गृह मंत्रीअमित शाह ने छतीसगढ़ को नक्सलमुक्त प्रदेश घोषित किया, छत्तीसगढ़ पुलिस को किया सैलूट, कांग्रेस पर किया करारा हमला

गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में ‘नक्सल मुक्त भारत’ मुद्दे पर चर्चा के दौरान सरकार की तरफ से जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा- जो लोग पूरी व्यवस्था को नकार कर हथियार उठा लेते हैं, ऐसा नहीं चलेगा। हथियार उठाने वालों को उसकी कीमत चुकानी होगी। गृह मंत्री शाह ने सदन में छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त राज्य घोषित करते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस को सैल्यूट किया।

Update: 2026-03-30 14:27 GMT

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दिल्ली। 30 मार्च 2026| गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में ‘नक्सल मुक्त भारत’ मुद्दे पर चर्चा के दौरान सरकार की तरफ से जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा- जो लोग पूरी व्यवस्था को नकार कर हथियार उठा लेते हैं, ऐसा नहीं चलेगा। हथियार उठाने वालों को उसकी कीमत चुकानी होगी। गृह मंत्री शाह ने सदन में छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त राज्य घोषित करते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस को सैल्यूट किया। गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला।

सदन में बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और वामपंथियों पर हमला बोलते हुए कहा, सालों से भोले-भाले आदिवासियों को अंधेरे में रखा गया। वामपंथियों ने अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए आदिवासियों को बहकाया। कांग्रेस ने आजादी के बाद 75 साल में 60 साल राज किया। फिर आदिवासी विकास से क्यों बच गए। कांग्रेस ने 60 साल के दौरान आदिवासियों तक घर, स्कूल, मोबाइल टॉवर नहीं पहुंचने दिया और अब हिसाब मांग रहे हैं। अपने गिरेबान में झांककर देखिए। जो लोग नक्सलवाद की वकालात करते हैं, उनसे पूछना चाहता हूं ये सब 1970 से अब तक क्यों नहीं हुआ था।

संसद में आज नक्सलवाद पर चर्चा सरकार की तरफ से दी गई डेडलाइन खत्म होने से एक दिन पहले हो रही थी। सदन में चर्चा के दौरान अमित शाह ने छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त घोषित करते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस की साहस,वीरता और धैर्य की तारीफ की।

अमित शाह की बड़ी घोषणा

बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो चुका

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने सदन में घोषणा करते हुए कहा, बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। बस्तर के हर एक गांव में स्कूल खोलने के लिए एक अभियान चलाया गया। इस क्षेत्र के हर गांव में राशन की दुकान खोलने के लिए एक मुहिम शुरू की गई। हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र PHC और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र CHC स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं, और अब उन्हें पांच किलोग्राम अनाज मिल रहा है।

नक्सलवाद की वकालत करने वालों से पूछे सवाल

अमित शाह ने कहा, मैं बस उन लोगों से यह पूछना चाहता हूं, जो यहां नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे। लोगों को अब तक ये लाभ क्यों नहीं मिले। बस्तर के लोग इसलिए पीछे रह गए, इस क्षेत्र पर 'लाल आतंक' का साया मंडरा रहा था, इसीलिए विकास उन तक नहीं पहुंच पाया। आज, वह साया हट गया है, और बस्तर अब विकास के पथ पर अग्रसर है।

70 में से 60 साल तो सरकार कांग्रेस की रही, फिर क्यों विकास नहीं हुआ। आपने क्यों नहीं किया विकास आज आप हिसाब मांग रहे हो। मैं पूरा बताऊंगा। वहां करोड़ों लोग गरीबी में वर्षों तक जीते रहे, किसी ने चिंता नहीं की। 20 हजार युवा मारे गए, कई दिव्यांग बन गए और उन तक विकास नहीं पहुंचा। कौन जिम्मेदार है। क्या देश की सबसे बड़ी पंचायत को इस पर चिंतन नहीं करना चाहिए। नक्सलवाद का मूल कारण विकास की डिमांड नहीं, एक आइडियोलॉजी है, जिसे एक राष्ट्रपति चुनाव के कारण इंदिरा गांधी ने स्वीकार कर लिया।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकारा था कि जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा में सबसे बड़ी समस्या माओवादी है। 2014 में बदलाव हुआ। धारा 370 हटी, 35-ए हटा, राम मंदिर बना, सीएए का कानून आ गया है, विधायी मंडलों में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल गया है। ये सारे काम नरेंद्र मोदी के 12 साल में हुए।

इनके आदर्श माओ हैं। ये आदर्श भी फॉरेन से लाते हैं

विपक्ष का लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है। यहां बहुत सारे लोग 3 घंटे से कह रहे हैं अन्याय है तो न्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन लड़ने का तरीका क्या है। हम अंग्रेजों के शासन में नहीं है कुछ लोगों ने भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा से तुलना कर दी । ये क्या हिमाकत है। भगत सिंह और बिरसा मुंडा अंग्रेजों से लड़े और आप इनकी तुलना संविधान तोड़कर हथियार हाथ में लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों से कर रहे हैं। इनको अपनों का भी खून बहाने से परहेज नहीं है। इनके आदर्श तिलका मांझी, बिरसा मुंडा, सुभाष बाबू या भगतसिंह नहीं हैं। इनके आदर्श माओ हैं। ये आदर्श भी फॉरेन से लाते हैं।

गृह मंत्री ने कहा- नक्सली हिंसा करने वालों के दिन लद गए हैं

अमित शाह ने कहा, नक्सलियों के पास से जो हथियार पकड़े गए वो पुलिस से लूटे गए थे। उन हथियारों से महिलाओं, बच्चों, निर्दोष जवानों और किसानों को मारा गया। वामपंथी विचारधारा ने इसको प्रोपेगैंडा के माध्यम से एक भ्रम की तरह फैलाया। उन्होंने अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए कहा कि अन्याय से बचने के लिए हथियार हाथ में उठाए।

शाह ने कहा- मैं फिर से पूछना चाहता हूं कि राज्य शासन और संविधान की वैधता को किसी भी अन्याय के एवज में चुनौती दी जा सकती है क्या। अन्याय के खिलाफ लड़ने का हमारे संविधान ने रास्ता बनाया। राजकुमार राउत यहां बैठे नहीं तो वो भी सरेंडर की लिस्ट में होते अगर हाथ में हथियार लिया होता।

शाह ने कहा, वामपंथियों ने वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया। संविधान का, सारी व्यवस्था नष्ट करके शासन का, स्टेट का, पुलिस थानों को जलाकर सुरक्षा का वैक्यूम खड़ा किया है। लेकिन अब माओवादी हिंसा करने वालों का, नक्सली हिंसा करने वालों के दिन लद गए है।

अमित शाह ने कहा, ये डरने वाली सरकार नहीं, न्याय करने वाली सरकार है

गृह मंत्री ने कहा, अगर विकास, प्रति व्यक्ति आय पैमाना होता तो देश के बहुत सारे हिस्से थे जहां 70 के दशक में विकास नहीं पहुंचा था। वहां नक्सलवाद क्यों नहीं पहुंचा। कांग्रेस के इस विचार को सदन से खारिज करता हूं कि अन्याय किसी के साथ भी हो सकता है। विकास कम ज्यादा हो सकता है। हम संवैधानिक तरीके से लड़ाई लड़ेंगे या हाथ में हथियार लेकर निर्दोषों को मार डालेंगे। किस थ्योरी का यहां से समर्थन कर रहे हैं।

हथियार हाथ में उठा लेना लोकतांत्रितक तरीका नहीं है

शाह ने कहा, किसी के भी साथ अन्याय हो तो हथियार हाथ में उठा लेना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। अगर आप धमकाना चाहते हैं तो ये डरने वाली सरकार नहीं है। सबके साथ न्याय करने वाली सरकार है। संविधान ने हर चीज की व्यवस्था की है।

शाह ने आगे कहा- मैं इस देश को युवाओं को नक्सलवाद की टाइमलाइन बताना चाहता हूं। 1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत नक्सलवाड़ी, बंगाल से हुई। वहां 1971 में एक साल के दौरान 3620 हिंसा की घटनाएं वहां हुईं। 80 का दशक आते-आते पीपल्स वॉर ग्रुप बन गया और महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा में फैले।

अमित शाह ने कहा, 1990 के दशक में दुनियाभर में जैसे वामपंथी विचारधारा सिमटती गई। यहां भी उग्रवादी गुटों और वामपंथियों पार्टियों में विलय हुआ और 2004 में 2 प्रमुख गुट मिल गए और सीपीआई माओवादी का गठन किया। 70 से 2004 तक चार साल छोड़कर पूरे साल कांग्रेस का शासन था। कब माओवादी विचारधारा फैली पनपी आपको याद रखना चाहिए।

आदिवासी इलाकों में नक्सलवाद के कारण गरीबी रही

गृह मंत्री ने कहा, आदिवासी इलाकों में गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला बल्कि नक्सलवाद के कारण सालों तक गरीबी रही। नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और विकास से जुड़ी नहीं हैं। ये वैचारिक हैं। नरेंद्र मोदी के शासन में आदिवासी इलाकों में विकास घर-घर पहुंच रहा है। मैं चार क्षेत्र के बारे में बताना चाहता हूं। नक्सलवाड़ी में साक्षरता का दर 35%, बस्तर में 23%, सहरसा 33%, और बलिया में 31% है। चारों स्थानों पर साक्षरता का दर कमोबेश समान था। प्रति व्यक्ति आय नक्सलवाड़ी में 500 रुपए, बस्तर में 190 रुपए, सहरसा में 299 रुपए और बलिया में 374 रुपए थी। आय भी समान थी लेकिन नक्सलवाड़ी और बस्तर में वामपंथी उग्रवाद पनपा लेकिन सहरसा और बलिया में नहीं। सहरसा और बलिया की भूगोल उनके अनुकूल नहीं थी। वहां जंगल नहीं थे। छिपने के लिए नदी-नाले और पहाड़ी नहीं थीं। हथियार लेकर मूवमेंट करने का, आदिवासियों को दबाने का, उनको जबरदस्ती अपनी विचारधारा से जोड़ने की अनुकूलता नहीं थी।

वामपंथियों ने आदिवासियों के स्कूल, बैंक, दवाखाने जलाए

शाह ने कहा, मुझे एक बात समझ में नहीं आई कि जो आदिवासी 15 अगस्त 1947 से पहले बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, रानी दुर्गावती, मुर्मू बंधुओं को हीरो मानता था। वो 1970 आते-आते माओ को हीरो मानने लगा। ये परिवर्तन विकास और अन्याय के कारण नहीं हुआ। कठिन भूगोल और स्टेट की पहुंच न होने से वामपंथियों ने अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए आदिवासी क्षेत्र को चुना और भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाना चालू किया।

वामपंथियों ने आदिवासियों को अपनी विचारधारा का अनुयायी बनाया। उन्हें लगा कि ये पढ़-लिख गए तो हमारे साथ नहीं रहेंगे। इसलिए इनके स्कूल, बैंक, दवाखाने जला दिए और फिर कहा कि यहां विकास नहीं पहुंचा।

आदिवासियों के जरिए सत्ता हासिल करना नक्सल विचारधारा का मकसद

अमित शाह ने कहा-, ये जो बड़ी घटना देश में आकार लेने जा रही है उसका श्रेय CAPF खासकर कोबरा, CRPF के जवान और छत्तीसगढ़ पुलिस और वहां के स्थानीय आदिवासी बाशिंदों को जाता है। यहां पर वामपंथी उग्रवाद समाप्त होने जा रहा है। इसमें वहां की जनता का भी बहुत बड़ा हाथ है। जो हजारों युवा मारे गए, जो जवान शहीद हो गए उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं।

गृह मंत्री ने कहा- नक्सलियों की विचारधारा का विकास से कोई लेना-देना नहीं है। जब हम आजाद हुए हमने कहा ‘सत्यमेव जयते’। सत्य की हमेशा विजय हो। इनका ध्रुव वाक्य है- सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। यहां सत्ता शब्द का संबंध अपनी विचारधारा की विजय के लिए है। विचारधारा को आदिवासियों में फैलाकर सत्ता हासिल करने के लिए है। यहां विकास की कोई बात नहीं है।

नक्सलवाद का मूल कारण विकास नहीं, एक विचारधारा है

अमित शाह ने कहा, सरकार ने ढेर सारी योजनाएं बनाईं लेकिन आपने (कांग्रेस) उन्हें इम्प्लीमेंट नहीं करने दिया। 12 राज्यों में रेड कॉरिडोर था। वहां कानून का शासन नहीं था। 12 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे थे। किसी ने चिंता नहीं की। हजारों युवाओं की मौत हुई। एक NGO के मुताबिक, 20 हजार युवा मारे गए। लोग दिव्यांग हो गए। उन तक विकास नहीं पहुंचा।

शाह ने कहा- इन सबके लिए कौन जिम्मेदार है। नक्सलवाद का मूल कारण विकास की डिमांड नहीं, एक विचारधारा है। राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए 1970 से इंदिरा गांधी ने स्वीकार कर लिया कि वामपंथी विचारधारा के कारण नक्सलवाद फैला। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकारा था कि जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा में सबसे बड़ी समस्या माओवादी है।

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