Rajya Sabha elections: 2026 में बदलने जा रहा है राज्यसभा का गणित, मोदी सरकार के 6 मंत्रियों का खत्म होगा कार्यकाल, 75 सीटों पर होंगे चुनाव, जानिए कौन पड़ेगा भारी?

Rajya Sabha elections 2026: साल 2026 राज्यसभा के लिए काफी अहम रहने वाला है। इस साल ऊपरी सदन की कुल 75 सीटों पर चुनाव होंगे। ये चुनाव सिर्फ नंबरों का खेल नहीं होंगे बल्कि कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव इनका रुख तय करेंगे।

Update: 2026-01-01 11:55 GMT

Rajya Sabha elections 2026: साल 2026 राज्यसभा के लिए काफी अहम रहने वाला है। इस साल ऊपरी सदन की कुल 75 सीटों पर चुनाव होंगे। ये चुनाव सिर्फ नंबरों का खेल नहीं होंगे बल्कि कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव इनका रुख तय करेंगे। केरल, पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं और उनके नतीजों का सीधा असर राज्यसभा के समीकरण पर पड़ने वाला है। इसके साथ ही कई बड़े नेताओं और मंत्रियों का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

मोदी सरकार के 6 मंत्रियों का खत्म होगा कार्यकाल

2026 में मोदी सरकार के छह मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो रहा है साथ ही केंद्र में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा भी चल रही है। महाराष्ट्र से लगातार दो बार राज्यसभा पहुंचे रामदास अठावले का कार्यकाल भी इसी साल खत्म होगा। हाल के समय में एनडीए के भीतर उनके रिश्ते पहले जैसे सहज नहीं रहे हैं। बीएमसी चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर उनकी नाराजगी भी सामने आ चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि कुछ पुराने चेहरों की जगह नए नाम सामने आ सकते हैं।

बिहार: 5 सीटें, आरजेडी को लग सकता है झटका

बिहार में अप्रैल 2026 में राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं। जिन नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है उनमें आरजेडी के प्रेमचंद गुप्ता, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा और जेडीयू के हरिवंश नारायण शामिल हैं।

243 सदस्यीय विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। मौजूदा हालात में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, ऐसे में उसके खाते में पांच में से चार सीटें जाना लगभग तय माना जा रहा है। इंडिया गठबंधन के पास 35 विधायक हैं, जो किसी एक सीट के लिए भी काफी नहीं हैं। ऐसे में पांच विधायकों वाली AIMIM की भूमिका अहम हो सकती है। इसका सीधा असर यह होगा कि राज्यसभा में आरजेडी की ताकत पहले से कम हो जाएगी।

बंगाल और मध्य प्रदेश का हाल

पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव होना है। इनमें से चार सीटें अभी तृणमूल कांग्रेस के पास हैं। सीपीएम सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य का कार्यकाल भी अप्रैल में खत्म हो रहा है। राज्य में अगर मार्च–अप्रैल में विधानसभा चुनाव होते हैं, तो वहां की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है और इसका असर राज्यसभा चुनाव पर भी दिखेगा।

मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। 230 सदस्यीय विधानसभा में एक राज्यसभा सीट के लिए 58 वोट चाहिए होते हैं। मौजूदा संख्याबल के हिसाब से भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है।

यूपी की 10 सीटें रहेंगी सबसे अहम

उत्तर प्रदेश से 2026 में राज्यसभा की 10 सीटें खाली होंगी। इस वक्त इनमें से आठ सीटें भाजपा के पास हैं। नवंबर में जिन भाजपा सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें नीरज शेखर, दिनेश शर्मा, हरदीप पुरी, वीएस वर्मा, वृज लाल और सीमा द्विवेदी शामिल हैं।

इसी महीने समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी खत्म होगा। विधानसभा में मौजूदा स्थिति को देखते हुए भाजपा अपनी आठ सीटें बचा सकती है और समाजवादी पार्टी को दो सीटें मिल सकती हैं। बसपा के पास पर्याप्त विधायक नहीं हैं, ऐसे में करीब दो दशक बाद पहली बार ऐसा हो सकता है कि पार्टी का राज्यसभा में कोई सांसद न हो।

75 सीटों से बदलेगा पूरा संतुलन

फिलहाल राज्यसभा में एनडीए के पास 129 सीटें हैं जबकि विपक्ष के पास 78 सीटें हैं। 75 सीटों पर होने वाले चुनाव के बाद यह संतुलन बदलना तय माना जा रहा है। साफ है कि 2026 सिर्फ राज्यसभा चुनाव का साल नहीं होगा, बल्कि केंद्र की राजनीति और विपक्ष की रणनीति के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।

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