CG बोर्ड बनाम CBSE की पढ़ाई: निजी स्कूलों के फर्जीवाड़ा का मामला पहुंचा हाई कोर्ट, शिक्षा सचिव से शपथ पत्र के साथ मांगा जवाब

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ में लंबे समय से चल रहे प्राइवेट स्कूल प्रबंधन का फर्जीवाड़ा अब सामने आ गया है। सीजी बोर्ड से मान्यता लेकर सीबीएसई की पढ़ाई कराने और पालकों से मोटी फीस वसूलने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ पालकों ने एकजूट होकर कलेक्टर बंगला का घेराव भी कर दिया था।

Update: 2026-03-30 05:35 GMT

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से चल रहे प्राइवेट स्कूल प्रबंधन का फर्जीवाड़ा अब सामने आ गया है। सीजी बोर्ड से मान्यता लेकर सीबीएसई की पढ़ाई कराने और पालकों से मोटी फीस वसूलने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ पालकों ने एकजूट होकर कलेक्टर बंगला का घेराव भी कर दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने नारायणा टेक्नो व एक अन्य निजी स्कूल की मनमानी की जानकारी दी,तब चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने स्वत: संज्ञान लेते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। बता दें आरटीई में गड़बड़ी को लेकर होई कोर्ट में एक जनहित याचिका और एक हस्तक्षेप याचिका की एकसाथ सुनवाई चल रही है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित संचालित नारायणा टेक्नो और एक अन्य निजी स्कूल में CBSE कोर्स की पढ़ाई कराने के बाद स्टूडेंट्स को सीजी बोर्ड का एग्जाम दिलाया गया। पैरेंट्स ने सीबीएसई बोर्ड की पढ़ाई कराने वाले स्कूल प्रबंधन द्वारा सीजी बोर्ड से संबंधित पांचवीं व आठवीं की परीक्षा कराने को लेकर विराेध दर्ज कराते हुए जनहित याचिका दायर की है। पैरेंट्स का कहना है, एडमिशन के समय दोनों स्कूल प्रबंधन ने सीबीएसई मान्यता के आधार पर मोटी फीस वसूल कर एडमिशन दिया। सालभर बच्चों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों से पढ़ाई कराई। बच्चों ने सीबीएसई पैटर्न से पांचवीं व आठवीं की परीक्षा भी दिलाई। इसके बाद दोनों स्कूल प्रबंधन ने सीजी बोर्ड की परीक्षा भी बच्चों से दिलवा दी है। याचिका के अनुसार स्कूल प्रबंधन ने बच्चों और हमारे साथ सीधेतौर पर धोखाधड़ी की है। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव काे नोटिस जारी शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। पीआईएल की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 8 अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

 नाराज पैरेंट्स ने घेरा था कलेक्टर बंगला

प्राइवेट प्रबंधन का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पैरेंट्स ने पहले स्कूलों में जमकर हंगामा मचाया था। इसके बाद बड़ी संख्या में पैरेंटस ने कलेक्टर बंगला का घेराव कर दिया था। इसी बीच आरटीआई में सीटों को घटाने को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने कोर्ट को दो प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और पैरेंट्स द्वारा किए जा रहे विरोध की जानकारी दी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने इसे स्वत: संज्ञान में लेते हुए स्कूल शिक्षा को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

हाईकोर्ट में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूल में प्रवेश नहीं देने को लेकर जनहित याचिका की सुनवाई चल रही है। इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच को बताया गया कि प्रदेश में स्कूल प्रबंधन की मनमानी चल रही है।

CBSE की पढ़ाई करते रहे स्टूडेंट्स, परीक्षा के बाद दिलाई दोबार परीक्षा

अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया, नारायणा टेक्नों व एक अन्य प्राइवेट स्कूल प्रबंधन की ओर से इन स्टूडेंट्स को सालभर तक CBSE कोर्स की पढ़ाई कराई गई। पैरेंट्स एक साल तक उसकी तैयारी भी कराते रहे। स्कूल प्रबंधन ने फरवरी में लोकल स्तर पर एग्जाम भी ले लिया। लेकिन बाद में स्कूल प्रबंधन को जब पता चला कि राज्य सरकार पांचवीं-आठवीं कक्षा का बोर्ड एग्जाम ले रहा है, तब स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को सीजी बोर्ड एग्जाम दिलाने के लिए दबाव बनाया। दरअसल प्राइवेट स्कूल प्रबंधन ने सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर सीबीएसई की मोटी फीस वसूल रहे हैं और फर्जी तरीके से सीबीएसई की पढ़ाई भी करा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा पांचवीं व आठवीं की केंद्रीयकृत परीक्षा के लिए निर्देश जारी करने के बाद यह फर्जीवाड़ा सामने आया है।

हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव से शपथपत्र के साथ मांगा जवाब

इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से बताया कि CBSE ने अपनी मान्यता के नियम को सख्त कर दिया है। इसके तहत CBSE उन स्कूलों को ही मान्यता देगा, जहां 12वीं कक्षा तक स्कूल संचालित है। जिन प्राइवेट स्कूलों को CBSE से मान्यता नहीं है, वो राज्य शासन के नियम और निर्देशों के तहत संचालित है। राज्य सरकार के जवाब के बाद डिवीजन बेंच ने शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर शपथपत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

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