कर्मचारियों की खबर: हाई कोर्ट ने कहा- नक्सल हमले में घायल जवान का दोबारा नक्सल क्षेत्र में नहीं कर सकते तबादला, पीएचक्यू द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को किया रद्द

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है, नक्सली हमले में घायल पुलिस कर्मियों का दोबारा नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थानांतरण आदेश जारी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पीएचक्यू द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया है।

Update: 2026-03-22 06:44 GMT

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है, नक्सली हमले में घायल पुलिस कर्मियों का दोबारा नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थानांतरण आदेश जारी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पीएचक्यू द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया है। याचिकाकर्ता कांस्टेबल को नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ड्यूटी करते वक्त सिर पर गोली लगी थी। याचिकाकर्ता कांस्टेबल की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने पैरवी की। याचिकाकर्ता ने डीजीपी द्वारा जारी सर्कुलर का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया, याचिकाकर्ता के मामले में विभाग ने डीजीपी द्वारा जारी सर्कुलर में दिए गए प्रावधान और निर्देशों का सीधेतौर पर उल्लंघन किया है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ निवासी दिनेश ओगरे, दूसरी बटालियन, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, सकरी, जिला बिलासपुर में कांस्टेबल के पद पर पुलिस विभाग में पदस्थ थे। वर्ष 2016 में पामेड़, जिला बीजापुर में पदस्थापना के दौरान नक्सली हमले में उनके सिर में गोली लगने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के बाद स्वस्थ्य हुए। पुलिस मुख्यालय, रायपुर द्वारा दिनेश ओगरे की पदस्थापना गंभीर नक्सली जिले अदवाड़ा कैंप, जिला बीजापुर कर दिया गया। स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए कांस्टेबल ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाई कोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की।

अधिवक्ता पांडेय ने DGP द्वारा जारी सर्कुलर का दिया हवाला

रिट याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने कहा, पुलिस महानिदेशक DGP रायपुर द्वारा 18 मार्च 2021 व 03 सितम्बर 2016 को यह सर्कुलर जारी किया गया था , इसमें साफ कहा गया है, नक्सली हमले में घायल जवानों से उनकी शारीरिक क्षमतानुसार ही ड्यूटी ली जाएगी।

घोर अनुसूचित जिलों में उनकी पदस्थापना ना करने एवं समय-समय पर उनके स्वास्थ्य के संबंध में समुचित जानकारी प्राप्त कर उनका ईलाज कराने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता वर्ष 2016 में पामेड़, जिला बीजापुर में पदस्थापना के दौरान नक्सल हमलें में सिर पर गोली लग जाने के कारण गंभीर रूप से घायल हुआ था इसके साथ ही वर्ष 2018 में ड्यूटी के दौरान बांया पैर फेक्चर हो गया था। उक्त दोनों घटनाओं के कारण याचिकाकर्ता को अपना काम करने एवं चलने-फिरने में दिक्कत होती है।

पुलिस मुख्यालय, रायपुर द्वारा याचिकाकर्ता का घोर नक्सली जिले अदवाड़ा कैंप, जिला बीजापुर में स्थानांतरण कर दिया गया है। पीएचक्यू द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश डीजीपी द्वारा जारी किए गए सर्कुलर का सीधेतौर पर उल्लंघन है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय के तर्कों से सहमति जताते हुए हाई कोर्ट ने कांस्टेबल की याचिका को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को विभाग के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही सिंगल बेंच ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) प्रशासन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी), छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल को, याचिकाकर्ता की मैदानी जिले में पदस्थापना हेतु प्रस्तुत अभ्यावेदन का तत्काल निराकरण करने का निर्देश दिया है।

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