हाई कोर्ट ने कहा, यह तो अदालत को डराने की कोशिश की है, पढ़िए हाई कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा, दूसरे कोर्ट में मामला ट्रांसफर करने क्यों दिया निर्देश?
Bilaspur High Court: एक मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा, इस तरह का वाकया तो अदालत को डराने की कोशिश है।
इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News
बिलासपुर। 03 मार्च 2026| एक मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा, इस तरह का वाकया तो अदालत को डराने की कोशिश है। जिला अदालत द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट ने पूरे मामले काे गंभीर मानते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ जमानत वारंट जारी किया था। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को मामला दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया है।
अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अनुशासन और न्यायिक मर्यादा को सर्वापरि बताया है। दायरा लांघने वालों को कड़ी हिदायत दी है। दो पक्षकारों ने कोर्ट कैम्पस में सुसाइड कर लेने की धमकी दी थी। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षकारों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था। दोनों पक्षकारों ने निचली अदालत में लिखित रूप से खेद जताया था। मौखिक रूप से तर्क देते हुए कहा, वे केवल क्षमा मांग रहे हैं माफी नहीं।
पढ़िए क्या है मामला?
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा के कोर्ट में चेक बाउंस के मामले में गजेंद्र सिंह का मामला चल रहा है। बलौदाबाजार के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने हाई कोर्ट को एक शिकायत भेजी थी। शिकायत में बताया, दोनों अभियुक्तों ने अदालत की कार्यवाही में व्यवधान डालने के अलावा पीठासीन अधिकारी को एक लिखित नोटिस भी दिया। इस नोटिस में पीठासीन अधिकारी के विरुद्ध बेहद अपमानजनक, अभद्र और मानहानि करने वाले आरोप लगाए गए थे।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
जिला एवं सत्र न्यायाधीश की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने पूरे मामले को संज्ञान में लिया। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, आरोपियों का यह कृत्य सीधैतौर पर आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हालांकि बाद में दोनों ने कोर्ट से माफी मांग ली। पीठासीन अधिकारी ने हाई कोर्ट को भेजी जानकारी में बताया, गजेंद्र सिंह ने कोर्ट में कहा- हम क्षमा मांग रहे हैं, माफी नहीं मांग रहे हैं। माफी अपनी गलती की मांगी जाती है और क्षमा अपने से बड़ों से मांगी जाती है। इसके अलावा यह भी धमकी दी कि हमें न्याय नहीं मिला तो हम गाड़ी से पेट्रोल निकालकर सिमगा कोर्ट परिसर में सुसाइड कर लेंगे।
हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने डीजे से ये कहा
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षकारों के इस व्यवहार को अदालत की गरिमा के विपरीत माना है। डिवीजन बेंच ने कहा कि अवमाननाकर्ता को अपने आचरण पर पछतावा नहीं है, इनके आचरण से ऐसा लगता है कि कोट को डराने का प्रयास कर रहे हैं। डिवीजन बेंच ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश जारी किया है, प्रकरण को जेएमएफसी कोर्ट से दूसरी अदालत में ट्रांसफर कर दें।