CG Pawan Sai: बीजेपी के संगठन मंत्री पवन साय के पार्टी की बैठक में नहीं आने के क्या है मायने? क्या संगठन में होने जा रहा कोई बड़ा बदलाव?
CG Pawan Sai: छत्तीसगढ़ भाजपा ने जिलों, मोर्चा, प्रकोष्ठों आदि के नवनियुक्त पदाधिकारियों की बैठक राजधानी में बुलाई थी। इन दिनों पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त छत्तीसगढ़ प्रदेश के संगठन मंत्री पवन साय छत्तीसगढ़ तो आए, लेकिन बैठक में नहीं दिखे। पवन साय तीन माह से छत्तीसगढ़ से दूर पश्चिम बंगाल में थे। मगर मीटिंग के दौरान छत्तीसगढ़ में होने के बाद भी संगठन मंत्री का नहीं आना भाजपाइयों को हैरत में डाल रहा है।
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17 February 2026|रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने और विष्णु देव साय के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ताजपोशी होने के बाद दो सालों में संगठन और सरकार के समीकरणों में लगातार बदलाव देखने को मिला। सरकार की शुरूआती एक-डेढ़ साल तो लगभग संगठन की ही चली। ट्रांसफर, पोस्टिंग से लेकर सरकार के अहम मामलों में संगठन का दबदबा परिलक्षित हुआ।
लेकिन सरकार के दो साल होने के बाद अब स्थिति कुछ बदल रही है। पार्टी मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे भवन से मिलने वाले दिशा-निर्देश या सलाह में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। उच्च पार्टी सूत्रों का मानना है कि संगठन और सरकार में अभी समन्वय बढ़ाने की सख्त जरुरत है, जिस पर दिल्ली से आए पार्टी नेताओं ने जोर दिया था।
यह भी स्थापित सत्य है कि दो साल के भीतर भाजपा की कोर ग्रुप की किसी ऐसी बैठक का जिक्र नहीं किया जा सकता, जो प्रभावी रही हो और किसी नीतिगत विषय पर निर्णायक चर्चा की जा सकी है। अब कोर ग्रुप की बैठकों की संख्या लगातार घटती जा रही है। जब कभी दिल्ली से प्रदेश प्रभारी आते रहे, तब दिग्गज नेताओं की बैठक की औपचारिकता ही पूरी की जाती रही है।
जाहिर है, भाजपा में हर स्तर पर बदलाव हो चुका है, जबकि सरकार जैसे बनी थी, वैसे ही चल रही है। संगठन में बदलाव के बाद जाहिर है, नए नेताओं का सरकार के साथ समीकरण भी बदल रहा है। छत्तीसगढ़ बीजेपी के संगठन मंत्री पवन साय को राष्ट्रीय नेतृत्व ने बड़ी जिम्मेदारी दी है। इन दिनों वे अप्रैल-मई में होने वाले पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की जमीन तैयार करने में व्यस्त हैं। करीब तीन माह से वे वहीं डटे हुए हैं और जिन विधानसभा सीटों में भाजपा कमजोर है अथवा जहां जीत की संभावना बन रही है, वहां लगातार दौरे कर रहे हैं। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में ऐसे करीब दर्जनभर संगठन मंत्रियों को लगभग 50 सीटों पर भेजा है, जो माहौल का अध्ययन करने के साथ संभावित प्रत्याशी की भी जानकारी ले रहे हैं।
जशपुर तक आए साय
बताते हैं कि लंबे अरसे बाद पवन साय का जशपुर आना हुआ है। वहां कुछ पारिवारिक और कुछ संगठन की नजरिए से उनका प्रवास हुआ। इस बीच रायपुर में छत्तीसगढ़ भाजपा ने मोर्चा- प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों की बैठक बुला कर चार माह के प्रशिक्षण का शेड्यूल दिया। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि सभी नए पदाधिकारियों को मार्गदर्शन दिया गया और पार्टी की रीति- नीति के अनुरूप जमीनी कार्यक्रम की सीख दी गई। ऐसी बैठकों में संगठन मंत्रियों की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और इस कारण उनके मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि व्यस्तता के कारण रायपुर नहीं आ सके, लेकिन पार्टी के अंदरुनी खाने में इसे लेकर सभी हैरत में हैं। सभी का मानना है कि संगठन मंत्री का मार्गदर्शन संगठन के साथ सरकार के लिए भी आवश्यक है। इससे ही आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के रास्ते तय होेंगे। और छत्तीसगढ़ के संगठन मंत्री पवन साय पिछले तीन महीने से संगठन से दूर हैं। इस तीन महीने में उन्होंने किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया है।
बड़े बदलाव की आहट
वैसे भाजपा के लोग ही संगठन में किसी महत्वपूर्ण बदलाव से इंकार नहीं कर रहे। नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले ही संगठन में बदलाव की चर्चाएं चल रही थीं। अब तो छत्तीसगढ़ के पार्टी संगठन के क्रियाकलापों से भलीभांति वाकिफ नितिन नबीन के हाथ में ही पार्टी की कमान है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा संगठन मेें सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा, लिहाजा बड़े बदलाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।