पटवारी पदोन्नति: हाई कोर्ट ने राज्य शासन को दो महीने के भीतर निर्णय लेने जारी किया आदेश...

Bilaspur High Court: पटवारी से RI के पद पर पदोन्नति की मांग को लेकर पटवारियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर 60 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर विधि अनुरुप निर्णय लेने का निर्देश दिया है। इस बीच याचिकाकर्ता को सक्षम अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने कहा है। अभ्यावेदन पेश करने के लिए हाई कोर्ट ने 15 दिन की टाइम लिमिट तय कर दी है।

Update: 2026-03-23 06:46 GMT

फोटो सोर्स- NPG News

बिलासपुर। 23 मार्च 2026|पटवारी से RI के पद पर पदोन्नति की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर 60 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर विधि अनुरुप निर्णय लेने का निर्देश दिया है। इस बीच याचिकाकर्ता को सक्षम अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने कहा है। अभ्यावेदन पेश करने के लिए हाई कोर्ट ने 15 दिन की टाइम लिमिट तय कर दी है।

पटवारी से आरआई राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन और राजस्व विभाग के अफसरों को नोटिस जारी कर पात्र कर्मचारियों के मामले में विधि अनुरुप विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन से वंचित पटवारियों के दावों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

याचिकाकर्ता पटवारियों ने अपने अधिवक्ता अनुकूल विश्वास के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पदोन्नति की मांग की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, ये सभी याचिकाकर्ता 25 साल से अधिक समय से पटवारी के रूप में कार्यरत हैं। वरिष्ठता के आधर पर विभाग ने याचिकाकर्ताओं को राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण सूची में चयनित करने के साथ ही सूची में शामिल किर लिया है। इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, इनकी वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए राज्य सरकार ने सेवा में कनिष्ठ पटवारियों को पदोन्नति दे दी है। यह सीधेतौर पर राज्य शासन द्वारा बनाए गए मापदंड और निर्देशों का उल्लंघन है।

पढ़िए पदोन्नति के लिए क्या है नियम व शर्तें

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने पदोन्नति के लिए राज्य शासन द्वारा तय कि मापदंडों वे गाइड लाइन का जिक्र करते हुए कोर्ट को बताया, भर्ती प्रक्रिया में 50 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरने का नियम है। इसके अलावा राज्य शासन द्वारा पदोन्नति नियम 6 (2) का पालन नहीं किया जा रहा है। दोनों ही मापदंडों व निर्देशों का सीधेतौर पर अवहेलना की जा रही है। याचिकाकर्ता पटवारियों के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया, याचिकाकर्ता पदोन्नति के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता पूरी करते हैं और रिकॉर्ड में उन्हें पदोन्नति न देने का कोई ठोस कारण भी नहीं है।

हाई कोर्ट ने राज्य शासन को दिया ये निर्देश

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता व राज्य शासन के विधि अधिकारी के तर्कों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को विभाग के सक्षम अधिकारी के समक्ष 15 दिनों के भीतर अभ्यावेदन देने व अभ्यावेदन पर 60 दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं के पदोन्नति पर विचार करते हुए कारण सहति आदेश जारी करने का निर्देश राज्य शासन को दिया है। हाई कोर्ट ने यह भी साफ कहा है, अदालत द्वारा मामले के मेरिट पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की गई है। सक्षम प्राधिकारी स्वतंत्र रूप से नियमों के अनुसार निर्णय लेगा।

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