Bilaspur High Court: कर्मचारियों की खबर: सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट को बताया, नियमित हो चुके हैं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी

Bilaspur High Court: गुरुघासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय के दैवेभो कर्मचारियों को नियमित करने के मामले में अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आज विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश पेश कर बताया कि दैनिक वेतन भोगियों को पहले से नियमित कर दिया गया है। यूनिवर्सिटी के जवाब के बाद हाई कोर्ट ने 24 अप्रैल तक अन्य परिणामी लाभ याचिकाकर्ताओं को देने का निर्देश यूनिवर्सिटी को दिया है।

Update: 2026-02-19 04:27 GMT

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बिलासपुर 19 फरवरी 2026, गुरुघासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय के दैवेभो कर्मचारियों को नियमित करने के मामले में अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आज विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश पेश कर बताया कि दैनिक वेतन भोगियों को पहले से नियमित कर दिया गया है। यूनिवर्सिटी के जवाब के बाद हाई कोर्ट ने 24 अप्रैल तक अन्य परिणामी लाभ याचिकाकर्ताओं को देने का निर्देश यूनिवर्सिटी को दिया है।

गुरु घासीदास केंद्रीय विवि में वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश 22 अगस्त 2008 के अनुसार तत्कालीन कुलपति प्रो एलएम मालवीय ने एक आदेश जारी कर 26 अगस्त 2008 को नियमित कर दिया था। इससे पूर्व विवि कार्य परिषद की बैठक में भी 22 जुलाई 2008 को कर्मचारियों को नियमित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इस कार्रवाई से पहले ही राज्य शासन 5 मार्च 2008 को तृतीय व चतुर्थ वर्ग कर्मियों को नियमित करने एक सर्कुलर जारी कर दिया था।

15 जनवरी 2009 को केंद्र सरकार ने गुरुघासीदास विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान कर दिया। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी में केन्द्रीय विवि एक्ट 2009 को लागू करते हुए प्रभावशील कर दिय। एक्ट लागू होने के साथ ही यह शर्त भी लागू कर दी गई केन्द्रीय विवि में कार्य करते रहेंगे। सेवा शर्तों को बिना राष्ट्रपति की अनुमति के बदला नहीं जायेगा।

मार्च 2009 में विवि ने नियमितिकरण का पुराना आदेश निरस्त कर कर्मियों को दैनिक वेतन भोगी का ही वेतन मान देने का निर्णय लिया। विवि प्रशासन के इस निर्णय को चुनौती देते हुए मो हारून , मेलाराम व अन्य दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने अधिवक्ता दीपाली पाण्डेय के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

सिंगल बेंच ने पक्ष में दिया आदेश

याचिका की सुनवाई के बाद जस्टिस रजनी दुबे ने माना कि, यह कर्मचारी 10 साल से भी अधिक समय से काम कर रहे हैं] इनका नियमितिकरण का आदेश राज्य शासन ने विवि के रिक्त पदों के आधार पर ही किया है। इसके साथ ही बेंच ने समस्त लाभ देने का आदेश देते हुए याचिकाकर्ता कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया था।

सिंगल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच में दी थी चुनौती

सिंगल बेंच के फैसले को यूनिवर्सिटी ने चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में याचिका दायर की थी। डिवीजन बेंच से याचिका खारिज होने के बाद यूनिवर्सिटी ने चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। एसएलपी निरस्त होने के बाद यूनिवर्सिटी ने रिव्यू पिटिशन दायर किया था। याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी के रिव्यू पिटिशन को खारिज कर दिया था।

इसी मामले में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी धन्नू पांडेय व अन्य ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर न्यायालयीन आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की थी।मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट प्रकाश तिवारी ने कोर्ट के समक्ष पक्ष रखा। यूनिवर्सिटी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने

16 फरवरी का आदेश पेश किया , जिसमें बताया है, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को पिछली तारीख 26 अगस्त 2008 से नियमित किया गया है। इन सबके परिणामिक लाभों के लिए यूजीसी और केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय से परामर्श मांगने की जानकारी कोर्ट को दी। कोर्ट ने पूछा, कर्मचारियों को नियमित कर दिया है, शेष बचे देयकों और परिणामिक लाभ कब देंगे।

कोर्ट के सवाल पर यूनिवर्सिटी ने समय मांगा और बताया कि यूजीसी और केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय से निर्देश मिलते ही सारी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हाई कोर्ट ने सभी याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को निर्देशित किया है, 24 अप्रैल तक कर्मचारियों को परिणामिक लाभ प्रदान करे।

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