Bilaspur High Court: कर्मचारियों की खबर: हाई कोर्ट के फैसले से SECR के इन कर्मचारियों को मिली राहत

Bilaspur High Court: हाई कोर्ट के फैसले से SECR में काम करने वाले एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवार को राहत मिली है। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा...

Update: 2026-01-24 06:52 GMT

Bilaspur High Court: बिलासपुर। हाई कोर्ट के फैसले से SECR में काम करने वाले एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवार को राहत मिली है। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, चयन समिति की तकनीकी गलतियों का खामियाजा निर्दोष कर्मचारी नहीं भुगत सकते। बता दें कि याचिकाकर्ता कर्मचारी बीते एक दशक से भी अधिक समय से रेलवे में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

याचिकाकर्ता कर्मचारी बीते 13 साल से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में काम कर रहे हैं। चयन समिति की तकनीकी खामियों के चलते इनके बाहर होने का खतरा पैदा हो गया था। परेशान कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई थी। याचिका की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे व जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच के फैसले से SECR में कार्यरत कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। इन कर्मचारियों को चयन सूची में बदलाव का हवाला देते हुए रेलवे अफसर नौकरी से बाहर कर रहे थे। याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि चयन समिति की तकनीकी गलतियों का खामियाजा निर्दोष कर्मचारी नहीं भुगत सकते, जो एक दशक से अधिक समय से निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

क्या है मामला

रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2012 में अधिसूचना जारी कर सीनियर पाथ वे सुपरवाइजर के 17 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। वर्ष 2013 में चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुरेंद्र कुमार कौशिक, कृष्ण कुमार समेत अन्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई थी। नियुक्ति के बाद चयन के लिए तय किए गए मापदंड व अतिरिक्त अंक देने को लेकर विवाद की स्थिति बनी। विवाद को देखते हुए मामला केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण कैट पहुंचा। मामले की सुनवाई के बाद कैट ने रेलवे के पक्ष में आदेश पारित किया। कैट के आदेश के बाद 2016 में संशोधित चयन सूची जारी की गई। रेलवे द्वारा नए सिरे से जारी संशोधित सूची में एक दर्जन से ज्यादा कर्मचारियों के नाम बाहर कर दिए गए। चयन समिति और रेलवे के निर्णय को चुनौती देते हुए प्रभावित कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता कर्मचारियों ने अपनी याचिका में कहा कि वे सभी लोग 2013 से लगातार कार्य करते आ रहे हैं। उनकी नियुक्ति में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है।

हाई कोर्ट ने कहा: यह अन्याय होगा

डि वीजन बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता कर्मचारी पूरी तरह निर्दोष हैं,मूल्यांकन में तकनीकी गड़बड़ी चयन समिति ने की थी। चयन समिति की गलती का खामियाजा कर्मचारी क्यों भुगते। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए डिवीजन बेंच ने कहा, याचिकाकर्ता कर्मचारी बीते 13 वर्षों से लगातार काम करते आ रहे हैं। लंबे अरसे बाद इनको नौकरी से हटाना अन्याय होगा। कर्मचारियों को नौेकरी से हटाने से उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट उठ खड़ा होगा। डिवीजन बेंच ने रेलवे से कहा कि याचिकाकर्ताओं को संशोधित मेरिट लिस्ट में शामिल करें। पुराने और नए उम्मीदवारों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए याचिकाकर्ताओं को वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे स्थान देने का निर्देश दिया है।

Tags:    

Similar News