सिंहदेव मसले पर बृजमोहन का बड़ा हमला, “मंत्री के सदन छोड़कर जाने से संवैधानिक संकट…सरकार बताएं कि सिंहदेव क्या इस्तीफा दे दिए हैं…उनका जाना विशेषाधिकार हनन का मसला…जब सरकार अस्तित्व में नहीं तो चर्चा कैसे होगी”
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रायपुर,28 जून 2021। टीएस सिंहदेव मसले पर विपक्ष ने आज सत्ता पक्ष पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि मंत्री के सदन छोड़कर जाने से संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। मंत्री जब शपथ लेता है तो सामूहिक जिम्मेदारी शब्द का उल्लेख करता है। लेकिन सिंहदेव ने सरकार पर अविश्वास जताते हुए सामूहिक जिम्मेदारी का उल्लंघन किया है। बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि सिंहदेव इस्तीफा दे दिए हैं या उनसे इस्तीफा ले लिया गया है। अगर नहीं, तो मंत्री के सदन छोड़कर जाने से अब सरकार रही नहीं। और जब सरकार नहीं है तो फिर सदन में चर्चा कैसे होगी।
वरिष्ठ विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने संविधान संवैधानिक व्यवस्था विधायिका मंत्री पद की शपथ सबका उल्लेख करते हुए सदन में कहा, “मंत्री सिंहदेव का जाना विशेषाधिकार हनन का मसला बनता है.. इसके साथ साथ मंत्री सिंहदेव अपनी सरकार पर अविश्वास प्रकट कर चले गए….क्या अब वो सरकार का हिस्सा नहीं है…क्या आसंदी तक उक्ताशय की कोई सूचना पहुँची है ?”
वरिष्ठ विधायक बृजमोहन अग्रवाल के तेवर बेहद तीखे थे, और वे तथ्यों के साथ बातों को कहते हुए मंत्री सिंहदेव के जाने को प्रश्नांकित करते रहे। इस पर आसंदी से डॉ महंत ने कहा
“उनके कल के उद्बोधन को पढ़ने को मैंने आपको कहा, उसमें लिखा है तब तक के लिए जब तक कि सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं करती तो सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट कर दे रही है” लेकिन वरिष्ठ विधायक बृजमोहन अग्रवाल के तेवर तल्ख़ बने रहे और उन्होंने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए इस पर मार्गदर्शन माँगा, इसके बाद देर तक हंगामा होते रहा।
सदन से जाने के मसले पर व्यवस्था का प्रश्न उठाने पर लोकसभा में तत्कालीन विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी का ज़िक्र हुआ, जिस पर सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने कहा “आडवाणी जी ने इस्तीफ़ा दिया था.. वो मामला अलग था ये मामला अलग है”
इस मुद्दे पर पहले पाँच मिनट तक सदन की कार्यवाही रोकी गई और फिर जब कार्यवाही शुरु हुई तो वरिष्ठ विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने फिर संवैधानिक संकट का मुद्दा उठा दिया, इस बीच आसंदी से सदस्य विनय जायसवाल को प्रश्न पूछने के लिए पुकारा गया, लेकिन शोर के बीच विनय प्रश्न ही नहीं पढ़ पाए…हंगामा फिर बढा और सदन की कार्यवाही बारह बजे तक के लिए रोक दी गई।