Ghar se Jude Vastu Shastra Ke Niyam: घर से जुड़ी इन वास्तु नियमों का पालन करें, वरना बढ़ सकता है तनाव और झगड़ा

Vastu Shastra Ke Niyam :वास्तु के नियमों का ध्यान नहीं रखा जाता है तो उस घर में रहने वालों को कठिनाइयों से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में हम आपको यहां उत्तर दिशा से संबंधित वास्तु नियमों की सटीक जानकारी उपलब्ध कराते हैं।

Update: 2024-05-01 16:00 GMT

Vastu Shastra Ke Niyam :वास्तु शास्त्र के मुताबिक सभी दिशाओं के स्वामी अलग-अलग हैं। उत्तर दिशा के स्वामी कुबेर माने जाते हैं, जिन्हें धन का देवता भी कहा जाता है। यही कारण है कि अधिकांश लोग उत्तरमुखी घर बनाने की ख्वाहिश रखते हैं। अगर घर की उत्तर दिशा में किसी प्रकार का वास्तु दोष नहीं है तो धन-दौलत में लगातार इजाफा होता है। वहीं अगर उत्तर दिशा से संबंधित वास्तु के नियमों का ध्यान नहीं रखा जाता है तो उस घर में रहने वालों को कठिनाइयों से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में हम आपको यहां उत्तर दिशा से संबंधित वास्तु नियमों की सटीक जानकारी उपलब्ध कराते हैं।

ऐसे घर में तनाव रहता है

वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तरमुखी जमीन में पश्चिम दिशा में खाली जगह नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि ऐसे मकान में रहने वाले पुरुषों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तरमुखी घर का मुख्य दरवाजा पूरब की बजाय पश्चिम दिशा की ओर है तो घर के लोग अधिक समय तक स्थिर नहीं रह पाते। ऐसे घर के मालिक को धन कमाने के लिए अधिकांश समय बाहर ही रहना पड़ता है।

ऐसे घर में होती है चोरी

उत्तरमुखी घर में सैप्टिक टैंक और पानी का निकास दक्षिण दिशा में रखना वास्तु शास्त्र के अनुकूल नहीं होता है। इसकी वजह घर की महिलाओं को कठिनाइयों से जूझना पड़ सकता है। वास्तु शास्त्र के उत्तर-पश्चिम दिशा में मुख्यद्वार के पास भूमिगत पानी की टंकी या बोरिंग वास्तु दोष उत्पन्न करता है। ऐसे घर में रहने वाली महिलाओं का मन अधिक चंचल रहता है। वे घर में कम ठहरती हैं।. साथ ही ऐसे घरों में चोरी की संभावना भी बढ़ जाती है।

उत्तरमुखी घर से जुड़ी और भी खास बातें

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की उत्तर दिशा में पूजा घर या गेस्ट रूम रखना शुभ है। साथ ही घर में सुख-शांति के लिए उत्तर दिशा में रसोईघर बनवाना चाहिए। इसके अलावा उत्तर दिशा घर के मध्य भाग से नीचा होना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से घर में सुख-शांति रहती है।.भूमिगत वाटर टैंक पूर्व-उत्तर में बनवाना चाहिए. इससे घर में रहने वालों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।. इसके अलावा उत्तर दिशा में बाथरूम या टॉयलेट नहीं बनवाना चाहिए।

घर में उत्तर दिशा की दीवार न तो टूटी हुई होनी चाहिए और न ही उसमें दरार होनी चाहिए, क्योंकि इस वजह से परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव रहने की संभावना बढ़ती है और उनके रिश्तों में दरार पैदा हो सकती है।

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