विधानसभा ब्रेकिंग: सत्ता पक्ष के आरोप पर विपक्ष का पलटवार.. विपक्ष का हंगामा..सदस्य अजय चंद्राकर, बृजमोहन और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक बोले- “जो लिखा ही नहीं है, उसे पढ़कर माफ़ी माँगने की बात कैसे कह दिए..” आसंदी ने दी व्यवस्था- इस मसले से जुड़ी सारी बात विलोपित..”
रायपुर,23 दिसंबर 2020। स्थगन प्रस्ताव पर कांग्रेस के आरोप पर सदन की कार्यवाही ज़ब दुबारा शुरु हुई तो विपक्ष ने समूचे सत्ता पक्ष को निशाने पर ले लिया। हंगामा इस कदर बढ़ा कि, आसंदी में मौजुद सभापति को माफ़ी माँगनी पड़ गई। विपक्ष ने इस पर गहरा क्षोभ जताया और माँग रखी कि यह सदन का काला दिन है,आसंदी ने जो माफ़ी माँगी है, उसे विलोपित की जाए।
आसंदी से सभापति सत्यनारायण शर्मा ने स्पष्ट किया –
“मैंने सदन की कार्यवाही सुचारु रुप से चले इसके लिए खेद प्रकट किया.. यदि आप सबकी माँग है विलोपित करना है तो मैं विलोपित करता हूँ”
मसला तब हंगामे में बदला जबकि स्थगन प्रस्ताव पर दर्ज ब्यौरे को लेकर सदस्य बृहस्पति सिंह ने आसंदी से कहा –
“स्थगन प्रस्ताव में जिस टांगर महरी निवासी संजय सिंह किसान को मृत बताया गया वो जीवित है”
इस पर हंगामा शुरु हो गया था, और सत्ता पक्ष ने विपक्ष को ही घेर दिया। सत्ता पक्ष ने विपक्ष से माफ़ी माँगने की माँग की।हंगामा इतना बढ़ा कि आसंदी ने पाँच मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
जैसे ही कार्यवाही फिर से शुरु हुई, विपक्ष ने सत्ता पक्ष के आरोप को ख़ारिज किया, और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने स्पष्ट किया कि, जिस संजय सिंह को मृतक बताने की बात सत्ता पक्ष ने बताई वो तो स्थगन में कहीं लिखा नहीं है, बल्कि यह लिखा है कि संजय सिंह ने आत्महत्या का प्रयास किया। सदस्य अजय चंद्राकर ने प्रश्न किया
“स्थगन प्रस्ताव को पढ़ा ही नहीं गया.. जो लिखा ही नहीं गया उसे पढ़ा गया.. यह गंभीरता नहीं दर्शाता.. सत्ता पक्ष को माफी माँगनी चाहिए”
इस पर बृजमोहन अग्रवाल ने कहा –
“ विपक्ष के पास सत्ता पक्ष के मुक़ाबले जानकारी की व्यवस्था उतनी बेहतर नही होती.. मंत्री समेत सत्ता पक्ष ने इसे स्थगन को पढ़ा और गलती थी तो बताया क्यों नहीं ? जो लिखा नहीं है उसे लेकर सदन को भ्रमित क्यों किया गया”
इसके साथ ही विपक्ष,सत्ता पक्ष से माफ़ी माँगने की माँग करने लगा। इस पर हंगामा फिर बढा, तब आसंदी ने व्यवस्था दी –
“इस पूरे मसले पर कही गई हर बात विलोपित की जाती है..सदन की कार्यवाही चले.. चर्चा शुरु करिए.. मैं खेद प्रकट करता हूँ”
इस पर विपक्ष ने गहरी आपत्ति दर्ज की, धर्मजीत सिंह ने आसंदी से कहा
“आप ने जो खेद प्रकट किया है उसे विलोपित कर दीजिए.. यह सही नहीं है”
जिसके बाद आसंदी ने व्यवस्था देते हुए खेद प्रकट करने के वाक्यांश को विलोपित कर दिया। इसके बाद किसानों की मौत ख़ुदकुशी के मसले पर विपक्ष द्वारा पेश स्थगन की ग्राह्यता पर चर्चा शुरु हो गई।