अभी-अभी: विधानसभा घेराव से पहले बड़ा एक्शन! कांग्रेस के 200 कार्यकर्ता हाउस अरेस्ट, अजय राय का सरकार पर वार

Congress Protest : यूपी की राजधानी में आज भारी सियासी हंगामा मचा है. मनरेगा मजदूरी और कई बड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा घेरने की तैयारी की थी, लेकिन पुलिस ने प्रदेशभर के करीब 200 बड़े नेताओं को हाउस अरेस्ट कर दिया. लखनऊ में कांग्रेस दफ्तर के बाहर भारी पुलिस तैनात है और छावनी जैसा माहौल बन गया है. प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का कहना है कि पुलिस चाहे जितनी बैरिकेडिंग लगा ले, वे मजदूरों के हक की लड़ाई लड़कर रहेंगे.

Update: 2026-02-17 06:52 GMT

अभी-अभी: विधानसभा घेराव से पहले बड़ा एक्शन! कांग्रेस के 200 कार्यकर्ता हाउस अरेस्ट, अजय राय का सरकार पर वार

Congress Protest : लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज सियासी घमासान मचा हुआ है. कांग्रेस ने मनरेगा मजदूरों के हक, महिला सुरक्षा और महापुरुषों के अपमान जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान किया है. इस प्रदर्शन को रोकने के लिए योगी सरकार और यूपी पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी है. प्रदेशभर में कांग्रेस के करीब 200 से ज्यादा बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके घरों में ही हाउस अरेस्ट कर दिया गया है.

छावनी बना लखनऊ, चप्पे-चप्पे पर फोर्स

राजधानी के मॉल एवेन्यू स्थित कांग्रेस मुख्यालय को पुलिस ने किले में तब्दील कर दिया है. यहाँ पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं और चार थानों की पुलिस लगातार गश्त कर रही है. बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया, पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और वाराणसी से लेकर झांसी तक के जिला अध्यक्षों को पुलिस ने घर से निकलने नहीं दिया. हालांकि, प्रतापगढ़ के जिलाध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी जैसे कुछ नेता पुलिस को चकमा देकर लखनऊ पहुँचने में कामयाब रहे.

अजय राय की ललकार : बैरिकेडिंग तोड़ेंगे

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मोर्चा संभाल लिया. उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि पुलिस की लाठियां और बैरिकेडिंग कांग्रेसियों को रोक नहीं पाएंगी. राय ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर मनरेगा जैसी गरीबों की योजना को खत्म करना चाहती है. मजदूरों को साल भर से मजदूरी नहीं मिली है. उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई सिर्फ मजदूरी की नहीं, बल्कि शंकराचार्य और माता अहिल्याबाई होल्कर के सम्मान की भी है, जिनका अपमान सरकार कर रही है.

पुराने जख्म और लोकतंत्र पर सवाल

सांसद किशोरी लाल शर्मा और विधायक आराधना मिश्रा मोना ने सरकार की कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या बताया है. कांग्रेस को पिछले साल की वह घटना भी याद है जब विधानसभा घेराव के दौरान कार्यकर्ता प्रभात पांडेय की जान चली गई थी. पार्टी का आरोप है कि पुलिसिया उत्पीड़न के कारण ऐसा हुआ था, इसलिए इस बार कार्यकर्ता और भी ज्यादा आक्रोश में हैं. पार्टी प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने कहा कि गिरफ्तारियों से जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता.

सरकार का पक्ष : राजभर बोले भ्रम न फैलाएं

वहीं, सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सबको प्रदर्शन का हक है, लेकिन कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है. उन्होंने मनरेगा के मुद्दे पर कहा कि नई व्यवस्था में मजदूरों को समय पर पैसा और ब्याज मिलने की सुविधा है, कांग्रेस बेवजह भ्रम फैला रही है. फिलहाल, लखनऊ की सड़कों पर तनाव बना हुआ है और पुलिस हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रख रही है.

दिसंबर 2024 में भी हुआ था ऐसा मामल 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 18 दिसंबर 2024 को भी भारी हंगामा हुआ था. उस दिन कांग्रेस ने संभल हिंसा, बिजली विभाग के निजीकरण और सरकार की नाकामियों के खिलाफ विधानसभा घेराव का बड़ा ऐलान किया था, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही बड़े नेताओं की घेराबंदी कर दी थी. प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, संगठन महासचिव अनिल यादव और दिनेश सिंह समेत दो दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं को उनके घरों में ही हाउस अरेस्ट कर दिया गया था.

पुलिस ने शाम को ही अजय राय और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय समेत कई नेताओं को नोटिस थमा दिया था. प्रशासन का तर्क था कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र चलने और धारा 163 लागू होने की वजह से घेराव की इजाजत नहीं दी जा सकती. कांग्रेस मुख्यालय पर पुलिस ने नुकीली और डबल लेयर बैरिकेडिंग लगा दी थी, जिस पर अजय राय ने तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि सरकार कटीले तारों से कार्यकर्ताओं को मारना चाहती है, लेकिन वे इस कायराना हरकत से डरने वाले नहीं हैं. उस दौरान भी सीतापुर और सोनभद्र जैसे जिलों से आ रहे कार्यकर्ताओं को सीमाओं पर ही रोक दिया गया था.

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