झारखंड अबुआ दिशोम बजट 2026 : मंईयां सम्मान योजना पर फोकस, महिलाओं और बच्चों के लिए बड़े ऐलान
Jharkhand Budget 2026 : झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने आज मंगलवार को अपना अबुआ दिशोम बजट पेश कर राज्य की आधी आबादी और भविष्य की पीढ़ी के लिए पिटारा खोल दिया है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा पेश किए गए 1.58 लाख करोड़ रुपये के इस बजट में महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने और बच्चों के लिए अलग से बाल बजट लाने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है. केंद्र से आर्थिक सहयोग न मिलने की शिकायतों के बीच, यह बजट पूरी तरह से गांव, गरीब और महिला सशक्तिकरण के इर्द-गिर्द बुना गया है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देंगे.
झारखंड का अबुआ दिशोम बजट : मंईयां सम्मान योजना और महिलाओं-बच्चों के लिए खुला खजाना...
Jharkhand Budget 2026 : रांची : झारखंड विधानसभा में आज मंगलवार को हेमंत सोरेन सरकार ने अपना वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर दिया. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 1.58 लाख करोड़ रुपये का यह अबुआ दिशोम बजट सदन के पटल पर रखा. इस बजट की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसमें महिलाओं, बच्चों और जेंडर समानता पर पूरा फोकस रखा गया है. सरकार ने इसे सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का रोडमैप बताया है.
मंईयां सम्मान और महिला किसानों को सौगात
बजट में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए झारखंड मंईयां सम्मान योजना के तहत भारी-भरकम 14 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि का प्रावधान किया गया है. इसके जरिए राज्य की पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की सम्मान राशि सीधे उनके खाते में भेजी जाएगी. वहीं, खेती-किसानी में जुटी महिलाओं के लिए महिला किसान खुशहाली योजना शुरू की गई है. इसके जरिए महिला किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक सिखाई जाएगी और उनके उत्पादों को ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार से जोड़ा जाएगा.
बच्चों के लिए अलग बाल बजट
झारखंड सरकार ने आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने के लिए 10,793 करोड़ रुपये का अलग से बाल बजट पेश किया है. इसमें बच्चों की पढ़ाई, पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया गया है. कुपोषण को दूर करने के लिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पूरक आहार हेतु करोड़ों रुपये की व्यवस्था की गई है. शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाते हुए धनबाद, पलामू, लातेहार और गढ़वा जैसे जिलों में नए बालिका आवासीय विद्यालय और छात्रावास बनाने का ऐलान किया गया है.
आंगनबाड़ी और जेंडर समानता पर जोर
बजट में आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहायिकाओं और पोषण सखियों के मानदेय और सुविधाओं के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. साथ ही, जेंडर बजट के लिए 34,211 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो न केवल महिलाओं बल्कि थर्ड जेंडर समुदाय को भी समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें रोजगार के अवसर देने में मदद करेगा.
केंद्र पर बरसे वित्त मंत्री
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड के साथ सहयोग नहीं कर रही है और राज्य के हक के करीब 11 हजार करोड़ रुपये की अनुदान राशि अब तक नहीं मिली है. पैसों की तंगी होने के बाद भी उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य की तरक्की की रफ़्तार को रुकने नहीं दिया जाएगा.
क्या हैं अबुआ दिशोम बजट का मतलब
अबुआ दिशोम बजट का सीधा सा मतलब है हमारा अपना राज्य और हमारी अपनी सरकार का बजट. झारखंड की स्थानीय भाषा में अबुआ का अर्थ हमारा और दिशोम का अर्थ देश या राज्य होता है. इस नाम के जरिए हेमंत सोरेन सरकार यह संदेश देना चाहती है कि यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि झारखंड की जल, जंगल और जमीन से जुड़े आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसमें भगवान बिरसा मुंडा के उस सपने की झलक दिखती है, जिसमें उन्होंने अपने राज की बात कही थी.
इस बजट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे तैयार करने के लिए सरकार ने सीधे जनता से सलाह ली थी. इसके लिए एक खास पोर्टल और ऐप बनाया गया ताकि गांव-गांव के किसान, छात्र और महिलाएं बता सकें कि उन्हें सरकार से क्या उम्मीदें हैं. यही वजह है कि इसमें मंईयां सम्मान और अबुआ आवास जैसी योजनाओं पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है. कुल मिलाकर, यह बजट राज्य की अपनी संस्कृति और पहचान को सम्मान देते हुए हर गरीब और आदिवासी परिवार तक हक पहुंचाने की एक बड़ी कोशिश है.