IAS Gaurav Singh: ऑटो में कलेक्टर: कलेक्टर ने की पिंक ई-रिक्शा की सवारी, यूपीआई से किया पेमेंट, बोले...महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर, देखिए फोटो
IAS Gaurav Singh: रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने मंदिर हसौद के दौरे में आज पिंक ई-रिक्शा की सवारी की और यूपीआई के माध्यम से किराये का भुगतान किया। उन्होंने महिला चालक का किया उत्साहवर्धन। बोले, ऐसी महिलाएं समाज की ताकत हैं।
IAS Gaurav Singh: रायपुर। नवा रायपुर की सड़कों में आज एक अनोखा दृश्य देखने को मिला जब कलेक्टर डॉ गौरव सिंह और जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन पिंक ई-रिक्शा की सवारी कर रहे थे। मौका था, कलेक्टर आरंग ब्लॉक के दौरे पर निकले थे तभी उन्होंने रास्ते पर जाते पिंक ई-रिक्शा को जाते देखा। कलेक्टर ने उनसे रूकने का आग्रह किया करते हुए कहा कि क्या हम इसमें सवारी कर सकते है। महिला चालक ने आग्रह स्वीकार कर उन्हें और सीईओ को रिक्शे में बैठाया। ग्राम रीको से बैठाया और अंतर्राष्ट्रीय किक्रेट स्टेडियम होते हुए परसदा तक करीब 12 किमी की सवारी कराई। इस दौरान उन्होंने वीबी जी राम जी के कार्यों का और ग्राम पंचायत परसदा का इसी ई-रिक्शा से पहुंचकर निरीक्षण किया।
सवारी करने के दौरान कलेक्टर डॉ सिंह ई रिक्शा चालक कोटरभाटा (आरंग) की सीतू कोसले से संवाद कर उनकी आय और कार्यप्रणाली की जानकारी ली। सीतू ने बताया कि ई-रिक्शा संचालन से उन्हें 20 हजार रुपये से अधिक मासिक आय हो रही है। “परिवार भी खुश है और मैं भी आत्मनिर्भर होकर संतुष्ट हूं,” उन्होंने बताया कि मै इस आय से स्वयं के स्वास्थ्य पर खर्च कर रही हूं और परिवार में योगदान भी कर रही हूं। इसके बाद जिले के दोनो वरिष्ठ अधिकारी ग्राम पंचायत परसदा में उतरे और किराया पूछकर ऑनलाईन यूपीआई के माध्यम से भुगतान भी किया।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में ‘बिहान’ योजना तथा एनआरडीए के तहत अभनपुर और आरंग ब्लॉक की 40 महिलाओं को 40 इलेक्ट्रिक ऑटो निःशुल्क प्रदान किए गए हैं। यह पहल जहां नया रायपुर में यातायात को सुगम बना रही है, वहीं ग्रामीण महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम भी बन रही है।
इन पिंक ई-रिक्शाओं का ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म ‘रेपिडो’ से टाई-अप किया गया है, जिससे यात्री मोबाइल ऐप के माध्यम से आसानी से सेवा ले रहे हैं। किफायती दरें और पूर्णतः इलेक्ट्रिक संचालन इस पहल को पर्यावरण हितैषी भी बनाते हैं। महिला सशक्तिकरण, हरित परिवहन और डिजिटल कनेक्टिविटी इन तीनों आयामों को साथ लेकर चल रही है। साथ ही महिलाएं डिजिटल फ्रेंडली बन रही है।