Bilaspur High Court: अवकाश के दिन खुला हाई कोर्ट, नाराज चीफ जस्टिस ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर मांगा जवाब, पढ़िए क्या है मामला

Bilaspur High Court News: शनिवार को अवकाश के दिन हाई कोर्ट खुला। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

Update: 2026-04-04 15:10 GMT

Bilaspur High Court Holidays News: बिलासपुर। शनिवार को अवकाश के दिन हाई कोर्ट खुला। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

हालांकि आज न्यायालय का कार्य दिवस नहीं है, मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्रदेश के निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर बरती जा रही कोताही पर नाराजगी जताई।

रिपोर्ट में कहा है, प्रदेश में एक अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ और आरटीई (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम के तहत कक्षा 1 में प्रवेश प्रक्रिया की बेहद धीमी है। 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 (62%) का ही सत्यापन हुआ है, जिससे 16,000 से अधिक आवेदन लंबित हैं, और कई जिलों में 10% से भी कम आवेदनों का सत्यापन हुआ है; इसके अलावा, यह भी ध्यान में रखते हुए कि लोक शिक्षा निदेशालय (डीपीआई) ने पंजीकरण और नोडल सत्यापन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक की समयसीमा निर्धारित की थी, जो अभी भी अधूरी है।

नोडल अधिकारी, प्रिंसिपल स्तर पर सत्यापन की धीमी गति के कारण समय सीमा समाप्त हो गई है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अधिकांश जिलों में लंबित आवेदनों का नोडल सत्यापन समय पर पूरा नहीं हुआ है, प्राप्त आवेदनों की संख्या और उपलब्ध सीटों के बीच असमानता है। लॉटरी के माध्यम से स्कूल आवंटन 13 से 17 अप्रैल के बीच निर्धारित है, लेकिन अपूर्ण सत्यापन के कारण इसमें देरी की संभावना जताई है। जिससे अभिभावकों को असुविधा होगी क्योंकि उन्हें बार-बार आना पड़ सकता है।

आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश में बरती जा रही लापरवाही को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने संज्ञान में लेते हुए अवकाश के दिन हाई कोर्ट में सुनवाई की। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच में स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका की सुनवाई हुई। जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर इस संबंध में शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

आरटीई से संबंधित याचिका की सुनवाई आठ अप्रैल को होनी थी

बता दें, भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर बरती जा रही लापरवाही के संबंध में अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। इसी दिन स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका की भी सुनवाई होगी। डिवीजन बेंच ने दोनों याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई करने की व्यवस्था दी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सीवी भगवंत राव के अधिवक्ता देवर्षी ठाकुर, राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता पीके भादुड़ी, वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने पैरवी की। डिवीजन बेंच ने अधिवक्ताओं की दलीलों को सुना।

Tags:    

Similar News