हाई कोर्ट ने क्यों कहा: मौजूदा स्थिति चिंताजनक के साथ ही बेहद शर्मनाक, सरकारी स्कूलों में शौचालय की अनुपलब्धता पर हाई कोर्ट नाराज...

इमेज सोर्स- NPG News
बिलासपुर। 8 अप्रैल 2026| छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय की कमी को लेकर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है। डिवीजन बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, मौजूदा स्थिति चिंताजनक के साथ-साथ बेहद शर्मनाक है। नाराज कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। बता दें, NPG.NEWS ने इस रिपोर्ट को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की कमी पर नाराजगी जताई है। मीडिया रिपोर्ट्स को स्वतः संज्ञान में लेते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रारंभ की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार छत्तीसगढ़ के पांच हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए पृथक शौचालय की व्यवस्था नहीं है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में जनहित याचिका की सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने तल्ख शब्दों में कहा, यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, साथ ही बेहद शर्मनाक भी है। छात्राओं को पढ़ाई के दौरान मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है, जो उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
पढ़िए हाई कोर्ट ने क्या
जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा, राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, वह स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करे, खासकर बालिकाओं के लिए। शौचालय जैसी आवश्यक सुविधा का अभाव छात्राओं की स्कूल में उपस्थिति को प्रभावित करता है, कई बार उन्हें पढ़ाई छोड़ने तक के लिए मजबूर कर देता है। यह मामला बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के सरकारी दावों पर भी सवाल खड़ा करता है।
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस
जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जानकारी देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सचिव से पूछा, इस तरह की समस्या क्यों बनी हुई है, इसे दूर करने के लिए शासन स्तर पर अब तक क्या प्रयास किए गए हैं। डिवीजन बेंच ने इस सवालों का साफ-साफ जवाब देने के साथ ही यह भी पूछा है, शौचालयों की कमी को दूर करने के लिए सरकार के पास क्या कार्ययोजना है।
ये है NPG.NEWS की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग में स्वच्छता मिशन का डिब्बा गोल होता दिख रहा है। जिन स्कूलों में स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जा रहा है, वहीं शौचालयों की हालत दयनीय है। आदिवासी इलाके के केवल एक विधानसभा क्षेत्र की रिपोर्ट आयी है, वह भी चौंकाने वाली है। हाल यह है कि 53 स्कूलों के शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है, जबकि दर्जनभर स्कूलों में अब तक शौचालय नहीं बना है।
ये है विधायक की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग ने खुद ही सरगुजा संभाग के सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों की एक रिपोर्ट जारी की है। यह विधानसभा क्षेत्र आदिवासी इलाका है और विधायक राजकुमार टोप्पो सत्तारुढ़ पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस आदिवासी क्षेत्र के स्कूलों के शौचालयों के हाल पर जारी विभागीय रिपोर्ट ने स्वच्छता अभियान पर सवाल खड़ा कर दिया है। जिन स्कूलों में बच्चे- बच्चियां जा रही हैं, वहां शौचालय की व्यवस्था नहीं है। विधानसभा क्षेत्र के 65 स्कूल ऐसे हैं, जहां शौचालय नारकीय हालत में है। ये सभी स्कूल बतौली और सीतापुर विकासखंड में आते हैं।
विधायक की रिपोर्ट दो कैटेगरी में
रिपोर्ट में स्कूलों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। एक में उन स्कूलों को रखा गया है, जहां शौचालय तो हैं, मगर उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। मतलब शौचालय अनुपयोगी हैं। जबकि दूसरी श्रेणी में उन स्कूलों के नाम हैं, जहां शौचालय का निर्माण नहीं किया जा सका है। जिन स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, उनमें बतौली विकासखंड के प्राथमिक शाला उमापुर, अहीरारा, जुताडांड, तराइडाड, चॉवरपानी, कदहुआ के प्राथमिक और मिडिल स्कूल, सीतापुर विकासखंड के प्राथमिक स्कूल खडदोरना, पंडरपाठ, कठबुड़ा, मिडिल स्कूल भवराडांड और पेटला शामिल हैं। इसी तरह जिन स्कूलों में अनुपयोगी शौचालय हैं, उनमें बतौली विकासखंड के प्राथमिक स्कूल परसाढाब, लगरूपारा, कुकुरढोढी, शिवपुर, बेलकोटा, गहिला, नावापारा, चिरंगा, लैगु, सेदन, नयाबांध, महेशपुर, घुटरीपारा पटेलपारा, तेर्लाधार, छोटेपुटुकेला, जुनापारा, चिपरकाया, सेनरिहा, घुटियापहरी, बाघपानी, सरकहवा, कोरकोटपारा, नवापारा, मिडिल स्कूल नवापारा, सेदम, पथरई, अहीरपारा, सुवारपारा, सरनना, नयाबांध, छोटेपुटुकेला, डुमरभावना, बाधपानी, मूर्ताडांड, हाईस्कूल तलईधार, प्राथमिक स्कूल गौहडीपारा, बेनई, पखनापारा, पनिकापारा, घुरुवाबुडा, फुदकीडिहारी, कन्या आश्रम सीतापुर, प्राथमिक स्कूल बखरीपारा, बैगापारा, कुनमेरा, पंडरीपानी, मिडिल स्कूल सूर, कुनमेरा खास, ढोढागांव ठेठेटांगर, बंशीपुर, सहनपुर और मिठवा।
2024 से चल रहा शौचालय निर्माण, अब तक अधूरा
दूसरी ओर राज्य सरकार ने बजट देकर आत्मानंद स्कूलों में शौचालय निर्माण करने को कहा था। दिलचस्प बात यह है कि 2024 से अब तक इन स्कूलों में शौचालय निर्माण की प्रक्रिया चल ही रही है, कहीं से पूर्ण होने की रिपोर्ट नहीं आयी है। लोक शिक्षण संचालनालय की रिपोर्ट के अनुसार कोरिया के स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम विद्यालय खरवत, सरगुजा के धौरपुर, केशवपुर, साहगा, नारायणपुर के स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल कोडकामेटा, पीएम श्री सेजेस बालक खैरागढ़, सेजस मनेंद्रगढ़ और सक्ति के सेजेस नया बाराद्वार में कुछ 11 शौचालयों के निर्माण का आदेश दिया गया था। इनमें से केवल मनेंद्रगढ़ में तीन शौचालयों का निर्माण पूर्ण बताया गया है। बाकी जगह या तो निर्माण की प्रक्रिया प्रगति पर है अथवा निर्माण कार्य प्रगति पर है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शौचालय जैसे छोटे निर्माण के लिए दो साल भी कम पड़ गए हैं।
Tags
-
Home
-
Menu
