CG के प्राइवेट स्कूलों की हाई कोर्ट ने मंगाई कुंडली, DPI ने प्रदेशभर के DEO को पत्र लिखकर मांगी ये जानकारी...
Bilaspur High Court: शिक्षा के अधिकार कानून का छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूलों में नियमानुसार पालन ना होने की शिकायत करते हुए भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जानकारी मांगी है।
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बिलासपुर। 31 मार्च 2026| शिक्षा के अधिकार कानून का छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूलों में नियमानुसार पालन ना होने की शिकायत करते हुए भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जानकारी मांगी है। नोटिस के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग हरकत में आया है। डीपीआई ने प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर प्राइवेट स्कूलों के संबंध में जरुरी जानकारी मांगी है। इसके लिए दो अप्रैल डेड लाइन तय कर दिया है।
बता दें, जनहित याचिका में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने डिवीजन बेंच के समक्ष प्रमुख मुद्दा उठाते हुए बताया, छत्तीसगढ़ में ऐसे भी प्राइवेट स्कूल का संचालन किया जा रहा है, जिनके पास खुद का भवन नहीं है। लीज में लेकर स्कूल का संचालन किया जा रहा है। संबंद्धता में सरकारी एजेंसी से मिलकर घालमेल किया जा रहा है। याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ में संचालित हो रहे सभी प्राइवेट स्कूलों के संबंध में पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को दिया है। सचिव को शपथ पत्र के साथ पूरी जानकारी देनी होगी। हाई कोर्ट के निर्देश और सुनवाई के दौरान जताई नाराजगी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग का अमला सक्रिय हो गया है। डीपीआई के प्रदेशभर के डीईओ के नाम जारी आदेश को इसी का हिस्सा माना जा रहा है। डीईओ को दो अप्रैल से पहले सभी जानकारी सिलसिलेवार डीपीआई को देनी होगी। बता दें, न्यायधानी बिलासपुर में विवादों में आए बड़े स्कूल नारायणा टेक्नोक्रेट स्कूल का भी अपना स्वयं का भवन नहीं है। स्थानीय व्यवसायी से लीज पर लेकर स्कूल का संचालन किया जा रहा है, जिसको लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है।
मान्यता का ये है प्रमुख शर्तें
किसी स्कूल के लिए भवन का होना सबसे बड़ी अनिवार्य शर्त है। स्कूल में बच्चों की संख्या के आधार पर कमरों में बैठक व्यवस्था और बिजली, पानी, शौचालय की उपलब्धता आदि मूलभूत आवश्यकताओं का परीक्षण करने के बाद ही किसी विद्यालय को मान्यता दी जाती है। प्राइवेट स्कूलों में मान्यता निरीक्षण के दौरान भवन की सुविधा के अभाव में, किराया नामा लगवा कर मान्यता प्रदान करने से ही गली-गली में प्राइवेट स्कूल बिना मानदंडों के संचालित हो रहे है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हाई कोर्ट में पेश की जाने वाली जानकारी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों और प्राइवेट स्कूल प्रबंधन के बीच गुपचुप तरीके से चल रहे इस फर्जीवाड़े का खुलासा होगा।
पढ़िए क्या है DPI का आदेश
उच्च न्यायालय में दायर याचिका में 24 मार्च 2026 को पारित आदेश का हवाला देते हुए डीपीआई ने प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी पत्र में लिखा है, हाई कोर्ट ने प्रदेशभर में संचालित प्राइवेट स्कूल
जिसमें राज्य के भवन विहीन अशासकीय विद्यालयों के कागजों में मान्यता दिये जाने की शिकायत का उल्लेख है। डीपीआई ने प्रदेशभर के डीईओ को लिखे पत्र में कहा है, आपको निर्देशित किया जाता है कि उच्च न्यायालय में दायर याचिका कमांक डब्ल्यू.पी.आई.एल. 22/2016 पर पारित आदेश 24 मार्च 026 के परिपालन में जानकारी, 2 अप्रैल 2026 के पूर्व अनिवार्य रूप से साफ्ट कॉपी एवं हार्ड कॉपी में उपलब्ध कराया जाना है।
प्रदेशभर के DEO को ये देनी होगी जानकारी
- ऐसे अशासकीय स्कूल का नाम जहां बिना भवन के स्कूल को मान्यता दी गई है।
- दर्ज संख्या, शाला का स्तर (पूर्व. प्राथमिक, प्राथमिक, माध्यमिक, हाई, हायर सेकेण्डरी।
- कब प्रदान की गई है मान्यता।