हाई कोर्ट बोला: स्त्रीधन पर होता है पत्नी का पूरा अधिकार, इसे वापस लेने पर नहीं बनता आपराधिक मामला, ट्रायल कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट ने किया रद्द

High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है, स्त्रीधन पर पत्नी का पूरा अधिकार होता है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को अपने स्त्रीधन का उपयोग या निपटान अपनी इच्छा से करने का पूरा अधिकार है। इसे वापस लेने पर आपराधिक मामला नहीं बनता। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को रद्द कर दिया है।

Update: 2026-03-31 11:42 GMT

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प्रयागराज।31 मार्च 2026| इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है, स्त्रीधन पर पत्नी का पूरा अधिकार होता है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को अपने स्त्रीधन का उपयोग या निपटान अपनी इच्छा से करने का पूरा अधिकार है। इसे वापस लेने पर आपराधिक मामला नहीं बनता। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को रद्द कर दिया है।

स्त्रीधन के संबंध में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, 'स्त्रीधन' पर महिला का पूर्ण अधिकार होता है और उसे लेने के लिए पत्नी के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात (धारा 406 आईपीसी) का मामला नहीं चलाया जा सकता। सिंगल बेंच ने कहा, विवाह से पहले, विवाह के समय या उसके बाद महिला को जो भी संपत्ति दी जाती है, वह उसका 'स्त्रीधन' होती है और उस पर केवल उसी का अधिकार रहता है। अदालत ने कहा कि पत्नी को अपने स्त्रीधन का उपयोग अपनी इच्छा से करने का पूरा अधिकार है।

हाई कोर्ट ने कहा, पति आवश्यकता पड़ने पर इसका उपयोग कर सकता है, लेकिन उसका नैतिक दायित्व है, वह इसे या उसकी कीमत वापस करे। पत्नी और उसके परिजनों ने समन आदेश और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। पति ने आरोप लगाया था, पत्नी और उसके परिवार के लोगों ने उसके घर में घुसकर नकदी, आभूषण और घरेलू सामान ले लिया। मामले में ट्रायल कोर्ट ने पत्नी और अन्य आरोपियों को समन जारी कर तलब किया था। ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, धारा 405 और 406 IPC के तहत अपराध तभी बनता है जब किसी को सौंपी गई संपत्ति का संबंधित व्यक्ति बेईमानी से दुरुपयोग करे। हालांकि, स्त्रीधन के मामले में पत्नी स्वयं उसकी मालकिन होती है, इसलिए उसके खिलाफ यह धारा लागू नहीं होती। हाई कोर्ट ने कहा, ट्रायल कोर्ट ने बिना कानूनी प्रावधानों को सही ढंग से समझे जल्दबाजी में समन आदेश पारित कर दिया।

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