Bilaspur High Court: मेडिकल पीजी प्रवेश: नियम बदले तो एडमिशन खत्म, काउंसलिंग रद्द किए जाने को हाईकोर्ट ने ठहराया सही

Bilaspur High Court: हाई कोर्ट की डीविजन बेंच ने मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

Update: 2026-01-29 03:37 GMT

Bilaspur High Court: बिलासपुर। हाई कोर्ट की डीविजन बेंच ने मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने कहा, छत्तीसगढ़ मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट प्रवेश नियम, 2025 के नियम 11 में किए गए संशोधन के बाद किसी भी स्टूडेंट्स के पास पहले से आवंटित सीट पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं रह जाता है।

नियमों में बदलाव और काउंसलिंग रद्द होने से पुराना एडमिशन मान्य नहीं रह गया है। भिलाई निवासी अनुष्का यादव ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था, उसने मेरिट के आधार पर भिलाई के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में रेडियो डायग्नोसिस की सीट हासिल की थी। 10.79 लाख रुपए फीस सहित 10 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कर एडमिशन लिया था।

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने कहा, काउंसलिंग रद्द करने का निर्णय कोई मनमानी कार्रवाई नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा डॉ. तन्वी बहल मामले में दिए गए आदेश के पालन में उठाया गया कदम था। डोमिसाइल आधारित आरक्षण पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में असंवैधानिक है, और केवल संस्थागत प्राथमिकता को ही एक सीमा तक अनुमति दी जा सकती है। 50 प्रतिशत सीटें पूरी तरह से ओपन मेरिट के आधार पर भरी जा सकें।

अब और कोई अन्य नई याचिका स्वीकार्य नहीं

हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सरकार के फैसले को सही ठहराया। कहा कि जब प्रवेश प्रक्रिया न्यायिक जांच और नियमों के अधीन हो तो प्रोविजनल अलॉटमेंट को अंतिम नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इस मुद्दे पर अब और कोई नई याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी, ताकि प्रवेश प्रक्रिया में अनुशासन और अंतिम रूप सुनिश्चित किया जा सके। इस निर्णय के बाद अब राज्य में पीजी मेडिकल सीटों के लिए नए नियमों के तहत नए सिरे से काउंसलिंग का रास्ता साफ हो गया है।

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