700 संदेही.. 80 कैमरों का 30 TB डाटा.. 72 घंटों का टॉवर डंप.. 160 नंबर.. और गाँजे की लत ने खोल दिया सकरी डकैती कांड का रहस्य…. कप्तान समेत 43 सदस्यीय टीम ने झोंक दिया खुद को
बिलासपुर,30 जनवरी 2021। गणतंत्र दिवस के ठीक एक दिन पहले पुलिस के हूकूक को चुनौती देने वाले अंदाज में हुए सकरी ज्वेलरी डकैती की कोशिश और गोलीकांड में आखिरकार पुलिस आरोपियों को पकड़ने में सफल हो गई। बिलासपुर पुलिस ने भले छठवें दिन अभियुक्तों को पेश किया हो पुलिस के पास अपराधियो कौन है इसकी पहचान तीसरे दिन हो गई थी।
हालाँकि इस पहचान के लिए और अपराधियो तक पहुँच बनाने में जो मशक़्क़त लगी उसे यूँ समझिए कि,700 संदेही..80 कैमरों का 30 TB डाटा..घटना स्थल और आस पास के मोबाइल के 72 घंटों का टॉवर डंप और 160 नंबर से पुलिस कप्तान प्रशांत अग्रवाल और 43 सदस्यीय टीम जूझती रही, और तब बिलासपुर पुलिस ने सफलता की ओर कदम बढ़ा दिए।इधर मुख्य आरोपी के गाँजे के शौक़ और व्यवसाय ने बची कसर को पूरा कर दिया।
पुलिस को सबसे अहम सुराग अपराधियों के उस बैग से मिला था जो घटनास्थल पर छूट गया था। उस बैग में दो अहम सुराग थे, एक तो वह बैग और दूसरा उसमें मिली गाँजे की पत्तियाँ और महक। पुलिस की एक टीम ने गाँजा के शौक़ीनों को घेरे में लिया और इलाक़े भर से पूछताछ की और तब जबकि पहचान की उम्मीद टूटने ही वाली थी तब ही किसी एक ने बैग को पहचाना और हुलिया बताया। यह हुलिया सीसीटीवी में क़ैद एक अपराधी से हू ब हू मिल रहा था। पुलिस ने सीधे उस संदेही को घेरने की क़वायद की और वह संदेही था दिनेश बांधे। पुलिस रिकॉर्ड में यह नाम दर्ज था, दिनेश बांधे सेना से रिटायर जवान था और लुट के मामलों में इसका नाम रिकॉर्ड में दर्ज था।दिनेश गाँजे पीने का शौक़ीन और गाँजा बेचने का भी काम करता था।
सकरी के ज्वैलरी में डकैती की कोशिश और गोलीकांड के बाद दिनेश बांधे इस भरोसे पर था कि उसे और उसके साथियों को नहीं पहचाना जा सका है, लेकिन उसके बावजूद वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। ऐसे में पुलिस ने उसे घेरने के लिए उसके पास गाँजे का ग्राहक बन कर संपर्क किया, हालाँकि उससे बावजूद वह तुरंत नही आया, और फिर एक ऐसे व्यक्ति को पुलिस ग्राहक बनाकर ले आई जिसे वह जानता था। इस बार दिनेश बांधे आ गया, मौक़े पर मौजुद पुलिस ने जब उसे घेरा तो पूरे दुस्साहस से उसने पुलिस पर ही हमला कर दिया, उसे क़ाबू करने में दो सिपाही घायल हुए लेकिन दिनेश बांधे क़ब्ज़े में आ गया।
दिनेश बांधे के क़ब्ज़े में आने के बाद पूरे गैंग का ख़ुलासा हो गया। घटना रकम डकैती की नीयत से की गई थी, आरोपियों का मानना था कि बंदूक दिखाने से काम बन जाएगा लेकिन उल्टा हो गया, और गोली भी चली लेकिन डकैती नही हो पाई।
दिनेश के साथ इस वारदात में शामिल मोहम्मद नज़ीर अंसारी छत्तीसगढ में लूट के मामले में जबकि जेल में बंद था तभी उसका राजू साव और प्रमुख अभियुक्त दिनेश बांधेकर उर्फ़ दीनू से परिचय हुआ था, और डकैती का यह प्लान दिनेश ने ही बनाया था।
मोबाईल टॉवर डंप के ज़रिए पुलिस झारखंड के रामगढ पहुँच गई थी, इस बीच दिनेश बांधे पकड़ाया और टूट गया, नतीजतन बिलासपुर पुलिस झारखंड से दोनों अभियुक्तों को दबोच लाई।