Alankar Agnihotri resignation: UGC नियमों के खिलाफ बरेली के PCS अफसर अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा, क्या है पूरी इनसाइड स्टोरी?
PCS Officer Alankar Agnihotri Resignation: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने UGC नियमों और अन्य मुद्दों को लेकर इस्तीफा दिया। जानिए पूरी अंदरूनी कहानी।
बरेली | सोमवार: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट और PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को संबोधित करते हुए करीब पांच पन्नों का इस्तीफा भेजा जिसमें उन्होंने अपने फैसले के पीछे की पीड़ा और कारणों का ज़िक्र किया है। इस्तीफे के बाद सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में उनके नाम के आगे अंग्रेजी में “REGINE” लिखा बोर्ड लगाए जाने की तस्वीर भी सामने आ गई है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
PCS सेवा में जाना-पहचाना नाम
अलंकार अग्निहोत्री उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा के 2016 बैच के अधिकारी हैं। UPPSC द्वारा चयनित PCS अधिकारियों की जिम्मेदारी जिले और तहसील स्तर पर कानून-व्यवस्था, राजस्व, विकास योजनाओं और नागरिक सेवाओं के संचालन की होती है। इसी ढांचे के भीतर काम करते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासनिक सेवा में अपनी अलग पहचान बनाई।
PCS परीक्षा में 15वीं रैंक
कानपुर नगर के रहने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ LLB की पढ़ाई भी पूरी की है। शिक्षा के बाद उन्होंने करीब दस साल तक आईटी सेक्टर में काम किया। बाद में समाज और प्रशासन में सीधे योगदान की मंशा से उन्होंने PCS परीक्षा की तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में 15वीं रैंक हासिल कर ली।
कई जिलों में निभाईं अहम जिम्मेदारियां
सरकारी सेवा में आने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने लखनऊ, उन्नाव, बलरामपुर और एटा जैसे जिलों में SDM और अन्य प्रशासनिक पदों पर कार्य किया। इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था, विकास परियोजनाओं, राशन व्यवस्था, सार्वजनिक सेवा वितरण और सरकारी योजनाओं के इम्प्लीमेंटेशन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में उन्हें बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट बनाया गया।
इस्तीफे में बताए दो बड़े कारण
अपने इस्तीफे और सार्वजनिक बयान में अलंकार अग्निहोत्री ने दो अहम मुद्दों को अपने फैसले की वजह बताया:
- University Grants Commission (UGC) के नए नियमों के खिलाफ विरोध
- प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार
उनका कहना है कि इन घटनाओं से समाज में तनाव, असंतोष और अलग-थलग पड़ने की भावना पैदा हुई, जिसे वे स्वीकार नहीं कर सके।
प्रशासनिक नहीं, वैचारिक फैसला
अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा सिर्फ एक प्रशासनिक त्यागपत्र नहीं माना जा रहा है। उन्होंने इसे सामाजिक और वैचारिक असहमति से जुड़ा फैसला बताया है। अपने पत्र में उन्होंने सरकार की नीतियों पर आलोचनात्मक टिप्पणी करते हुए कहा है कि सामान्य वर्ग, विशेषकर ब्राह्मण समाज, खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन
इस्तीफे की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग उनके सरकारी आवास के बाहर जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अलंकार अग्निहोत्री से इस्तीफा वापस लेने की मांग की। हालांकि, खबर लिखे जाने तक उन्होंने अपना फैसला बदलने के संकेत नहीं दिए हैं।
अभी 17 साल की सेवा शेष
प्रशासनिक हलकों में अलंकार अग्निहोत्री को मिलनसार और संतुलित अधिकारी के रूप में जाना जाता है। वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों के साथ उनके संबंध भी सामान्य रहे हैं। ऐसे में जब उनकी अभी करीब 17 साल की सेवा शेष थी तब उनका यह फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है।
फिलहाल उनके इस्तीफे को लेकर सरकार या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।