CG वाइल्डलाइफ: बीमार हाथी को दल के मुखिया और सदस्य इसलिए छोड़कर बढ़ गए आगे, जशपुर में इस तरह की घटना आई सामने...
CG Wildlife News: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के वनांचल में हाथियों के दल ने एक बीमार हाथी को उसके हाल पर छोड़कर जंगल की ओर कूच कर गया है। वन विभाग के अफसर हाथियों के इस व्यवहार से हतप्रभ है। हाथी विशेषज्ञ और वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी इसे सामान्य घटना बता रहे हैं।
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जशुपर।11 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के वनांचल में हाथियों के दल ने एक बीमार हाथी को उसके हाल पर छोड़कर जंगल की ओर कूच कर गया है। वन विभाग के अफसर हाथियों के इस व्यवहार से हतप्रभ है। हाथी विशेषज्ञ और वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी इसे सामान्य घटना बता रहे हैं। नितिन का कहना है, ऐसी स्थिति में कुल माता,मुखिया को दिल पर पत्थर रखकर निर्णय लेना पड़ता है। कुल माता को दल में शामिल सदस्यों के लिए चारा-पानी की व्यवस्था भी करना पड़ता है। पढ़िए कुल माता के इशारे पर समूह में शामिल हाथी किस प्रकार आगे बढ़ते हैं।
वन्यप्राणी प्रेमी व हाथी विशेषज्ञ नितिन सिंघवी ने बताया,हाथियों के दल में एक लीडर होता है,जिसे कुल माता कहा जाता है। कुल माता की जिम्मेदारी हाथियों की सुरक्षा से लेकर चारा-पानी की होती है। दल का कोई हाथी बहुत बीमार पड़ जाता है, उम्र दराज है, तो उसे मजबूरी और विवशता के साथ कुल माता को उसे छोड़ने का निर्णय लेना पड़ता है। आमतौर पर दल की मुखिया के इशारे पर ही दल में शामिल हाथी आगे बढ़ते हैं या फिर रुके रहते हैं। बीमार हाथी के लिए एक जगह अगर कुल माता रुकी रही तो दल में शामिल हाथी भी वहीं रुके रहते हैं। उनके लिए चारा पानी से लेकर सुरक्षा की जिम्मेदारी लीडर की होती है। यही कारण है कि बेहद विवशता के साथ बीमार और चल फिरने में अस्मर्थ सदस्य को छोड़ने का निर्णय लेना पड़ता है।
इसलिए छोड़ने का लेना पड़ा होगा निर्णय
नितिन सिंघवी का कहना है, जिस हाथी को दल ने छोड़कर आगे बढ़ गए होंगे, वह हाथी निश्चित रुप से या तो बहुत बीमार होगा या फिर उठ नहीं पा रहा होगा। या फिर उम्र दराज होगा और उठ नहीं पा रहा होगा। यही कारण है कि दल की मुखिया को उसे छोड़ना पड़ा होगा। नितिन का कहना है कि आमतौर पर हाथी एक दिन में 20 किलोमीटर तक चलता है। जाहिर है जिस हाथी को छोड़ा होगा वह बहुत बीमार होगा और उठ नहीं पा रहा होगा।
अब पढ़िए क्या है मामला
पत्थलगांव से लगे ग्राम बूढ़ाडाढ़ के आसपास के जंगल में ग्रामीणों ने एकहाथी को लेटा हुआ देखा। धीरे- धीरे वहां पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। ग्राूमीणों की सूचना पर वन विभाग का अमला पहुंच गया। इसके बाद पता चला कि हाथी उठ ही नहीं पा रहा है। वन अमले ने ग्रामीणों को हाथी से निश्चित दूरी बनाए रखने को कहा है, क्योंकि हाथी में कुछ हलचल नजर आ रही है। वन अफसरों ने पशु चिकित्सक की मदद ली है और उपचार करने का प्रयास किया है।
वन अधिकारियों का मानना है कि हाथी किसी कारण से अस्वस्थ हो गया है और चलने- फिरने में असमर्थ है। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं वह कमजोर तो नहीं है। उपचार के लिए अंबिकापुर के पशु चिकित्सकों को बुलाया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में करीब एक दर्जन जंगली हाथी विचरण कर रहे हैं। हाथियों का दल बीमार हाथी को छोड़ कर आगे बढ़ गए हैं। आगे जाते हुए हाथियों ने गेंहू के साथ सब्जियों की फसल को चौपट कर दिया है। सूचना है कि हाथियों का दल रायगढ़ जिले के जंगल की ओर रुख कर गया है।