हाईकोर्ट का फैसला: अविवाहित बताकर दूसरी शादी की, दूसरे पति से अलग होने के बाद मांगा गुजारा भत्ता, हाईकोर्ट ने कहा-...

Bilaspur High Court: एक महिला ने पहले पति से तलाक लिए बगैर, खुद को अविवाहित बताते हुए आर्य समाज मंदिर में दूसरी शादी रचा ली। कुछ साल बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ और अलग रहने लगी। इसी दौरान उसने फैमिली कोर्ट में दूसरे पति से भरण पोषण की मांग करते हुए याचिका दायर कर दी।

Update: 2026-02-28 07:30 GMT

फोटो सोर्स- NPG News

बिलासपुर।28 फरवरी 2026| एक महिला ने पहले पति से तलाक लिए बगैर, खुद को अविवाहित बताते हुए आर्य समाज मंदिर में दूसरी शादी रचा ली। कुछ साल बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ और अलग रहने लगी। इसी दौरान उसने फैमिली कोर्ट में दूसरे पति से भरण पोषण की मांग करते हुए याचिका दायर कर दी। फैमिली कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। फैमिली कोर्ट के फैसले को महिला ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सिंगल बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस के सिंगल बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, दूसरी शादी करने से पहले तलाक लेना जरुरी है। कोर्ट ने कहा, पहली शादी कानूनीतौर पर जारी रहते दूसरी शादी गैरकानूनी है। हिन्दू विवाह अधिनियम में इस तरह का प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला के मेंटनेंस की मांग को खारिज कर दिया है।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, दूसरी शादी करने के लिए पहले पति से तलाक लेना अनिवार्य है। पहली शादी के कानूनी रूप से अस्तित्व में रहते हुए दूसरी शादी करना और फिर दूसरे पति से गुजारा भत्ता की मांग करना कानून उचित नहीं है। याचिकाकर्ता महिला ने फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

क्या है मामला

भिलाई निवासी महिला ने अपने दूसरे पति के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 125 के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। महिला ने अपनी याचिका में बताया, 10 जुलाई 2020 को आर्य समाज मंदिर में उनकी शादी हुई थी। महिला ने याचिका में आरोप लगाया, पति ने उसे प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया। याचिकाकर्ता महिला ने अपनी याचिका में पति की आय का हवाला देते हुए कहा है, व्यवसाय से पति को हर महीने 5 लाख रुपए का आय होता है, लिहाजा हर महीने एक लाख रुपये गुजारा भत्ता उनको दिलाया जाए।

हाई कोर्ट ने ये कहा

मामले की सुनवाई के दौरान परिवार न्यायालय ने पाया, महिला ने खुद को अविवाहित बताते हुए दूसरी शादी की रस्म निभाई थी। महिला ने इतनी बड़ी बात छिपाने के साथ ही दूसरी शादी करने से पहले, पहली शादी के बाद अपनी पति से तलाक नहीं ली थी। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि दुर्ग फैमिली कोर्ट के 20 जनवरी 2026 के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। फैमिली कोर्ट के फैसले को यथावत रखते हुए दूसरे पति से मेंटनेंस की मांग संबंधी महिला की याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

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