बिहार के नए CM सम्राट चौधरी ही! अमित शाह और नीतीश कुमार की पहली पसंद, RSS सहमत नहीं

Bihar New CM : बिहार में नए सीएम को लेकर तस्वीर अब लगभग साफ है। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह की पहली पसंद सम्राट चौधरी ही हैं।

Update: 2026-04-07 06:44 GMT

अमित शाह और सम्राट चौधरी। इमेज-सोशल मीडिया

Amit Shah Decision For Bihar New CM : बिहार में नए मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा में करीब-करीब सहमति बनती दिख रही है। भाजपा सूत्रों के अनुसार उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को नया सीएम बनाया जा सकता है। अब तक सम्राट चौधरी के नाम पर आरएसएस राजी नहीं हो रहा था। मगर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद सम्राट चौधरी के नाम को लेकर पैरवी की। उन्हें अपनी पसंद बताया है। सीएम नीतीश कुमार भी सम्राट चौधरी को सीएम बनाने के पक्ष में हैं।

वैसे, आधिकारिक तौर पर भाजपा और आरएसएस के कोई पदाधिकारी इस पर स्पष्ट बोलने से परहेज कर रहे हैं। दरअसल, आरएसएस बिहार में ईबीसी कैटेगरी के नेता को नया सीएम बनाना चाहता था।

बंगाल चुनाव स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी संकेत

भाजपा ने रविवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की। 40 नेताओं की लिस्ट में बिहार से सिर्फ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम है। बंगाल से सटे जिले किशनगंज से राजनीति करने वाले मंत्री दिलीप जायसवाल भी लिस्ट में नहीं हैं। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा भी लिस्ट से बाहर हैं। इसमें भाजपा शासित राज्यों के 6 से अधिक मुख्यमंत्रियों का नाम हैं। बिहार से मंगल पांडेय, नितिन नवीन भी हैं। मंगल पांडेय पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी और नितिन नवीन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में देखें तो बिहार से सिर्फ सम्राट चौधरी को तवज्जो दी गई है।

सम्राट चौधरी ही क्यों?

सम्राट चौधरी कोइरी समाज से हैं। सीएम नीतीश कुमार कुर्मी हैं। दोनों को प्रदेश की सियासत में लव-कुश कहा जाता है। कोइरी और कुर्मी समाज की आबादी 7% है। कोइरी 4.21% और कुर्मी 2.87% हैं। इनकी बदौलत नीतीश कुमार अपनी राजनीति करते रहे हैं। ऐसे में सम्राट चौधरी को भाजपा आगे बढ़ाती है तो नीतीश कुमार का यह वोट बैंक उनके पास आ सकता है। भाजपा बिहार में लगातार गैर यादव ओबीसी को साधने का प्रयास कर रही। इस समीकरण में सम्राट चौधरी फिट बैठते हैं। कोइरी बिहार में यादव के मुकाबले मजबूत पिछड़ी जाति है।



RSS ईबीसी चेहरे को चाहता है आगे बढ़ाना

संघ का एक धड़ा सम्राट चौधरी के नाम पर राजी नहीं हो रहा है। इसके दो बड़े कारण हैं। पहला-1990 के बाद से बिहार में ओबीसी वर्ग के नेता ही सीएम बन रहे हैं। पार्टी पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बना रही। इसे देखते हुए संघ एक नए वर्ग के नेता को आगे बढ़ाना चाहता है, जिससे नया वोट बैंक बनाने में मदद मिले। इसके लिए संघ ईबीसी चेहरे को मुख्यमंत्री के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है। दूसरी वजह-सम्राट चौधरी की राजनीति की शुरुआत राजद से हुई है। फिर वह जदयू और अब भाजपा में हैं। ऐसे में इन्हें सीएम बनाया जाता है तो मूल भाजपाई नाराज हो सकते हैं। सम्राट चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी बड़ा धड़ा नाराज हो गया था । तब इन्हें आयातित भाजपाई कहा जाता था।

ईबीसी वर्ग से संजीव चौरसिया के पक्ष में क्या?

पटना के दीघा से विधायक और ईबीसी कैटेगरी से आने वाले संजीव चौरसिया का बैकग्राउंड काफी मजबूत है। पिता गंगा प्रसाद चौरसिया को बिहार बीजेपी का फाउंडिंग मेंबर माना जाता है। वह राज्यपाल रहे हैं। संजीव चौरसिया ने पॉलिटिकल कॅरियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी। इसके बाद संघ के रास्ते भाजपा में आए। 2015 से तीन बार दीघा विधानसभा से जीतते आ रहे हैं। संजीव चौरसिया सादगी और सीधे संवाद के लिए जाने जाते हैं।

सम्राट चौधरी का पॉलिटिकल कॅरियर कैसा?

  • 1999 में राबड़ी सरकार में कृषि मंत्री बने। उम्र पर सवाल उठने पर गर्वनर ने मंत्री पद से हटा दिया था।
  • 2014 में राजद के 22 में से 13 विधायकों को साथ लेकर पार्टी तोड़ने का दावा। मगर, 9 बागी विधायक लालू प्रसाद के पास वापस लौटे।
  • 2014 में जदयू में शामिल हो गए। एमएलसी चुने गए और जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री बने।
  • 2017 में भाजपा में शामिल हुए। एनडीए सरकार में पंचायती राज मंत्री बनाए गए। 28 जनवरी 2024 को उप मुख्यमंत्री बनाए गए।
  • 20 नवंबर 2025 को फिर उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
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