मनरेगा का नाम बदला, मजदूरों के 13 करोड़ अटके, तीन माह से मजदूरी नहीं मिली

CG News: :केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदल कर जी रामजी कर दिया है। इस योजना में अब 100 दिन की जगह 125 दिन काम दिया जा रहा है। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के एक जिले में मजदूरी ही अटक गई है, मजदूरों को तीन माह से बकाया 13 करोड़ रुपये से अधिक की मजदूरी नहीं मिली है।

Update: 2026-04-08 09:54 GMT

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रायपुर।08 अप्रैल 2026| मनरेगा का नाम बदलते वक्त केंद्र और राज्य सरकार ने वादा किया था कि इससे सिस्टम में सुधार होगा, मजदूरों को फायदा होगा। जबकि छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में मजदूरों की बड़ी रकम अटक गई है। करीब 13 करोड़ 61 लाख रुपये का भुगतान मजदूरों को नहीं हो सका है। नियम के अनुसार काम पूरा होने या मस्टर रोल बंद होने के सात से 15 दिनों के भीतर ही मजदूरों को भुगतान हो जाना चाहिए। इसके विपरीत सरगुजा के मजदूर तीन माह से चक्कर काट रहे हैं। नियम में यह भी है कि मजदूरी के भुगतान में अधिक विलंब होता है तो फिर मजदूरों को मुआवजा भी मिलना चाहिए, पर इसका कहीं पर पालन नहीं हो रहा है।

छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में मांग के अनुरूप मनरेगा की नई योजना के तहत 125 दिनों का काम देने के लक्ष्य के अनुरूप प्लान बनाया गाा है। इसी अनुरूप काम भी चल रहा है। बताया गया है कि सरगुजा जिले में फंड के अभाव में मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है। अनुमान है कि जी रामजी के तहत सरगुजा में प्रतिदिन 30 हजार से अधिक के काम कराए जा रहे हैं। अब मजदूरी का बड़ा हिस्सा अटक जाने के कारण मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नई योजना का पूरा काम ऑनलाइन चल रहा है और पोर्टल के जरिए संचालित किया जा रहा है। इसके बाद भी लंबित मजदूरी पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सरगुजा में करीब 2 लाख दस हजार पंजीकृत श्रमिक हैं, इनमें से एक लाख 23 हजार के आसपास पंजीकृत जॉब कार्ड हैं। मतलब इतने लोग मनरेगा में काम करना चाहते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बीते वित्तीय वर्ष में 21 लाख 95 हजार मानव दिवस सृजित कर मजदूरों को काम दिया गया था। इन मजदूरों की कुल मजदूरी की रकम 71 करोड़ 33 लाख रुपये होती है और इसमें से 57 करोड़ 72 लाख का भुगतान किया जा चुका है। शेष 13 करोड़ 61 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो पा रहा है। प्रभावित मजदूर ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत तक का चक्कर काट रहे हैं, पर उन्हें कहीं से मदद नहीं मिल रही है। इस कारण पूरे परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है। साथ ही अब मजदूर यह भी सोचने लग गए हैं कि भविष्य में मजदूरी करने पर पैसा मिलेगा या नहीं। इस असमंजस के कारण योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों की संख्या घट सकती है।

सरकारी भवन, पीएम आवास भी बन रहे

सरगुजा में मनरेगा की नई योजना के तहत श्रमिकों से सरकारी भवनों के निर्माण के साथ प्रधान मंत्री आवास और कुएं वगैरह बनाने का काम लिया जा रहा है। समय पर मजदूरी नहीं मिलने से मजदूर घट रहे हैं और इससे निर्माण कार्य भी प्रभावित होने लगा है।

सप्लाई भी प्रभावित

बताया जाता है कि निर्माण कार्य के लिए मंगाई जाने वाली सामग्री सीमेंट, रेत, गिट्टी, लोहा वगैरह का भी भुगतान नहीं हो सका है। इसका आंकड़ा ढाई करोड़ रुपये से अधिक है। इस कारण निर्माण कार्य के लिए अब सप्लाई भी प्रभावित होने लगी है। तीन माह से भुगतान नहीं होने से कारोबारी अब सप्लाई नहीं कर रह हैं।

शासन को भेजी रिपोर्ट

मजदूरी रुकने के मामले में मीडिया को जिला पंचायत की अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी नेहा सिंह ने जानकारी दी है कि मजदूरी भुगतान शेष होने की जानकारी पोर्टल पर राज्य शासन को भेज दी गई है। राज्य शासन स्तर से ही मजदूरों को राशि जारी होती है।

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