Maa Mahamaya Mandir in Ratanpur: राजसी श्रृंगार: देश की पहली शक्तिपीठ जहां मां का होता है राजसी श्रृंगार, जानिये किस मायने में खास है इस मंदिर में नवरात्रि का अनुष्ठान...

Maa Mahamaya Mandir in Ratanpur: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में रतनपुर में 1042 में निर्मित मां महामाया मंदिर देश की 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर कई मायनों में खास नहीं है बल्कि नवरात्रि का अनुष्ठान भी अलग तरीके से होता है। लगता है, चार धाम आपके जरिये से हो पाएगा।

Update: 2024-04-17 08:51 GMT

Maa Mahamaya Mandir

Maa Mahamaya Mandir in Ratanpur: रतनपुर/ बिलासपुर। आज चैत्र नवरात्रि का नौंवा याने इस अनुष्ठान का आखिरी दिन है। रतनपुर स्थित मां महामाया शक्ति पीठ में आज मां का राजसी श्रृंगार किया गया। राजसी श्रृंगार बड़ा अलौकिक होता है। कल महाष्टमी के हवन के बाद मां को करीब पांच किलो सोने के आकर्षक डिजाइन वाले आभूषणों से सजाया जाता है। मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन आशीष सिंह ठाकुर ने एनपीजी न्यूज को बताया कि मां महामाया को सोने से हार, कुंडल, नथनी, मुकुट, छत्र सहित कई आभूषणों से सजाया जाता है। उन्होंने कहा कि आज का राजसी श्रृंगार अद्भूत होता है।


देश में पहला

मां महामाया मंदिर रतनपुर देश की पहली शक्तिपीठ, जहां नवरात्रि के नौंवे दिन मां का राजसी श्रृंगार किया जाता है। जिस तरह किसी पूजा के आखिरी याने समापन के रोज महिलाएं विशेष तरह के वस्त्र पहनती हैं और श्रृंगार किया जाता है, उसी तरह का रतनपुर के मां महामाया मंदिर में भी होता है। आभूषण चूकि काफी कीमती हैं, इसलिए उसे बैंक के लॉकर में रखा जाता है। नवरात्रि के नवमी से एक दिन पहने उसे लॉकर से सुरक्ष़्ा के बीच मंदिर लाया जाता है। नवमी के दिन मंदिर में विशेष सुरक्षा रहती है। हथियारबंद जवान मंदिर परिसर में चौकस रहते हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारी बताते हैं कि देश के किसी और माता के मंदिर में राजसी श्रृंगार उन्होंने नहीं सुना है।


रतनपुर मंदिर में अनूठा अनुष्ठान

रतनपुर के मां महामाया मंदिर में नवरात्रि में अनूठा अनुष्ठान किया जाता है। ज्ञातव्य है सभी मां के मंदिरों में नवरात्रि में नौ रुपों की पूजा होती है। पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रम्हाचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघटा, चौथे दिन कुष्मांडा, पांचवे दिन स्कंध माता, छठवे दिन कात्यायिनी, सातवे दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौंवे दिन सिद्धिदात्री। महामाया मंदिर के पं0 संतोष शर्मा ने बताया कि रतनपुर मंदिर में कई अलग तरह से पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। रतनपुर के महामाया मंदिर में पहले मां को जो पहले दिन वस्त्र पहनाया जाता है, और श्रृंगार होता है, वह फिर अनुष्ठान के पूरे होते यानी आठवें दिन तक नहीं बदलता। मान्यता यह है कि चूकि कोई भी अनुष्ठान में आदमी एक बार बैठ जाता है, तो उसे बाधित नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए आठवें दिन हवन के अगले दिन नवमी को मां का वस्त्र और श्रृंगार चेंज किया जाता है। इस दिन मां का राजसी श्रृंगार किया जाता है।


56 व्यंजनों का भोग

संतोष शर्मा ने बताया कि अनुष्ठान के आठ दिन सुबह और दोपहर मां को ड्राई फूट्स के भोग लगाए जाते हैं और शाम को सिंघारा आटा का हलुआ इत्यादि। याने पूरी तरह उपवास सिस्टम का पालन किया जाता है। फिर जिस तरह उपवास तोड़ने के बाद भांति-भांति के व्यंजन घर में बनाए जाते हैं, उसी तरह नवमी को माता को 56 व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। इसमें विभिन्न तरह के मिष्ठानों के साथ पुरी, कचौड़ी, कई तरह की सब्जियां, रायता आदि शामिल होते हैं। माता का राजसी श्रृंगार के बाद आज उन्हें 56 व्यंजनों का भोग लगाए गए।

साल में 3 बार राजसी श्रृंगार

मां महामाया का साल में तीन बार राजसी श्रृंगार किया जाता है। दोनों नवरात्रि और दिवाली में। पिछले 100 साल में सिर्फ एक बार पिछले साल साल में तीन बार मां का राजसी श्रृंगार किया गया, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रतनपुर पहुंची थी। बिलासपुर स्थित गुरू घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में चीफ गेस्ट बनकर आईं राष्ट्रपति ने रतनपुर में मां का दर्शन करने की इच्छा जताई थीं। इसके बाद रतनपुर उनके कार्यक्रम में जुड़ा। जाहिर है, देश की शक्तिशाली महिला साक्ष़्ात शक्ति का दर्शन करने जाएंगी तो उनका आवभगत उसी के अनुरूप किया जाएगा। राष्ट्रपति के विजिट के दिन मां का राजसी श्रुंगार किया गया था।  

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