CG Cyber Fraud: SBI मैनेजर को साइबर ठगों ने दिया झांसा, बैंक से उड़ाए 17 लाख, 14 लाख की निकासी रोकी गई

स्टेट बैंक के मैनेजर को सायबर ठगों ने फोन कर झांसे में लिया और व्हाट्सएप में एक फर्जी लेटर पैड भेज 17 लाख 52 हजार रुपए बैंक से एनईएफटी करवा ली। ठगी की जानकारी लगने पर खाते को होल्ड कर 14 लाख रुपए निकासी से बचाए गए।

Update: 2025-08-15 05:51 GMT

CG Cyber Fraud

CG Cyber Fraud: रायपुर। राजधानी के रामसागरपारा स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) शाखा में साइबर ठगों ने फिल्मी अंदाज में ठगी की वारदात को अंजाम दिया। महज कुछ मिनटों के भीतर फर्जी लेटरपैड और मोबाइल कॉल के जरिये बैंक से 17 लाख 52 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए। घटना सामने आने पर बैंक प्रबंधन में हड़कंप मच गया और तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी है।

ठगी की शुरुआत ऐसे हुई-

पुलिस के मुताबिक, शाखा प्रबंधक आशुतोष कुमार (निवासी गिरिडीह, झारखंड) को 8 अगस्त को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पूर्व शाखा प्रबंधक कार्तिक राउत बताया और कहा कि कृष्णा बिल्डर्स के डायरेक्टर सुनील तापड़िया बैंक के पुराने और भरोसेमंद ग्राहक हैं। कॉलर ने मैनेजर से कहा कि यदि सुनील तापड़िया का फोन आए, तो उनकी मदद करें।

दूसरी कॉल और फर्जी लेटरपैड-

इसके बाद 11 अगस्त को शाखा प्रबंधक को सुनील तापड़िया के नाम से दोबारा कॉल आया। कॉलर ने खुद को रजिस्ट्री ऑफिस में व्यस्त बताते हुए व्हाट्सऐप पर एक फर्जी लेटरपैड भेजा, जिस पर कृष्णा बिल्डर्स का नाम और एनईएफटी ट्रांजैक्शन डिटेल लिखी थी। इसमें राजस्थान निवासी सरफराज अंसारी के खाते में 17 लाख 52 हजार रुपये ट्रांसफर करने का अनुरोध था। लेटरपैड देखकर और कॉलर की बातों पर भरोसा करते हुए शाखा प्रबंधक ने बिना किसी पुष्टि के राशि ट्रांसफर कर दी।

14 लाख रुपये खाते में होल्ड, 3 लाख निकल गए-

राशि ट्रांसफर होते ही ठगों ने तेजी दिखाते हुए रकम में से 3 लाख रुपये तुरंत निकाल लिए। बैंक को जैसे ही शक हुआ, उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। तत्काल प्रयासों से खाते में बाकी बचे 14 लाख रुपये को होल्ड कर लिया गया, जिससे पूरी राशि निकलने से बच गई।

15 मिनट में खुला फर्जीवाड़ा-

राशि ट्रांसफर होने के लगभग 15 मिनट बाद असली सुनील तापड़िया का फोन शाखा प्रबंधक के पास आया। उन्होंने किसी भी लेन-देन से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने बैंक से कोई रकम ट्रांसफर करने का अनुरोध नहीं किया है। वे तुरंत बैंक पहुंचे और बताया कि लेटरपैड और मोबाइल नंबर दोनों फर्जी हैं। इस खुलासे के बाद बैंक अधिकारियों को समझ आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।

पुलिस जांच जारी-

मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और साइबर अपराध का मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और फर्जी लेटरपैड के तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। साथ ही सरफराज अंसारी के बैंक खाते की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि ठगों तक पहुंचा जा सके।

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