नालंदा के शीतला मंदिर में पूजा के दौरान मची भगदड़, 8 श्रद्धालुओं की मौत, कई घायल... बढ़ सकती है मरने वालों की संख्या

Nalanda Stampede News: बिहार के नालंदा जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है. मंगलवार आज 31 मार्च की सुबह मघड़ा शीतला मंद‍िर में भगदड़ मच गयी. इस भगदड़ में 8 महिलाओं की मौत हो गयी.

Update: 2026-03-31 06:05 GMT

इमेज- इंटरनेट 

Nalanda Stampede News: 31 मार्च 2026, बिहार के नालंदा जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है. मंगलवार आज 31 मार्च की सुबह मघड़ा शीतला मंद‍िर में भगदड़ मच गयी. इस भगदड़ में 8 महिलाओं की मौत हो गयी. जबकि कई लोग घायल हो गए है. माना जा रहा है मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है.  

शीतला मंदिर में मची भगदड़

घटना दीपनगर थाना इलाके के मघड़ा गांव में स्थित शीतला मंदिर की है. मंगलवार सुबह की घटना है. मंगलवार सुबह पूजा के दौरान अचानक मंदिर में भगदड़ मच गयी. जिसमे कई लोग दब गए. इस घटना में 8 महिलाओं की मौत हो गयी. और 6 लोग घायल बताये जा रहे हैं. 

कैसे हुआ हादसा 

जानकारी के मुताबिक़, मघड़ा शीतला मंदिर के पास मेला लगा हुआ है. चैत्र के आखिरी मंगलवार को शीतला मंदिर में बड़ी संख्या में लोग पूजा करने पहुंचे थे. पूजा करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की कतार लगी हुई थी. इसी बीच किसी कारण भगदड़ मच गई. 

कितने की हुई मौत

भगदड़ के बाद चीख पुकार मच गयी. घटना की सूचना पुलिस को दी गयी. सूचना के बाद पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. और घायलों को इलाज के लिए मॉडल अस्पताल भेजा गया. इस घटना में 8 महिलाओं की मौत हो गयी. और 6 लोग घायल बताये जा रहे हैं. मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है.

घटना कैसे हुई है अभी इसका पता नहीं चल सका है. कहा जा रहा है श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ होने के बाद भी सुरक्षा-व्यवस्था नहीं थी. जिस वजह से यह घटना हुई है. फ़िलहाल मामले की जांच की जा रही है. 

चंद्रगुप्‍त के शासनकाल से जुड़ा है शीतला मंदिर

शीतला मंदिर बिहारशरीफ से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. ये मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं इस मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है. यह गुप्तकाल शासक चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल से जुड़ा है. कहा जाता है चीन के मशहूर यात्री फाह्यान ने यहाँ पूजा की थी. यहाँ दूर दूर से लोग पूजा करने आते हैं.  चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी, यानी शीतला अष्टमी को मुख्य पूजा होती है. इस दिन किसी के घर में चूल्हा नहीं जलता. एक दिन पहले बनाये खाने का भोग माँ को लगाते हैं और खुद भी खाते हैं. 


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