने के लिए तीन चीजें जरूर साबित होनी चाहिए। इन तीन चीजों का ब्योरा देते हुए कोर्ट ने कहा- ये हैं किसी व्यक्ति को अगवा करना या उसे जबरदस्ती अपनी कैद में रखना, उसे मौत की धमकी देना या शारीरिक चोट पहुंचाना। इसके अलावा फिरौती लेने के दौरान या किसी अन्य घटना में पीड़ित की मौत हो जाना। कोर्ट ने कहा कि इनमें से पहली शर्त के साथ ही अन्य दो भी पूरी होनी चाहिए।
बच्चे को घर छोड़ने के नाम पर कर लिया था किडनैप
अदालत ने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर सेक्शन 364A के तहत किसी आरोपी को दोषी नहीं करार दिया जा सकता। अदालत की ओर से तेलंगाना के शेख अहमद की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई के दौरान यह बात कही गई। शेख अहमद ने तेलंगाना हाई कोर्ट की ओर से जारी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने सेक्शन 364 A के तहत मिली उम्र कैद की सजा पर रोक से इनकार कर दिया था। ऑटो चालक अहमद ने एक छठी क्लास में पढ़ने वाले बच्चे को उसके घर छोड़ने के नाम पर किडनैप कर लिया था।
अगवा किए गए बच्चे को पुलिस ने उस वक्त छुड़ा लिया था, जब उसके पिता फिरौती की रकम देने के लिए पहुंचे थे। यह वारदात 2011 में हुई थी और तब बच्चे की उम्र 13 साल थी। बच्चे के पिता ने ओअर कोर्ट में बताया था कि अहमद ने कभी उनके बच्चे को मारने या फिर नुकसान पहुंचाने की धमकी नहीं दी थी।