Teacher News, Pension Teacher LB Keder: पेंशन के लिए फेडरेशन ने शिक्षा मंत्री और अफसरों को लिखी चिट्ठी, हाई कोर्ट के आदेश का परिपालन की मांग, पढ़ें फेडरेशन का पत्र

Teacher News, Pension Teacher LB Keder: छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक, समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, शिक्षा विभाग व संचालक लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र लिखकर शिक्षक एलबी संवर्ग के पेंशन को लेकर साफ-साफ आदेश जारी करने की मांग की है। प्रांतीय अध्यक्ष ने अपने पत्र में बिलासपुर हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रमुख अंश को पत्र में लिखा है।

Update: 2026-01-29 08:11 GMT

Federation Ka Shiksha Mantri Ko Patra: रायपुर। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक, समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, शिक्षा विभाग व संचालक लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र लिखकर शिक्षक एलबी संवर्ग के पेंशन को लेकर साफ-साफ आदेश जारी करने की मांग की है। प्रांतीय अध्यक्ष ने अपने पत्र में बिलासपुर हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रमुख अंश को पत्र में लिखा है।

प्रांतीय अध्यक्ष राठौर ने बिलासपुर हाई कोर्ट के 23 जनवरी 2026 परमेश्वर प्रसाद जायसवाल एवं अन्य तथा रमेश कुमार चंद्रवंशी एवं अन्य याचिकाओं में पारित निर्णय के परिपालन में शिक्षक एलबी. संवर्ग हेतु पेंशन बाबत प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए नीति निर्धारण एवं आदेश जारी करने की मांग की है।

फेडरेशन ने अपने पत्र में हाई कोर्ट के उस आदेश का हवाला भी दिया है जिसमें पेंशन की मांग वाली याचिका पर निर्णय दिया है। फेडरेशन ने अपने पत्र में फैसले के उस अंश को भी लिखा है। फेडरेशन ने अपने पत्र में हाई कोर्ट के फैसले को कुछ इस तरह लिखा है, पेंशन एक कल्याणकारी उपाय और विलंबित मुआवजे का एक रूप है, और याचिकाकर्ताओं द्वारा समायोजन से पहले दी गई लंबी सेवा अवधि को अप्रासंगिक नहीं माना जा सकता। यह तथ्य कि कई याचिकाकर्ताओं को अन्यथा 01 जुलाई 2018 से 10 वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी, जिससे वे राज्य नियंत्रण में एक दशक से अधिक सेवा प्रदान करने के बावजूद 01 जुलाई 2028 के बाद ही पेंशन के पात्र बनेंगे, निष्पक्षता, आनुपातिकता और प्रशासनिक औचित्य के मुद्दे उठाता है, जिन पर नीतिगत स्तर पर उचित विचार करने की आवश्यकता है।

इस न्यायालय के विचार में, न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति पेंशन लाभ प्रदान करने या अस्वीकार करने के लिए परमादेश जारी करने के बजाय, प्रतिवादी राज्य को उन कर्मचारियों के संबंध में पेंशन प्रयोजनों के लिए नियुक्ति की निर्णायक तिथि पर व्यापक और तर्कसंगत पुनर्विचार करने का निर्देश देने से होगी, जिनकी सेवा शिक्षककर्मी के रूप में शुरू हुई और बाद में नियमित सरकारी सेवा में समाहित हो गई। ऐसे पुनर्विचार में सेवा की निरंतरता, किए गए कर्तव्यों की प्रकृति, वेतन का स्रोत, प्रशासनिक नियंत्रण और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के संवैधानिक आदेश को ध्यान में रखना आवश्यक है।

इस कोर्ट की राय में, न्याय तभी होगा जब पेंशन लाभ देने या न देने के लिए मैंडमस जारी करने के बजाय, प्रतिवादी राज्य को उन कर्मचारियों के लिए पेंशन के मकसद से नियुक्ति की निर्णायक तारीख पर एक व्यापक और तर्कसंगत पुनर्विचार करने के लिए कहा जाए, जिनकी सेवा शिक्षाकर्मी के तौर पर शुरू हुई थी और बाद में नियमित सरकारी सेवा में शामिल होने के साथ खत्म हुई। इस पुनर्विचार में सेवा की निरंतरता, किए गए कामों की प्रकृति, सैलरी का स्त्रोत, प्रशासनिक नियंत्रण और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के संवैधानिक आदेश को ध्यान में रखना जरूरी है।

विशेषकर उन मामलों में जहां सेवा अवधि कई चरणों में फैली हुई हो, पेंशन पात्रता का निर्धारण तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि पेंशन लागू होने की निर्णायक "नियुक्ति तिथि" निर्धारित करने वाली कोई स्पष्ट, अंतिम और एकसमान राज्य नीति न हो। ऐसे मामलों में नीति निर्माण कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, और कोई भी निर्णय तर्कसंगत, स्पष्ट और मनमानी से मुक्त होना चाहिए ताकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और निष्पक्षता के संवैधानिक दायित्वों का पालन हो सके।

पेंशन का हक, खासकर जहां सेवा कई चरणों में होती है, वहां पेंशन लागू होने के लिए निर्णायक "नियुक्ति की तारीख तय करने वाली एक साफ़, अंतिम और एक जैसी राज्य नीति के बिना तय नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में नीति बनाना कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, और कोई भी फैसला तर्कसंगत, स्पष्ट और मनमानी से मुक्त होना चाहिए ताकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और निष्पक्षता के संवैधानिक आदेशों को पूरा किया जा सके।

फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने स्कूल शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव व डीपीआई को लिखे पत्र में हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए शिक्षक एलबी. संवर्ग हेतु पेंशन बाबत प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए नीति निर्धारण एवं स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की है।



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