Collector Power: कलेक्टर SDM का ट्रांसफर कर सकते हैं मगर बाबू का नहीं, क्या है इसकी वजह और क्या हैं कलेक्टर के अधिकार

Collector Power: कलेक्टर जिलों के न केवल प्रमुख होते हैं बल्कि सरकार के नुमाइंदे भी। जिलों में कलेक्टर के अंतगर्त सारे विभाग आते हैं। पुलिस भी। जिला प्रमुख होने की वजह से कलेक्टरों के पास जिलों में असिमित अधिकार होते हैं।

Update: 2024-04-22 08:07 GMT

Collector Power: रायपुर। कलेक्टर शब्द की उत्पति टैक्स कोलेक्शन से हुई है। याने टैक्स कलेक्ट करने वाले पद को कलेक्टर नाम दिया गया। दरअसल, पुराने जमाने में सरकार के पास पैसे होते नहीं थे, सो विभाग भी नहीं थे। न कोई खास योजनाएं होती थी। सड़क, स्कूल, अस्पताल बन गया तो काफी था। आम आदमी से लगान के नाम पर जो टैक्स लिया जाता था, सरकार की आमदनी का यही मुख्य जरिया था।

लगान से ही सरकार का संचालन किया जाता था। लिहाजा, अंग्रेजों के दौर से पहले 1772 में कलेक्टर पद क्रियेट किया गया। मगर 60 के दशक के बाद इसका स्वरुप बदला। योजनाएं बननी शुरू हुई, कल-कारखानों का दौर शुरू हुआ। उससे सरकार के खजाने में पैसे आने भी प्रारंभ हुए। फिर विभाग भी बढ़ते गए। अब राज्यों में छोटे-बड़े ढाई दर्जन से अधिक विभाग होते हैं। और जो विभाग राज्य में होते हैं, उसके सारे जिला स्तर के विभाग में जिलों में होते हैं। और कलेक्टर इसके सुपरविजन करते हैं।

भू-राजस्व संहिता में अधिकार

भू-राजस्व संहिता में कलेक्टरों को एसडीएम की पोस्टिंग, ट्रांसफर का अधिकार दिया गया है। तभी एसडीएम की पोस्टिंग कलेक्टर करते हैं। सरकार सिर्फ डिप्टी कलेक्टरों का जिलों में ट्रांसफर करती है। उनमें से किसको तहसीलों में एसडीएम बनाना है और किससे कलेक्ट्रेट में काम लेना है, यह अधिकार कलेक्टरों को दिया गया है। सरकार किसी भी सूरत में एसडीम की पोस्टिंग नहीं कर सकती। हालांकि, कलेक्टर किसी बाबू का ट्रांसफर नहीं कर सकता। क्योंकि, ट्रांसफर का मसला सरकार के अंतगर्त आता है। सरकार ही इस पर निर्णय ले सकती है। मगर भू-राजस्व संहिता में प्रदत्त अधिकारों के तहत कलेक्टरों को एसडीएम ट्रांसफर का अधिकार मिला हुआ है।

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