चुनाव बाद हिंसा: कलकत्ता हाईकोर्ट की दो टूक – “पीड़ितों के सभी मामले हों दर्ज,जादवपुर के डीएम और एसपी को शो कॉज..वे बताएँ कंटेम्ट क्यों ना शुरु करें..”
0मुख्य सचिव को भी कड़े निर्देश जारी
कोलकाता,2 जुलाई 2021। पश्चिम बंगाल में चुनाव और मतगणना के बाद भड़की हिंसा के मसले पर कोलकाता हाईकोर्ट ने बेहद सख़्त निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि चुनाव के बाद हुई हिंसा के सभी दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएँ। वहीं हर पीड़ित की FIR रजिस्टर करने के साथ साथ जादवपुर ज़िले के के कलेक्टर और एसपी को शो कॉज नोटिस जारी किया गया है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव के ठीक बाद ज़बर्दस्त हिंसा फैली थी, राज्यपाल धनकर ने इसे लेकर एक रिपोर्ट केंद्र को भेजी थी, वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय की विशेष टीम भी पश्चिम बंगाल के दौरे पर गई थी। राज्यपाल धनकर हिंसा प्रभावित नागरिकों से मिलने पड़ोसी राज्य असम भी गए थे जहां हिंसा से प्रभावित नागरिक शरणार्थी शिविर में रह रहे हैं।
भयावह हिंसा की घटनाओं को हालाँकि राज्य सरकार ने सिरे से नकार दिया था। मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने आरोप लगाया था कि हिंसा की घटनाओं को बेहद बढ़ा चढ़ा कर राज्य सरकार को अस्थिर करने के इरादे से प्रचारित किया जा रहा है।
लेकिन पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट के तेवरों ने ममता सरकार के दावों पर सवाल खड़ा कर दिया है। कोलकाता हाईकोर्ट ने चुनाव बाद हिंसा पर निर्देश जारी किए –
“पुलिस हिंसा के हर मामले पर FIR दर्ज करे..राज्य यह सुनिश्चित करें कि सभी पीड़ितों का उपचार हो और राशन कार्ड ना होने पर भी अनाज मिले…मुख्य सचिव चुनाव बाद हिंसा से संबंधित सभी दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखें”
हाईकोर्ट के सख़्त तेवर की झलक भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार मौत मामले में दिए निर्देश से और साफ़ होती है। हाईकोर्ट ने कहा
“अभिजीत सरकार का दूसरा पोस्टमार्टम कमांड अस्पताल कोलकाता में किया जाए..जादवपुर के कलेक्टर और कप्तान को हम कारण बताओ नोटिस जारी करते हैं.. वे बताएँ उनके ख़िलाफ़ अवमानना का मामला क्यों न शुरु की जाए”
चुनाव बाद हिंसा को लेकर हाईकोर्ट के सख़्त तेवरों के बीच ममता सरकार के लिए एक और परेशानी मुँह बाएँ है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस हिंसा की जाँच जारी रखी है, और तारीख़ों में वृद्धि की है।