Chhattisgarh Tarkash 2025: पुलिस कमिश्नरः जो जीता वो सिकंदर
Chhattisgarh Tarkash 2025: छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी और राजनीति पर केंद्रित पत्रकार संजय के. दीक्षित का पिछले 17 बरसों से निरंतर प्रकाशित लोकप्रिय साप्ताहिक स्तंभ तरकश।
तरकश, 25 जनवरी 2025
संजय के. दीक्षित
पुलिस कमिश्नरः जो जीता वो सिकंदर
रायपुर पुलिस कमिश्नर सिस्टम सिर्फ सिटी में लागू किया जाए या फिर पूरे जिले में, इसको लेकर सत्ता के गलियारों में शह-मात का खूब खेल चला। 31 दिसंबर के कैबिनेट की बैठक में रायपुर सिटी में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का फैसला लिया गया, उसमें किसी ने मुंह खोलना मुनासिब नहीं समझा। मगर 16 जनवरी को जैसे ही लॉ एवं गृह विभाग से अनुमोदन के बाद नोटिफिकेशन राजपत्र में प्रकाशित करने के लिए लेटर सरकारी प्रेस को गया कि गृह मंत्री का फोन आ गया। इसके बाद उपर से और भी फोन...अभी नोटिफिकेशन रोका जाए। दोनों फोन कॉल का लब्बोलुआब यह था कि शहर नहीं, पूरे जिले को पुलिस कमिश्नरेट में शामिल किया जाएगा। बताते हैं, आखिरी समय में आईपीएस बिरादरी के सीनियर अफसरों का एक धड़ा गृह मंत्री और बीजेपी संगठन के कुछ नेताओं को कंविंस करने में कामयाब हो गया कि सिर्फ शहर के लिए पुलिस कमिश्नरेट बनाने का कोई मतलब नहीं। इसका नतीजा यह हुआ कि नोटिफिकेशन पर ब्रेक लग गया। इसके बाद लोग एकदम अश्वस्त हो गए कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम अब पूरे जिले में लगेगा। मगर जो जीता वो सिकंदर...परदे के पीछे चली चकरी ने पूरी बाजी पलट दी। लोगों को समझना चाहिए कि आईएएस देश की सर्वोच्च सर्विस है। यूपीएससी में पहले आईएएस, फिर आईपीएस का नंबर आता है। आईएएस अगर टॉप पर हैं तो उनका ब्रेन भी टॉप का ही चलता होगा न। वैसा ही हुआ। इस गेम का अंतिम नतीजा यह रहा कि ओल्ड रायपुर सिटी में ही पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने नोटिफिकेशन जारी हो गया।
सरकार को माइलेज नहीं
रायपुर के पड़ोसी शहर नागपुर में 30 बरस पहले पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो गया था। ओड़िसा भी छत्तीसगढ़ से आगे निकल गया था। ऐसे में, राज्य बनने के 25 साल बाद विष्णुदेव साय सरकार ने पुलिस में रिफार्म का यह ऐतिहासिक कार्य किया। मगर इस काम के लिए जिस तरह धूम-धड़ाके के साथ उसे पॉलिटिकल माइलेज लेना था, वह नहीं हो सका। इसके पीछे क्या वजह रही...ये सरकार के रणनीतिकार बता पाएंगे। जाहिर है, दूसरे विभागों में छोटे से रिफार्म में भी सितारा होटलों में बड़ा इवेंट किया जाता है। किन्तु देश के पुलिस कमिश्नर के नक्शे में रायपुर का नाम शामिल होने के बाद भी कोई जलसा या कार्यक्रम तो हुआ नहीं, पुलिस कमिश्नर ऑफिस में कोई नारियल फोड़ने भी नहीं गया। फर्स्ट पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला का ऑफिस के पोर्च में गाड़ी से उतरते और रायपुर के आखिरी कप्तान लाल उमेद सिंह को बुके देते फोटू और फूटेज के अलावे कुछ भी नहीं हुआ। सरकार के लिए यह एक बड़ा श्रेय लेने का अवसर था।
आखिरी कप्तान
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट उल्लासविहीन माहौल में प्रारंभ हुआ मगर रायपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लोगों ने अतीत की यादों को सहेजने के लिए जरूर एक छोटा सा भावुक कार्यक्रम किया। आधा दर्जन से अधिक रायपुर के पूर्व कप्तान इस मौके पर पहुंचे थे। चाय-नाश्ता और पुरानी यादों तो ताजा करने के साथ ही फोटो सेशन हुआ। बहरहाल, 23 जनवरी को रायपुर पुलिस अधीक्षक का अस्तित्व हमेशा के लिए खतम होने के साथ ही रायपुर के आखिरी कप्तान के तौर पर लाल उमेद सिंह का नाम दर्ज हो गया। इस स्तंभ में पहले भी लिखा गया था कि रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा की सेहत पर पुलिस कमिश्नर का कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उनका रायपुर रेंज और पांचों जिला सलामत रहेगा। उनका ऑफिस भी वही रहेगा। रायपुर ग्रामीण जिला उनके पास रहेगा। इसलिए जिलों की संख्या भी यथावत रहेगी।
5 रंगरुट आईपीएस
फर्स्ट पुलिस कमिश्नर के लिए शुरू से दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग का नाम प्रमुखता से चल रहा था। 22 जनवरी की रात आठ बजे तक यही था कि रामगोपाल गर्ग कल सुबह रायपुर पहुंचकर कमिश्नरेट में कार्यभार ग्रहण करेंगे। मगर सरकार ने बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला को फर्स्ट पुलिस कमिश्नर बनने के लिए सलेक्ट किया। संजीव का चयन इसलिए किया गया कि उन्हें रायपुर की समझ हैं। स्कूलिंग और कॉलेज की पढ़ाई के बाद पुलिस की सर्विस में वे रायपुर में सीएसपी, एडिशनल एसपी और एसएसपी रहे। एमपी की राजधानी भोपाल में भी वे सीएसपी रहे हैं। वे प्रमोटी आईपीएस जरूर हैं मगर प्रोफाइल उनका बड़ा साउंड है। सरकार ने उन्हें सीबीआई में काम कर चुके अमित कांबले को एडिशनल कमिश्नर बनाया है तो डीसीपी और क्राइम, ट्रैफिक के लिए 2020 बैच के पांच अधिकारियों को दिया है। याने रायपुर शहर में अब सीपी और एडिशनल सीपी के अलावे पांच यंग आईपीएस बैठेंगे। सरकार में बैठे अफसरों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में आईपीएस का तीन-चार बैच बुरी कदर डिरेल्ड हो गया था। 2020 बैच को इसलिए डीसीपी बनाया गया है कि पांचों पोलिसिंग में दक्ष हो जांए। अलबत्ता, इस बैच के एक जूनियर आईपीएस नारायणपुर में एसपी हैं। इसको लेकर 2020 बैच वालों में कुछ-कुछ चल रहा था। मगर फर्स्ट डीसीपी बनाए जाने से हो सकता है कि इनकी व्यथा थोड़ी कम हो जाए।
प्रमोटी आईपीएस का दबदबा
छत्तीसगढ़ में प्रमोटी आईपीएस अधिकारियों के लिए यह स्वर्णिम टाईम होगा। इस समय 33 में से 14 जिलों के कप्तान प्रमोटी हैं। इसमें रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जांजगीर रायगढ़ और वीवीआईपी जिला जशपुर भी शामिल हैं। रायपुर के पुलिस कमिश्नर के लिए भी प्रमोटी आईपीएस को चुना गया तो रायपुर ग्रामीण में भी प्रमोटी। महत्वपूर्ण यह है कि प्रमोटी होने के बाद भी पोलिसिंग में आरआर याने डायरेक्ट से कहीं पीछे नहीं हैं। दरअसल, पिछले कुछ सालों में पुलिस महकमे का ग्रह-नक्षत्र बिगड़ा, उससे सबसे अधिक डायरेक्ट वाले ही प्रभावित हुए। जुआ, सट्टा और शराब ने कई होनहार डायरेक्टर आईपीएस अधिकारियों का कैरियर चौपट कर दिया। बता दें, इस वक्त रायपुर पुलिस कमिश्नर, रायपुर ग्रामीण, बिलासपुर, दुर्ग, जांजगीर, सक्ती, रायगढ़, जीपीएम, कोरिया, जशुपर, बेमेतरा, सूरजपुर, कोंडागांव, कवर्धा और गरियाबंद में स्टेट कैडर वाले आईपीएस कप्तान हैं। ये जरूर है कि कमिश्नरेट में पोस्टेड पांच आईपीएस एकाध साल बाद बाहर निकलेंगे तो फिर आरआर का दबदबा बढ़ेगा।
सरकार और संघ का सेतु!
भूपेश बघेल के दौर से मुख्यमंत्री का मीडिया एडवाइजर बनाने की परंपरा शुरू हुई। रुचिर गर्ग उनके मीडिया सलाहकार रहे। विष्णुदेव सरकार में पंकज झा पहले मीडिया सलाहकार बने और अभी आर0 कृष्णा दास को मीडिया सलाहकार बनाया गया है। कृष्णा संघ पृष्ठभूमि से हैं। बचपन से संघ की शाखाओं में सक्रिय रहे। इस समय संघ के मीडिया सेल के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कृष्णा को एडवाइजर टू सीएम बनने का एक मतलब सरकार और संघ के बीच सेतु निर्माण भी हो सकता है। याद होगा, रमन सिंह की तीनों पारी में संघ कोटे से विवेक सक्सेना ओएसडी टू सीएम रहे। फर्क इतना है कि कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर सरकार ने कृष्णा दास का कद बढ़ा दिया है। ऐसा प्रतीत होता है, कृष्णा मीडिया के साथ संघ के मसले भी देखेंगे।
हनी ट्रेप या ट्रेप हनी?
महिला डीएसपी और रायपुर के बिजनेसमैन के लव स्टोरी और विवाद की जांच कर पुलिस ने 1400 पेज की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। इंवेस्टिगेशन का दिलचस्प पार्ट यह रहा कि पुलिस अधिकारी उलझे रहे...कौन हनी है और कौन ट्रेप हुआ। दरअसल, इस केस में हनी का स्वाद दोनों पक्ष़्ां ने लिया। हनी ने टारगेट का शिकार किया मगर बाद में वह खुद ही ट्रेप हो गई।
कलेक्टर की लिस्ट
जगदलपुर कलेक्टर हरीश एस0 को सरकार ने सेंट्रल डेपुटेशन के लिए रिलीव कर दिया। इसके साथ ही 2017 बैच के आईएएस आकाश छिकारा को वहां का कलेक्टर अपाइंट कर दिया गया। 31 जनवरी के आसपास कलेक्टर की एक लिस्ट और निकलेगी। बलौदा बाजार कलेक्टर दीपक सोनी को भी दिल्ली में पोस्टिंग मिल गई है। पोस्टिंग आर्डर निकलने के बाद थ्री वीक की मियाद पूरी होने वाली है। धान खरीदी को देखते हो सकता है कि सरकार 31 के दो-चार दिन आगे-पीछे उन्हें रिलीव करे।
अंत में दो सवाल आपसे
1. सरकार बने दो साल से अधिक होने के बाद भी बीजेपी नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति क्यों नहीं कर पा रही?
2. डीजीपी अरुणदेव गौतम के पदनाम से प्रभारी शब्द कब हटेगा?