Bilaspur High Court: अवमानना के घेरे में फंसे NIT के डायरेक्टर व रजिस्ट्रार, हाई कोर्ट ने जारी किया अवमानना नोटिस, पढ़िए क्या है मामला

Bilaspur High Court: अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने NIT रायपुर के डायरेक्टर व रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एनआईटी के तत्कालीन रजिस्ट्रार डा आरिफ खान ने अधिवक्ता हमीदा सिद्धीकी के माध्यम से हाई कोर्ट में डायरेक्टर व रजिस्ट्रार के खिलाफ न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की है।

Update: 2026-01-14 07:20 GMT

Bilaspur High Court:  बिलासपुर। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने NIT रायपुर के डायरेक्टर व रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एनआईटी के तत्कालीन रजिस्ट्रार डा आरिफ खान ने अधिवक्ता हमीदा सिद्धीकी के माध्यम से हाई कोर्ट में डायरेक्टर व रजिस्ट्रार के खिलाफ न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की है।

डॉ आरिफ खान 2021 में एनआईटी रायपुर में रजिस्ट्रार के पद पर पदस्थ हुए थे। रजिस्ट्रार की नियुक्ति नियमानुसार 5 वर्ष के लिए होती है। प्रति वर्ष परफॉर्मेंस रिव्यू के जरिए कार्यकाल आगे बढ़ाया जाता है। याचिकाकर्ता डॉ आरिफ खान ने अपनी याचिका में बताया है कि बेदाग कार्यकाल के बावजूद बिना कोई कारण बताए निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए डॉ आरिफ ने अधिवक्ता हमीदा सि‌द्धि के माध्यम से 2023 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता डा खान को कश्मीन यूनिवर्सिटी से फाइनेंस अफसर के लिए ऑफर आया। इसे स्वीकार करते हुए डॉ खान ने कश्मीर यूनिवर्सिटी में फाइनेंस अफसर के पद पर ज्वाइनिंग दी और कार्य करते रहे। 2025 में बिलासपुर हाई कोर्ट ने डॉ खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनआईटी द्वारा निलंबन आदेश को अवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता डॉ खान को यह आप्श्न दिया कि वे चाहे तो अपने वर्तमान पद पर कश्मीर यूनिवर्सिटी में काम कर सकते हैं या फिर एनआईटी रायपुर में रजिस्ट्रार का पद पुन: ग्रहण करें।

हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद डॉ आरिफ खान ने यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर को अपना इस्तीफा सौंपकर NIT नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी रायपुर में कार्यग्रहण करने पहुंचे। डायरेक्टर व रजिस्ट्रार को हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए ज्वाइनिंग की मांग की। एनआई. टी के डायरेक्टर डॉ नारापराजू वेंकट रमन राव तथा तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ नरेंद्र दिगम्बर लोधे ने हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए ज्वाइनिंग देने से इंकार कर दिया।

डायरेक्टर व रजिस्ट्रार के खिलाफ दायर की अवमानना याचिका

न्यायालयीन आदेश की डायरेक्टर व रजिस्ट्रार द्वारा सीधेतौर पर अवहेलना करने के बाद डॉ आरिफ खान ने अधिवक्ता हमीदा सिद्धीकी के माध्यम से दोबारा हाई कोर्ट का रुख किया और एनआईटी के रजिस्ट्रार व डायरेक्टर के खिलाफ न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने के आरोप में अवमानना याचिका दायर की है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने डायरेक्टर व रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

जुर्माना और सजा दोनों का है प्रावधान

हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाई कोर्ट ने नोटिफिकेशन कर आदेश जारी कर दिया है कि न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाएगा। अवहेलना के आरोप में संबंधित को जुर्माना व सजा दी जा सकती है। कोर्ट चाहे तो जुर्माना कर सकता है या फिर सजा दे सकता है। मामला गंभीर हो तो जुर्माना के साथ सजा भी काटनी पड़ सकती है।

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