Bilaspur High Court: निगम कमिश्नर की अपील हाई कोर्ट ने की खारिज, कर्मचारी को मिली राहत, जानिए HC ने क्यों कहा- उदारता के आधार पर विलंब को क्षमा नहीं किया जाना चाहिए

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर नगर निगम के दमकलकर्मी को हाई कोर्ट के इस फैसले से राहत मिली है। दमकल कर्मी के नियमितिकरण को लेकर हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले को निगम आयुक्त ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने तय अवधि से 121 दिनों विलंब से दायर अपील को खारिज कर दिया है।

Update: 2026-01-22 11:35 GMT

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Nigam Kamishnar Ki Apil kharij: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर नगर निगम के दमकलकर्मी को हाई कोर्ट के इस फैसले से राहत मिली है। दमकल कर्मी के नियमितिकरण को लेकर हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले को निगम आयुक्त ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने तय अवधि से 121 दिनों विलंब से दायर अपील को खारिज कर दिया है।

मामले की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, तय समयाविध से अधिक विलंब से दायर की गई अपील को खारिज कर दिया है। 121 दिनों के विलंब को माफ नहीं किया जा सकता। डिवीजन बेंच ने कहा,उदारता के आधार पर विलंब को क्षमा नहीं किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता निगम आयुक्त की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता रणबीर सिंह मरहास ने रिट अपील दायर करने में हुई 121 दिनों की देरी को माफ करने के लिए आवेदन किया था। निगम कर्मी गिरीश शर्मा की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता मनोज कुमार सिन्हा ने विलंब को माफ ना करने और अपील को खारिज करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मरहास ने कहा कि यह अपील हाई कोर्ट के सिंगल बेंच द्वारा 30 अप्रैल 2025 को पारित आदेश के विरुद्ध दायर की गई है। उन्होंने आगे प्रस्तुत किया कि यद्यपि अपील 14 अक्टूबर 2025 को दायर की गई है, जिसके परिणामस्वरूप निर्धारित समय सीमा से 121 दिन अधिक विलंब हुआ है, यह विलंब न तो जानबूझकर किया गया है और न ही इरादतन। मरहास द्वारा यह प्रस्तुत किया गया है कि 30 अप्रैल 2025 के आदेश की सूचना अपीलकर्ता नगर निगम, बिलासपुर के कार्यालय को उसके वकील के माध्यम से 06 मई 2025 को दी गई थी। इसके बाद, अपीलकर्ता के संबंधित अधिकारी ने 25 मई 2025 को शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग के निदेशक को एक पत्र लिखकर रिक्त पद की उपलब्धता और गिरीश शर्मा के नियमितिकरण के संबंध में जानकारी मांगी।

अधिवक्ता मरहास का यह भी तर्क दिया कि कानूनी राय प्राप्त होने पर, बिलासपुर नगर निगम ने 12 जून 2025 को रिट अपील दायर करने की अनुमति मांगी थी, जो सितंबर 2025 में प्रदान की गई थी। इसके बाद, अपील तैयार करने के लिए संक्षिप्त विवरण एक अन्य वकील को सौंप दिया गया, जिन्होंने 08.09.2025 को अनुमोदन के लिए मसौदा प्रस्तुत किया, और अनुमोदन प्राप्त होने पर, बिना किसी और देरी के वर्तमान अपील दायर की गई।

निगमकर्मी के अधिवक्ता ने विलंब से दायर अपील को खारिज करने की मांग

निगम कर्मचारी गिरीश शर्मा के अधिवक्ता मनोज कुमार सिन्हा ने अपील का विरोध करते हुए कहा कि इसी तरह के मुद्दे पर इस न्यायालय ने 29 जुलाई 2024 के निर्णय द्वारा रिट अपील को पहले ही खारिज कर दिया है। अतः उनका तर्क है कि वर्तमान अपील उपरोक्त निर्णय के अंतर्गत आती है और उसी आधार पर खारिज किए जाने योग्य है।

कोर्ट ने कहा: उदारता के आधार पर विलंब को क्षमा नहीं किया जाना चाहिए

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, इस न्यायालय के अनेक निर्णयों में यह कहा गया है कि उदारता के आधार पर विलंब को क्षमा नहीं किया जाना चाहिए। वास्तविक न्याय प्रदान करने का अर्थ प्रतिपक्षी को हानि पहुंचाना नहीं है। अपीलकर्ता यह सिद्ध करने में विफल रहे हैं कि उन्होंने मामले की पैरवी करने में उचित तत्परता दिखाई और विलंब को क्षमा करने के लिए आवश्यक यह महत्वपूर्ण कसौटी इस मामले में पूरी नहीं होती। उपरोक्त सभी कारणों से, यह अपील अस्वीकृत की जाती है।

अपील दायर करने में 121 दिनों की देरी को माफ नहीं किया जा सकता

डिवीजन बेंच ने कहा, पारित आदेश के विरुद्ध दायर की गई इस रिट अपील में 121 दिनों की अत्यधिक देरी हुई है। यद्यपि अपीलकर्ता ने इस देरी का कारण नियमित प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक कदम बताया है, लेकिन दिया गया स्पष्टीकरण न तो पर्याप्त है और न ही संतोषजनक। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पोस्टमास्टर जनरल और रामकुमार चौधरी तथा अन्य बाद के निर्णयों में निर्धारित सुसंगत कानूनी स्थिति के आलोक में, मात्र विभागीय औपचारिकताएं या नौकरशाही प्रक्रियाएं देरी को क्षमा करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकतीं।

डिवीजन बेंच ने निगम की अपील को किया खारिज

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल ने अपने फैसले में कहा है, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए, और अत्यधिक विलंब के लिए किसी भी तर्कसंगत, संतोषजनक या वास्तविक स्पष्टीकरण के अभाव में, यह न्यायालय इस तरह के असाधारण विलंब को क्षमा करने के लिए अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करने के लिए इच्छुक नहीं है। अपीलकर्ता की ओर से उपस्थित वकील विलंब को उचित ठहराने वाला कोई भी ठोस या वास्तविक कारण प्रस्तुत करने में विफल रहे हैं। परिणामस्वरूप, वर्तमान अपील दायर करने में 121 दिनों के विलंब को क्षमा करने का कोई पर्याप्त कारण नहीं बनता है। लिहाजा विलंब और लापरवाही के आधार पर यह रिट अपील प्रारंभिक चरण में ही खारिज की जाती है।

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