Bus ya car mein baithte Hi ultiyan kyon hoti hai: क्या आपको भी बस या कार में बैठते ही होती है उल्टियां; जानिए इसके पीछे का कारण, कहीं यह कोई बड़ी समस्या तो नहीं!

Bus ya car mein baithte Hi ultiyan kyon hoti hai: जब भी हम किसी लंबी यात्रा के लिए निकलते हैं तो यह एक चीज हमारी पूरी यात्रा को खराब कर देता है। वह है मोशन सिकनेस, यह एक ऐसी शारीरिक प्रक्रिया है जिसमें सिर दर्द, मुंह में पानी भरना और उसके बाद सीधे उल्टियां होने लगते हैं।

Update: 2026-01-11 10:07 GMT

Bus ya car mein baithte Hi ultiyan kyon hoti hai: जब भी हम किसी लंबी यात्रा के लिए निकलते हैं तो यह एक चीज हमारी पूरी यात्रा को खराब कर देता है। वह है मोशन सिकनेस, यह एक ऐसी शारीरिक प्रक्रिया है जिसमें सिर दर्द, मुंह में पानी भरना और उसके बाद सीधे उल्टियां होने लगते हैं। यह प्रक्रिया तुरंत ही हो जाती है जिस वजह से आसपास के लोगों को भी इससे दिक्कतें होती है। कई लोगों के मन में यह होता है कि वे जब भी कार या बस में बैठते हैं, तो उन्हें उल्टियां आना एकदम तय है तो ऐसे में उन्हें लगता है कि वे किसी बीमारी का शिकार है। इस लेख में आज हम जानेंगे कि आखिर गाड़ी में बैठते ही ऐसा होता क्यों है?

गाड़ी में बैठते ही क्यों शुरू हो जाती है उल्टियां

वाहनों में बैठते ही उल्टियां और चक्कर आने जैसी चीज होने लगते हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में मोशन सिकनेस या काइनेटोसिस कहते हैं। यह कोई बहुत बड़ी बीमारी नहीं है यह एक सिर्फ शारीरिक प्रतिक्रिया है और यह समस्या तब होती है जब हमारा दिमाग किसी भ्रम में पड़ जाता है जिससे कि उसे आंख, कान और अन्य मांसपेशियों द्वारा अलग-अलग संकेत प्राप्त होने लगते हैं। सभी अंगों का तालमेल ठीक से नहीं बैठ पाता। परिणाम स्वरुप हमारा दिमाग में सिग्नल को प्रोसेस नहीं कर पाने की वजह से उल्टियां और चक्कर आने लगते हैं। यह अधिकतर तभी होता है जब आप कार, बस, हवाई या ट्रेन में सफर करते हैं।

किन लोगों को अधिक होती है मोशन सिकनेस

मोशन सिकनेस का प्रभाव छोटे बच्चों में अधिक दिखाई देता है जो 2–5 साल के बीच होते हैं। इनमें वेस्टिबुलर सिस्टम यानी संतुलन प्रणाली अभी पूरी तरह से तैयार नहीं होती है। लेकिन 2 साल से कम के बच्चों की तंत्रिका तंत्र इतना विकसित नहीं होता है कि दिमाग के इस भ्रम को समझ सके, इसलिए इनमें मोशन सिकनेस कम दिखाई देते हैं। साथ ही महिलाओं और कुछ पुरुषों में भी इसकी समस्या बनी होती है। महिलाओं में गर्भावस्था और पीरियड्स के दौरान जब हार्मोनल बदलाव होते हैं तो यह समस्या और भी बढ़ जाती है। चिंता और तनाव से जूझ रहे लोगों में भी इसके असर देखने को मिलते हैं।

मोशन सिकनेस के लक्षण

  • सबसे पहला लक्षण है पेट के साथ पूरे शरीर में अजीब सी बेचैनी महसूस होना।
  • धीरे-धीरे यह बेचैनी बढ़ने लगती है और फिर मुंह में पानी भरने लगता है, इसके तुरंत बाद उल्टियां ही हो जाती है।
  • शरीर थोड़ा ठंडा और पसीना आने लगता है साथ ही चक्कर के साथ भारीपन भी महसूस होती है।
  • किसी भी चीज में मन नहीं लगता और चिड़चिड़ापन आने लगता है।

कब होती है मोशन सिकनेस

  • जब भी आप गाड़ी में बैठे होते हैं और गाड़ी पहाड़ी रास्तों पर या फिर सामान्य रास्तों पर बार-बार मुड़ती है, तो यह समस्या हो सकती है।
  • जब भी कोई व्यक्ति गाड़ी के अंदर किताबें पढ़ता है या फोन चलाता है तो हमारे शरीर के अंग दिमाग को अलग-अलग संकेत भेजने लगते है। इस वजह से भी मोशन सिकनेस हो सकती है।
  • पीछे की सीट पर बैठने वाले व्यक्तियों को यह समस्या अधिक हो सकती है क्योंकि वहां गति का एहसास ज्यादा होता है और हवाएं भी ढंग से नहीं पहुंच पाती।
  • बहुत ज्यादा खाकर या खाली पेट रह कर यात्रा करने से बेचैनी और चक्कर जैसी चीजें लग सकती हैं।
  • गाड़ी के अंदर यदि किसी प्रकार की दुर्गंध जैसे सिगरेट, पेट्रोल या किसी मरे जानवर की बदबू आती है तो पर भी मोशन सिकनेस की संभावना है।

मोशन सिकनेस से कैसे बचे

  • जब भी आप वाहन में बैठे तो पीछे की तरफ न बैठे।
  • यदि आप कार, बस या ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो खिड़की वाली सीट सबसे अच्छी रहेगी जहां पर्याप्त हवा आती रहती है।
  • मोशन सिकनेस में आंखों और कान का बहुत बड़ा रोल रहता है। इसलिए कोशिश करें कि गाड़ी में बैठने के बाद फोन का इस्तेमाल या किताबें पढने जैसी कोई चीजे कम ही करें।
  • गाड़ी में ऐसा स्थान चुने जहां ठंडी हवाएं पर्याप्त आती हो। यह ठंडी हवाएं मोशन सिकनेस को कम करती हैं।
  • जब भी आपको इसके लक्षण महसूस हो तो हल्के व तुरंत पचने वाले कोई स्नैक्स खा सकते है।
  • शरीर में चक्कर आने और जी मचलने का अनुभव होने पर गहरी सांस लेना लाभदायक रहेगा।
  • अगर आपकी मोशन सिकनेस की समस्या कुछ ज्यादा ही बनी हुई है तो इसके लिए आपको चिकित्सकीय इलाज लेना जरूरी है।
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