Video SP नक्सलियों के गढ़ में: धुर नक्सल क्षेत्र में एसपी और एएसपी ने 3 दिन रुककर खुलवाया BSF का कैम्प, कहा...
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कांकेर। नक्सलियों के गढ़ कहे जाने वाले चीलपरस में एसपी शलभ सिन्हा और एएसपी खोमन सिन्हा ने तीन दिन रहकर बीएसएफ का कैम्प खुलवाया। इस कैम्प के विरोध में ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।
कांकेर जिले के अंतिम छोर जिसे नक्सलियों का बड़ा गढ़ कहा जाता है, वहां तक एसपी के साथ ही पुलिस टीम बाइक से पगडंडियों से होते हुए चीलपरस पहुंचे। एसपी सिन्हा, एएसपी सहित पुलिस टीम चीलपरस में तीन दिन रही और कैम्प खुलवाया। एसपी शलभ सिन्हा ने कहा, 'हमने यहां बीएसएफ का कैंप लगाया है। हमने ग्रामीणों से जाना है कि उनकी क्या-क्या मांगें हैं। इस आधार पर रोडमैप तैयार करेंगे। यह बहुत ही संवेदनशील क्षेत्र है, जहां बहुत से विकास कार्य रुके हुए हैं। सड़क विकास की लाइफ लाइन है। दो बड़े नाले हैं, जिसमें पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में यह क्षेत्र टापू में तब्दील हो जाता है। इस कारण से स्कूलों में शिक्षक और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी नहीं पहुंच पाते। कैम्प खुलने से रुके हुए विकास कार्य पूरे होंगे।' एसपी ने कहा कि डर के कारण ग्रामीण कैम्प का विरोध कर रहे हैं। उनके साथ सामाजिक स्तर की बैठक की गई है।
ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर
कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा के सबसे अंतिम छोर में बसे ग्राम पंचायत पानी डोबिर के आश्रित ग्राम चीलपरस में बीएसएफ कैंप के विरोध में ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। ग्रामीण फरस राम ने कहा, हमने शासन से हॉस्पिटल और स्कूल की मांग की थी। इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, उल्टे कैम्प लाकर बैठा दिया। हमने धान खरीदी केंद्र बनाने की मांग की तो जमीन नहीं होने का हवाला दिया गया, जबकि कैम्प बनाने के लिए कई पेड़ों की बलि दे दी गई।
बजनाथ कड़ियाम ने बताया कि लोगों ने कभी भी कैंप की मांग नहीं की है। हमने स्कूल और हॉस्पिटल की मांग की है। हमारे यहां मिलने वाले वनोपज खनिज संपदा को पूंजीपतियों को देने के लिए यहां कैम्प खोला गया है। इसी तरह राकेश कुमार नेताम ने बताया कि ग्रामीणों की मांग पर स्कूल भवन नहीं दिया गया। स्कूल में टीचरनहीं हैं। आज भी हम झरने का पानी पीने को मजबूर हैं। हमारे इस क्षेत्र में माइंस है, जिसे खोदने के लिए यहां बीएसएफ कैंप लाया गया है।