Bilaspur High Court: पेंशन को लेकर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, मृतक कर्मचारी के पिता को मिल रहा पेंशन....
Bilaspur High Court: पेंशन को लेकर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
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14 फरवरी 2026|बिलासपुर। जशपुर निवासी फिलिसिता लाकरा ने अपने अधिवक्ता आशीष बेक, अधिवक्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पति की मृत्यु के बाद पेंशन की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का बेटा इग्नेशियस लकरा छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की 10वीं बटालियन में पुलिस कांस्टेबल थे। 11 दिसंबर2002 को पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में याचिकाकर्ता का पुत्र 21 वर्ष की कम उम्र में शहीद हो गया था। शहीद होने के बाद पिता को पेंशन मिल रहा था। पिता की मृत्यु के बाद पेंशन बंद कर दिया गया है।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा, छत्तीसगढ़ पुलिस कर्मचारी वर्ग असाधारण परिवार निर्वृत्ति वेतन नियम 1965 मृतक पुलिस कर्मियों की माता के साथ मृतक के पिता की मृत्यु के बाद असाधारण पारिवारिक पेंशन प्रदान करने के संबंध में किए गए भेदभाव के कारण अल्ट्रा वायर्स है।" याचिकाकर्ता ने राज्य शासन द्वारा 13 दिसंबर 2021और 20 दिसंबर 2021 के विवादित आदेशों को रद्द करने की मांग की थी। याचिका में मांग की थी कि राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों को परमादेश के रूप में आदेश पारित करे, जिसमें उन्हें मृतक पुलिस कर्मियों की माताओं और गैर-पुलिस सरकारी कर्मचारियों की माताओं के बीच भेदभावपूर्ण कानून में सुधार करने का निर्देश दिया जाए।
क्या है मामला
याचिकाकर्ता स्व इग्नेशियस लकरा की माता हैं, जो सूरजपुर स्थित छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की 10वीं बटालियन में पुलिस कांस्टेबल थे। 11 दिसंबर2002 को पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में याचिकाकर्ता के पुत्र इग्नेशियस लकरा 21 वर्ष की कम उम्र में शहीद हो गए। उनके परिवार में उनके पिता लोबिन लकरा, माता (यानी याचिकाकर्ता), एक बड़ा भाई और दो बहनें हैं। शहीद इग्नेशियस लकरा के पिता लोबिन लकरा को पुत्र की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन मिल रही थी। लेकिन लोबिन लकरा का भी 23- अगस्त 2020 को देहांत हो गया। अपनी मृत्यु से पहले, लोबिन लकरा को भारतीय स्टेट बैंक की कुनकुरी शाखा के माध्यम से जिला-जशपुर के कोषागार कार्यालय से पेंशन मिल रहा था। लोबिन लकरा की मृत्यु के बाद, याचिकाकर्ता ने पति लोबिन लकरा की मृत्यु के बारे में अधिकारियों को सूचित किया और पारिवारिक पेंशन उन्हें दिए जाने का अनुरोध किया। 27 नवंबर.2020 को, कमांडेंट, 10 वीं बटालियन, सीजीएपी, सूरजपुर ने कोषाधिकारी, जिला जशपुर को लोबिन लकरा की मृत्यु के बारे में सूचित करते हुए एक पत्र भेजा और कोषाधिकारी से याचिकाकर्ता को पेंशन के वितरण के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा। कोषागार अधिकारी, अंबिकापुर, जिला सूरजपुर द्वारा जारी 06 फरवरी 2021 का पत्र प्राप्त हुआ जिसमें कहा गया था कि पेंशन भुगतान आदेश पीपीओ. खाते में याचिकाकर्ता का नाम नामांकित व्यक्ति के रूप में दर्ज नहीं है और याचिकाकर्ता को इस संबंध मे कमांडेंट, 10वीं बटालियन, सीजीएएफ, सूरजपुर के कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी गई है। याचिकाकर्ता ने अपनी पेंशन के संबंध में कमांडेंट, 10वीं बटालियन, सीजीएएफ, सूरजपुर के कार्यालय से संपर्क किया और उन्हें सूचित किया कि कार्यालय ने संबंधित जानकारी और दस्तावेज पहले ही कोषागार अधिकारी, अंबिकापुर जिला-सूरजा के कार्यालय को भेज दिए हैं।
कमांडेंट ने कहा: उत्तराधिकारी को पारिवारिक पेंशन प्रदान करने का कोई निर्देश नहीं
हाई कोर्ट के 27.अक्टूबर.2021 के आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद,कमांडेंट, 10वीं बटालियन द्वारा 13.दिसंबर 2021 का विवादित आदेश पारित किया गया, जिसमें कहा गया है कि पारिवारिक पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद, छत्तीसगढ़ पुलिस कर्मचारी वर्ग असाधारण परिवार निर्वृत्ति पेंशन नियम 1965 के तहत उनके उत्तराधिकारी को पारिवारिक पेंशन प्रदान करने का कोई निर्देश नहीं है। इसके बाद, 20.दिसंबर 2021 के पत्र द्वारा डायरेक्टर डायरेक्टोरेट ऑफ़ ट्रेजरी, अकाउंट्स एंड पेंशन ने याचिकाकर्ता को सूचना दी। पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद, छत्तीसगढ़ पुलिस कर्मचारी वर्ग असाधारण परिवार निर्वृत्ति पेंशन नियम 1965 के तहत उनके उत्तराधिकारी को पारिवारिक पेंशन प्रदान करने का कोई निर्देश नहीं है। याचिकाकर्ता पारिवारिक पेंशन के भुगतान के लिए पात्र नहीं है।
अधिवक्ता ने कहा, 1965 के नियम मनमाने, अनुचित और भेदभावपूर्ण हैं
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा, छत्तीसगढ़ पुलिस कर्मचारी वर्ग असाधारण परिवार निर्वृत्ति पेंशन नियम 1965 भेदभावपूर्ण है, क्योंकि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (असाधारण पेंशन) नियम 1963 में यह प्रावधान है कि मृतक कर्मचारी के पिता को स्वीकृत पेंशन, उनकी मृत्यु के बाद, माता को देय होगी। 1963 के नियमों की अनुसूची III के नोट 6 में कहा गया है कि नोट 5 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, इन नियमों के तहत पिता को स्वीकृत पेंशन, उनकी मृत्यु के बाद, माता को देय होगी। 1965 के नियमों को पूर्ववर्ती 1963 के नियमों का अनुसरण करना चाहिए, लेकिन मृतक कर्मचारी की माता को (पिता की मृत्यु के बाद) प्राप्त होने वाली पारिवारिक पेंशन के संबंध में 1965 के नियम मनमाने, अनुचित और भेदभावपूर्ण हैं। मध्य प्रदेश सरकार के तत्कालीन वित्त विभाग द्वारा दिनांक 10.09.1965 को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि 1965 के नियम 1963 के नियमों के अनुपालन में बनाए गए हैं। इसलिए, 1965 के नियमों से कोई भी विचलन, जो अनुचित और भेदभावपूर्ण हो, अवैध और असंवैधानिक है। याचिकाकर्ता स्वर्गीय शहीद इग्नेशियस लकरा की माता और कानूनी उत्तराधिकारी हैं, जिनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी, और उन्हें पेंशन से वंचित करना अवैध और मनमाना है।
हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, 1965 के नियम विशेष रूप से पुलिस कर्मियों के लिए, विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उनके उच्च जोखिम वाले कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए थे। जब 1965 के नियमों में इस बात का ध्यान रखा गया है कि यदि मृतक कर्मचारी के पिता को पेंशन मिल रहा है, तो उनकी मृत्यु के बाद मृतक कर्मचारी की माता को पेंशन दी जाएगी, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि 1963 के नियमों में भी इसी प्रकार के प्रावधान होने चाहिए और इस प्रकार, यह न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पांडुरंग गणपति चौगुले मामले में की गई टिप्पणियों के आलोक में, 1965 के नियमों के प्रावधानों को 1963 के नियमों के साथ सामंजस्यपूर्ण बनाने के तरीके से इसकी व्याख्या कर सकता है।
1965 के नियमों के तहत पिता को स्वीकृत पेंशन, उनकी मृत्यु के बाद, माता को देय होगी। अतः याचिकाकर्ता पेंशन प्राप्त करने की पात्र है और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस याचिका में की गई टिप्पणियों के आलोक में याचिकाकर्ता के मामले पर आज से छह सप्ताह की अवधि के भीतर विचार करें और निर्णय लें।