Bilaspur High Court: कर्मचारियों की खबर: समान ग्रेड पे वाले पदों के बीच स्थानांतरण को पदोन्नति नहीं माना जा सकता, हाई कोर्ट ने कहा...

Bilaspur High Court: बिलासपुर हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि समान ग्रेड पे वाले पदों के बीच स्थानांतरण को प्रमोशन नहीं माना जा सकता। कर्मचारियों को मैकप लाभ देना होगा। हाई कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के फैसले को बरकरार रखते हुए रेलवे की याचिका खारिज कर दी है।

Update: 2026-01-11 10:14 GMT

Bilaspur High Court: बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि समान ग्रेड पे वाले पदों के बीच स्थानांतरण को प्रमोशन नहीं माना जा सकता। कर्मचारियों को मैकप लाभ देना होगा। हाई कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के फैसले को बरकरार रखते हुए रेलवे की याचिका खारिज कर दी है।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, कर्मचारियाें का ग्रेड पे 4200 रुपये पर स्थिर रहा। इस दौरान हुए पद परिवर्तन को प्रमोशन नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा, समान ग्रेड पे पद वाले कर्मचारियों के बीच स्थानांतरण प्रशासनिक व आंतरिक व्यवस्था है,इसे पदोन्नति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे पदोन्नति नहीं कहा जा सकता। ऐसे स्थानांतरण से कर्मचारियों को ना तो वित्तीय लाभ मिलता है और ना ही पदानुक्रम में बढ़ोतरी होती है। याचिका की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे व जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को यथावत रखते हुए रेलवे की याचिका को खारिज कर दिया है।

कर्मचारी की वर्ष 1995 में SECR दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में सहायक लोको पायलट के पद पर नियुक्त हुई थी। इसके बाद उन्हें सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट और फिर लोको पायलट (मालगाड़ी) के पद पर पदोन्नति दी गई। जिसमें 4200 रुपये का ग्रेड पे था। सेवा में ठहराव को दूर करने के उद्देश्य से लागू मैकप योजना के तहत रेलवे प्रशासन ने वर्ष 2016 में उन्हें पहला वित्तीय उन्नयन प्रदान किया। इसके बाद कर्मचारियों ने मैकप योजना के अंतर्गत एक और वित्तीय उन्नयन की मांग की। कर्मचारियों की मांग को रेलवे प्रशासन ने खारिज कर दिया। रेलवे प्रशासन का कहना था कि पहले ही अपने कार्यकाल के दोरान दो प्रमोशन का लाभ ले चुके हैं। रेलवे प्रशासन द्वारा मांग खारिज किए जाने पर कर्मचारियों ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती देते हुए मैकप याेजना का लाभ देने की मांग की। मामले की सुनवाई के बाद अधिकरण ने कर्मचारियों को मैकप योजना का लाभ देने रेलवे को निर्देशित किया। अधिकरण के फैसले को चुनौती देते हुए रेलवे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। रेलवे ने अपनी याचिका में कहा कि कर्मचारियों को दो पदोन्नति का लाभ मिल चुका है और मैकप योजना से भी लाभान्वित हो चुके हैं,लिहाजा अब उन्हें मैकप योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता।

हाई कोर्ट ने खारिज की रेलवे की याचिका

मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने रेलवे की याचिका को खारिज कर दिया है। बेंच ने साफ कहा, कर्मचारियों का ग्रेड पे 4200 रुपये पर स्थिर रहा और इस दौरान हुए पद परिवर्तन को पदोन्नति नहीं माना जा सकता। डिवीजन बेंच ने कहा कि समान ग्रेड पे वाले पदों के बीच परिवर्तन मात्र प्रशासनिक व्यवस्था है, इससे न तो कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिलता है और न ही पदानुक्रम में कोई वास्तविक वृद्धि होती है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को सही ठहराते हुए कर्मचारियों को मैकप योजना के तहत अतिरिक्त वित्तीय उन्नयन देने के निर्देश को बरकरार रखा। डिवीजन बेंच ने रेलवे की याचिका को खारिज कर दिया है।

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