नितिन नवीन की जगह लेंगे संजय मयूख! बांकीपुर सीट के लिए रेस में ये भी नाम

Bihar Political News: पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे नितिन नबीन 30 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। नियमानुसार 6 महीने के भीतर इस सीट पर उपचुनाव होना है। ऐसे में बीजेपी की इस परंपरागत सीट के लिए कई नेता दावेदारी ठोक रहे हैं।

Update: 2026-04-05 06:34 GMT

Bankipur Seat By-Election: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट फिर चर्चा में है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद नितिन नबीन विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं। अब यह सीट खाली है। राजधानी पटना की इस हाई प्रोफाइल सीट पर दावेदारी को सियासी सरगर्मी तेज है। मगर, दावेदारी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी संजय मयूख सबसे आगे हैं।

5 बार विधायक रहे नितिन नबीन नितिन नवीन 2006 से बांकीपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे। यहां से पांच बार विधायक रह चुके हैं। पहले उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा बांकीपुर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट का इतिहास काफी दिलचस्प है।

कायस्थ जाति से ही दावेदार

बांकीपुर सीट पर कायस्थ जाति का प्रतिनिधित्व रहा है। भाजपा की पारंपरिक इस सीट के दावेदारों में कायस्थ समाज के ही नेता हैं। पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के बेटे ऋतुराज सिंन्हा का नाम भी प्रमुख दावेदारों में है। ऋतुराज बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव हैं। बिहार की कमेटी में सदस्य भी हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान ऋतुराज पटना साहिब लोकसभा सीट से दावेदार थे। हालांकि, कई बार दावेदारी के बाद भी उनको टिकट नहीं मिला है। इस बार उम्मीद है कि मौका मिल सकता है।

नीतीश कुमार के करीबी रणवीर नंदन भी रेस में

नीतीश कुमार के करीबी रणवीर नंदन बीजेपी में काफी सक्रिय हैं। ये विधान पार्षद रहे हैं। अभी रणवीर नंदन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। लंबे समय से इनकी नजर बांकीपुर सीट पर है। इस बार भी चुनाव लड़ने की कोशिश में है।

अजय आलोक में दौड़ में

अजय आलोक भी बीजेपी के मजबूत नेताओं में से एक हैं। वह भी कायस्थ समाज से हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय प्रवक्ता है। मीडिया में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते हैं। अजय आलोक विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।

कौन हैं संजय मयूख?

संजय मयूख 2016 से लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। इस साल उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है और बांकीपुर सीट पर अगले 6 महीने के भीतर चुनाव होना है। कायस्थ कोटे से राज्य सरकार में मयूख को मंत्री भी बनाया जा सकता है। मयूख 1990 में बीजेपी से जुड़े थे। 1995 में बिहार भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बने। इन्हें 2013 में भाजपा की राष्ट्रीय मीडिया टीम में जगह मिली। फिलहाल बंगाल विधानसभा चुनाव में व्यस्त हैं।

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