CM विष्णुदेव के नेतृत्व में सुदूर अंचलों तक डिजिटल पहुंच का विस्तार, मोबाइल टावर योजना के माध्यम से सुदूर इलाकों में पहुंच रही संचार सुविधा
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के दूरस्थ और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों को डिजिटल मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के दूरस्थ और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों को डिजिटल मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। मोबाइल टावर योजना के माध्यम से उन इलाकों तक संचार सुविधा पहुंचाने की तैयारी की गई है जहां आज तक मोबाइल सिग्नल तक उपलब्ध नहीं हो पाता था। 4 फरवरी 2026 को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस योजना को औपचारिक मंजूरी दी गई। यह निर्णय केवल संचार व्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं है बल्कि विकास, सुरक्षा और सामाजिक आर्थिक सशक्तिकरण के व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियां, घने जंगल और नक्सल प्रभावित क्षेत्र लंबे समय से संचार सुविधाओं के विस्तार में चुनौती बने हुए थे। कई गांवों में लोग मोबाइल नेटवर्क पाने के लिए कई किलोमीटर दूर ऊंचे स्थानों तक जाने को मजबूर थे। इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार ने सेवा प्रदाताओं को मोबाइल टावर स्थापना के लिए अनुमति प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाने का प्रावधान भी शामिल किया है।
नेटवर्क की कमी से प्रभावित विकास
राज्य के बस्तर संभाग के कई जिलों में मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता बेहद सीमित रही है। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे क्षेत्रों में अनेक गांव ऐसे थे जहां संचार व्यवस्था लगभग शून्य के बराबर थी। इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच पर पड़ता था। ऑनलाइन शिक्षा से छात्र वंचित रहते थे। किसानों को मंडी भाव की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती थी और ग्रामीणों को डिजिटल बैंकिंग सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती थी। कई स्थानों पर पंचायत मुख्यालयों तक भी स्थिर नेटवर्क उपलब्ध नहीं था। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शासन के बीच संवाद दोनों प्रभावित होते थे।
डिजिटल अवसंरचना को विकास की धुरी
दिसंबर 2023 में नई सरकार के गठन के बाद राज्य में डिजिटल अवसंरचना को विकास की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल सुविधा नहीं बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों का अधिकार है। इसी सोच के साथ बजट 2025-26 में मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना को शामिल किया गया। योजना के अंतर्गत राज्य में 5000 से अधिक मोबाइल टावर चरणबद्ध तरीके से स्थापित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन टावरों के माध्यम से 4G नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा जिससे भविष्य में 5G सेवाओं के लिए भी आधार तैयार होगा। साथ ही बैकहॉल कनेक्टिविटी और फाइबर नेटवर्क को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि स्थापित टावर प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
टेकुलगुडेम से शुरू हुई नई शुरुआत
नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के टेकुलगुडेम गांव में इस योजना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। होली के अवसर पर 13 मार्च को सीआरपीएफ के फॉरवर्ड ऑपरेशंस बेस कैंप में पहला बीएसएनएल मोबाइल टावर स्थापित किया गया। यह टावर टेकुलगुडेम के साथ टिम्मापुरम, जोनागुड़ा और पूवर्ती जैसे दूरस्थ गांवों को भी नेटवर्क सुविधा प्रदान करेगा। इस अवसर पर ग्रामीणों को सिम कार्ड वितरित किए गए जिससे क्षेत्र में संचार व्यवस्था मजबूत होने के साथ सुरक्षा तंत्र को भी नई मजबूती मिली है। केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया फंड के तहत छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में 513 नए 4G टावरों की स्वीकृति भी दी है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रशासन को नई गति
मोबाइल टावर योजना का प्रभाव ग्रामीण जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। किसान अब मोबाइल के माध्यम से मंडी भाव की जानकारी लेकर अपनी फसल का बेहतर मूल्य तय कर पा रहे हैं। डिजिटल भुगतान की सुविधा से स्थानीय व्यापार में पारदर्शिता बढ़ रही है। स्वयं सहायता समूहों और छोटे व्यापारियों ने भी ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाना शुरू कर दिया है। युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, ई लर्निंग सामग्री और रोजगार से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है। साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था मजबूत होने से सुरक्षा बलों के बीच समन्वय पहले से अधिक प्रभावी हुआ है और आपातकालीन सेवाओं की पहुंच भी तेज हुई है।
डिजिटल समावेशन की मजबूत नींव
मोबाइल टावर योजना के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन सहायता तक पहुंच में भी सुधार देखा जा रहा है। अब ग्रामीणों को बैंकिंग अपडेट, सरकारी योजनाओं की जानकारी और एसएमएस अलर्ट समय पर मिल रहे हैं। टेलीमेडिसिन और वीडियो परामर्श जैसी सुविधाएं भी धीरे धीरे गांवों तक पहुंचने लगी हैं। समग्र रूप से यह पहल छत्तीसगढ़ में डिजिटल समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनकर उभरी है। जिन आदिवासी और नक्सल प्रभावित गांवों तक विकास की पहुंच सीमित थी वे अब तेजी से डिजिटल परिवर्तन का हिस्सा बन रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह योजना ग्रामीण जीवन, प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
छत्तीसगढ़ में 513 नए 4G मोबाइल टावरों की स्वीकृति
डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में बीएसएनएल के माध्यम से 513 नए 4G मोबाइल टावर स्थापित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे नक्सल प्रभावित और दूरस्थ अंचलों में शांति, सुरक्षा और विकास के साझा प्रयासों का महत्वपूर्ण प्रतिफल बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह निर्णय नक्सल उन्मूलन की दिशा में चल रहे प्रभावी प्रयासों की एक मजबूत कड़ी है। सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई और प्रशासनिक समन्वय से जिन क्षेत्रों में स्थायित्व स्थापित हुआ है, वहां अब विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार सुनिश्चित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन 4G मोबाइल टावरों की स्थापना से सुदूर और दुर्गम इलाकों में रहने वाली जनता को पहली बार सुलभ और विश्वसनीय मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाएं प्राप्त होंगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, प्रशासनिक सेवाओं और आपातकालीन संचार की सुविधा सशक्त होगी।
उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी का यह विस्तार वित्तीय समावेशन की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा। मोबाइल नेटवर्क के सशक्त होने से बैंकिंग सेवाएं, डीबीटी, यूपीआई, बीमा, पेंशन और अन्य डिजिटल सेवाओं की पहुंच आम नागरिकों तक सहज रूप से सुनिश्चित हो सकेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पहल “डिजिटल इंडिया” के उस मूल उद्देश्य को साकार करती है, जिसमें अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने का संकल्प निहित है। इससे स्थानीय युवाओं को डिजिटल माध्यमों से नए अवसर मिलेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए सुरक्षा के साथ-साथ विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस विजन के अनुरूप केंद्र के साथ मिलकर राज्य के प्रत्येक नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
कांकेर जिले के ग्रामों में लगेंगे 82 नए बीएसएनएल टावर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में डिजिटल क्रांति की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसी कड़ी में कांकेर जिले के अलग-अलग विकासखण्डों के ग्रामों में बीएसएनएल के 82 नए टावर स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।
जिला प्रशासन की अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक हाई-स्पीड इंटरनेट की पहुंच सुनिश्चित करना है, ताकि वहां के नागरिकों को ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।
अधिकारियों ने बताया कि बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी से ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर विकास को गति मिलेगी। लंबे समय से नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे इन इलाकों में मोबाइल टावर लगने से संचार व्यवस्था मजबूत होगी और आपातकालीन सेवाओं तक भी त्वरित पहुंच संभव हो सकेगी। राज्य सरकार द्वारा डिजिटल ढांचे को मजबूत करना सुशासन और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में इस परियोजना के पूर्ण होने से जिले के दूरस्थ अंचलों में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी।
कांकेर जिले के जिन ग्रामों में नए बीएसएनएल टावर लगाए जाएंगे, उसमें भानुप्रतापपुर विकाखण्ड अंतर्गत ग्राम जेपरा, परवी, पण्डरीपानी, आसुलखार, धनेली, धुतापिपली स्कूलपारा आमाकड़ा, खोर्रा, परवी जलहूर, पिचेकट्टा, शाहकट्टा, तेलम्मा, उत्तमार शामिल है। इसी प्रकार कोयलीबेड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम तड़हूर, मुरावंडी मुंडला, नवगेल, पिण्डकसा, पित्तेभोड़िया, अंजाडी, बुधानडंड, छिंदपाल संतोला, छोटेबोदेली प्रोहपारा, देवीपारा, कड़मे सोडवापारा, खैरकट्टा कॉलोनी, खैरकट्टा कॉलोनी उजाला, कोयेगांव, माचपल्ली हिदूर, मेटाबोदेली शिकारीपारा, मुरावण्डी, मुरडोंडा। नरहरपुर ब्लॉक के ग्राम डुडुमबहारा, खदरवाही, मर्रामपानी, मारवाड़ी, बहनापानी, दबेना, दबेना जंगलपारा, मासुलपानी, पथर्रीनाला, बहनापानी, आँखिहर्रा। सरोना तहसील के ग्राम धनेसरा, गट्टागुडुम, मंडरादरहा, तिरियरपानी, खल्लारी, सोनपुर शामिल है।
इसी प्रकार दुर्गूकोंदल ब्लॉक के ग्राम भंडारडिगी, दोड़देकादर, गुरावंडी मंगहूर, डोडे, कोंड्रूज गुदूम, पाउरखेड़ा, रसुली नलकसा, कोंड्रूज डंडईखेड़ा, पचांगी कोसपराली, हैपुरकसा हेपुर, हामतवाही पलवी, हिंगनझर, झिटकाटोला, झिटकाटोला तामोडा, कोसपराली पराली, मर्रामपानी, पचांगी, पलवी घुरवण्डी। अंतागढ़ ब्लॉक के ग्राम गेटिनडांगरा टेमरूगांव, जोडांड बगझर, बदरेंगी टेकापानी, अमोड़ी पण्डरीपारा, कढ़ाहीखोदरा मण्डाम, लोहत्तर पटेलपारा, सरंडी स्कूलपारा, भैंसासुर डूमरकोटपारा, खोड़पानी स्कूलपारा। चारामा ब्लॉक दमकसा, गोटीटोला मधुबनपारा, परसोदा साहूपारा, कांकेर ब्लॉक के ग्राम भैंसगांव, कानागांव, कुलगांव, पेटोली, पुसवाड़ा मारीपारा में भी नए बीएसएलएल टावर स्थापित किए जाएगें।